Zenith Zing
29/03/2026
इनका काम अब सिर्फ पाकिस्तान से तुलना करने तक सीमित रह गया है, और हैरानी की बात यह है कि भारतीय मीडिया भी उसी राग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में लगा रहता है। अपने देश की असली समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय, बहस का मुद्दा बार-बार वहीं घुमा दिया जाता है।
जनता महंगाई से परेशान है, एलपीजी के दाम 300–400 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई या गंभीर चर्चा देखने को नहीं मिलती।
मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भी मुद्दों की गहराई में जाने के बजाय टीआरपी के खेल में उलझा हुआ है—जहां असली सवालों की जगह तुलना और बहस का शोर ज्यादा दिखता है। नतीजा यह है कि आम आदमी महंगाई के बोझ तले दबता जा रहा है, और उसकी आवाज कहीं खोती जा रही है।
#कांग्रेस Ministry of Petroleum and Natural Gas, Government of India
27/03/2026
भारत का स्वदेशी रीजनल नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) इस समय एक गंभीर तकनीकी संकट का सामना कर रहा है। यह प्रणाली, जो देश की सामरिक और रक्षा क्षमताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, अब अपनी विश्वसनीयता को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है।
समस्या की मुख्य वजह सैटेलाइट्स में लगी परमाणु घड़ियों (Atomic Clocks) में आई खराबी है। ये घड़ियाँ किसी भी नेविगेशन सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होती हैं, क्योंकि इन्हीं के जरिए सटीक लोकेशन और टाइमिंग डेटा प्राप्त होता है।
हाल ही में स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब IRNSS-1F सैटेलाइट में लगी अंतिम सक्रिय परमाणु घड़ी भी 10 मार्च को अचानक काम करना बंद कर गई। इसके साथ ही NavIC सिस्टम को एक बड़ा झटका लगा।
इस खराबी के बाद अब पूरे सिस्टम में सिर्फ तीन ही सैटेलाइट्स ऐसे बचे हैं, जो पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम संख्या में सक्रिय सैटेलाइट्स होने से सिस्टम की सटीकता और भरोसेमंदता पर असर पड़ सकता है।
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है, खासकर तब जब NavIC को सैन्य ऑपरेशन, मिसाइल गाइडेंस, समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसे में अब जरूरत है कि इस तकनीकी समस्या का जल्द समाधान निकाला जाए और नए, अधिक विश्वसनीय सैटेलाइट्स को तैनात कर NavIC सिस्टम को फिर से मजबूत बनाया जाए, ताकि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और सुरक्षा पर कोई असर न पड़े।
#कांग्रेस
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