Radha Rani
19/02/2026
अयोध्या का राजकुमार सुबह राजा बनने वाला था, शाम तक वनवासी बन गया - और मुस्कुराता रहा!
अयोध्या में खुशियां मनाई जा रही थीं। कल श्री राम का राज्याभिषेक होने वाला था। पूरी नगरी सजी हुई थी। लेकिन रात में सब कुछ बदल गया।
रानी कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे - भरत को राज्य और राम को 14 साल का वनवास। राजा दशरथ टूट गए, लेकिन उन्होंने वचन दिया था।
जब यह बात राम जी को बताई गई, तो उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई। उन्होंने कहा, "पिता जी का वचन पूरा होना ही चाहिए। राज्य तो मिट्टी है, लेकिन पिता का वचन स्वर्ण है।"
माता कौशल्या रो रही थीं, लक्ष्मण क्रोधित थे, पूरी अयोध्या में हाहाकार मच गया। लेकिन राम जी शांत थे। उन्होंने राजसी वस्त्र उतारे और साधारण वल्कल वस्त्र पहने।
सीता जी ने कहा, "मैं भी आपके साथ चलूंगी।" लक्ष्मण जी ने कहा, "मैं भी।" और तीनों वन की ओर चल पड़े।
जब वे जा रहे थे, तो राम जी ने पीछे मुड़कर अयोध्या को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "14 साल बाद फिर मिलेंगे।" उनके चेहरे पर कोई दुख नहीं था, क्योंकि उन्हें धर्म का पालन करना था।
सीख: सच्चा धर्म यही है कि हम अपने वचन और कर्तव्य का पालन करें, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। राम जी ने दिखाया कि राज्य से बड़ा सत्य है।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जय! 🙏👑
19/02/2026
युद्ध के दौरान राम-लक्ष्मण को बचाने के लिए हनुमान जी ने पाताल लोक में जाकर अहिरावण से युद्ध किया!
रावण का भाई अहिरावण पाताल लोक का राजा था और माया-जाल का विशेषज्ञ। जब युद्ध में रावण हारने लगा, तो उसने अहिरावण को बुलाया। अहिरावण ने रात में सोते हुए राम-लक्ष्मण को उठा लिया।
जब सुबह हनुमान जी को पता चला, तो वे तुरंत पाताल लोक गए। वहां उन्होंने देखा कि माता काली की पूजा के लिए राम-लक्ष्मण की बलि दी जाने वाली है।
हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया - मध्य में हनुमान, दाएं गरुड़, बाएं नरसिंह, पीछे वराह और ऊपर हयग्रीव का मुख। इस रूप में उन्होंने पांच दिशाओं में रखे दीपक एक साथ बुझा दिए, जिसमें अहिरावण की जान थी।
अहिरावण मारा गया और राम-लक्ष्मण बच गए। माता काली ने प्रसन्न होकर हनुमान जी को आशीर्वाद दिया।
सीख: भक्त के लिए कोई भी मार्ग कठिन नहीं। जब भगवान की रक्षा करनी हो, तो भक्त असंभव को भी संभव बना देता है।
पंचमुखी हनुमान की जय! 🙏⚡
16/02/2026
जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुंचे, तो रावण ने उन्हें अपमानित करने के लिए उनकी पूंछ में कपड़े लपेटकर आग लगवा दी। रावण सोच रहा था कि इससे हनुमान जी को शर्मिंदगी होगी।
लेकिन हनुमान जी मुस्कुराए और अपनी पूंछ को इतना बड़ा कर लिया कि पूरी लंका की सेना उसमें कपड़े लपेटते-लपेटते थक गई। जब आग जलाई गई, तो हनुमान जी छोटे रूप में हो गए और लंका की छतों पर कूदने लगे।
उन्होंने एक-एक करके रावण के सोने के महलों को आग लगा दी। पूरी सोने की लंका धू-धू करके जलने लगी। राक्षस इधर-उधर भागने लगे। रावण का घमंड चूर-चूर हो गया।
लेकिन हनुमान जी ने अशोक वाटिका को नहीं जलाया, जहां सीता माता थीं। उन्होंने समुद्र में छलांग लगाकर अपनी पूंछ की आग बुझाई और प्रभु राम के पास वापस लौट गए।
सीख: जो भगवान के भक्तों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, उसका अपना ही नाश हो जाता है। हनुमान जी हमेशा धर्म की रक्षा करते हैं।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर! 🙏🔥
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