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09/01/2022
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31/10/2021
【परिवारवाद और बिहार की सियासत में सत्ता संघर्ष।】
रंजन अभिषेक (ब्यूरो चीफ【24 न्यूज़ नेटवर्क】)
बिहार की भूमि ने हिंदुस्तान को सैकड़ो नीति निर्माता, प्रखर वक्ता और नेता दिया है।आजादी के पश्चात भारत के प्रथम राष्ट्रपति से लेकर सदन में सैकड़ो नेता बिहार की पगडंडियों से चलकर लोकतंत्र के मंदिर तक पंहुचे।
बिहार हमेशा से ही भारतीय राजनीति को एक दिशा प्रदान करता रहा है।
भारतीय राजनीति में समाजवाद को मजबूती के साथ स्थापित करने वाले नेता जय प्रकाश नारायण,जिनके आंदोलन जे.पी आंदोलन से बिहार को कई नेता प्राप्त हुआ।
लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान सहित कई प्रमुख नेतृत्व बिहार को मिला, लेकिन समय के साथ समाजवाद का यह उद्देश्य धूमिल होकर परिवारवाद और व्यक्तिवाद में परिवर्तित हो गया।
सभी नेता भाई-भतीजावाद के मोह में अपने अपने राजनीतिक दलों के शीर्ष पर अपने ही बेटे पोते को अध्यक्ष के पद पर काबिज कर दिया।
अब यही परिवारवाद उन दलों के लिए गले की फांस बनती जा रही है, जिसके कुछ उदाहरण अभी बिहार की राजनीति में स्पष्ट देखने को मिला जब पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की मृत्यु के पश्चात पार्टी के मालिकाना हक के लिए घर में ही फूट पड़ गई।
ठीक उसी प्रकार अब लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक वारिस और राजद की कामान के लिए लालू के दोनों लाल के बीच जो चल रहा है वो किसी से छुपा हुआ नही है।
फिलहाल बिहार की राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज है, और बीते दिनों हुए पार्टी में वारिस की लड़ाई और पार्टी टूट से एक बात तो स्पष्ट है कि परिवारवाद और भाई भतीजावाद के आधार पर चल रही सभी पार्टियों का अंतिम परिणाम यही है।।
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