Aayurveda Rocks

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12/05/2022

सैकड़ों बीमारियों की जड़ .......पेट के कीडे़ ( कृमि ) .......

कीडे़ दो तरह के होते हैं !
प्रथम, बाहर के कीडे़
दूसरे शरीर के अंदर के कीडे़ !
@ बाहर के कीडे़ सर में मैल और शरीर में पसीने की वजह से जन्मते हैं, जिन्हें जूँ, लीख और चीलर आदि नामों से जानते हैं !@ शरीर के अन्दर के कीड़े तीन तरह के होते हैं !* प्रथम पखाने से पैदा होते हैैं, जो गुदा में ही रहते हैं - गुदा द्वार के आस पास काटकर खून चूसते हैं ! इन्हे चुननू आदि अनेकों नामों से जानते हैं ! जब यह ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो ऊपर की ओर चढ़ते हैं, जिससे डकार में भी पखाने की सी बदबू आने लगती है !* दूसरे तरह के कीडे़ कफ के दूषित होने पर पैदा होते हैं, जो छः तरह के होते हैं !ये आमाशय में रहते हैं और उसमें हर ओर घूमते है ! जब ये ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो ऊपर की ओर चढ़ते हैं, जिससे डकार में भी पखाने की सी बदबू आने लगती है !* तीसरे तरह के कीडे़ रक्त के दूषित होने पर पैदा हो सकते हैं, ये सफेद व बहुत ही बारीक होते हैं और रक्त के साथ - साथ चलते हुये हृदय, फेफडे़, मस्तिष्क आदि में पहुँचकर उनकी दीवारों में घाव बना देते हैं ! इससे सूजन भी आ सकती है और यह सभी अंग प्रभावित होने लगते हैं ! इनके खून में ही मल विसर्जन के कारण खून भी धीरे - धीरे दूषित होने लगता है, जिससे कोढ़ जनित अनेकों रोगहोने का खतरा बन जाता है ! # एलोपैथिक चिकित्सा के मतानुसार अमाशय के कीड़े खान - पान की अनियमितता के कारण पैदा होते हैं - जो छः प्रकार के होते है !1- राउण्ड वर्म 2 - पिन वर्म 3 - हुक वर्म 4 - व्हिप वर्म 5 - गिनी वर्म आदि - कीडे़ जन्म लेते हैं ! # कीडे़ क्यों पैदा होते हैं ..... ? बासी एवं मैदे की बनी चीजें अधिकता से खाने, ज्यादा मीठा गुड़-चीनी अधिकता से खाने, दूध या दूध से बनी अधिक चीजें खाने, उड़द और दही वगैरा के बने व्यंजन ज्यादा मात्रा में खाने, अजीर्ण में भोजन करने, दूध और दही के साथ-साथ नमक लगातार खाने,मीठा रायता जैसे पतले पदार्थ अत्यधिक पीने से मनुष्य शरीर में कीडे़ पैदा हो जाते हैं ! # कीडे़ पैदा होने के लक्षण एवं बीमारियाँ ....... शरीर के अन्दर मल, कफ व रक्त में अनेकों तरह के कीडे़ पैदा होते हैं ! इनमें खासकर बड़ी आंत में पैदा होने वाली फीता कृमि ( पटार ) ज्यादा खतरनाक होती है । जो प्रत्येक स्त्री - पुरूष व बच्चों के पूरे जीवनकाल में अनेकों बीमारियों केा जन्म देती हैं !जो निम्न है :--1 - आंताें में कीड़ों के काटने व उनके मल विसर्जन से सूजन आना, पेट में हल्का - हल्का दर्द,अजीर्ण, अपच, मंदाग्नि, गैस, कब्ज आदि का होना !2 - शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ना, जिससे अनेकों रोगों का आक्रमण !3 - बड़ों व बच्चों में स्मरण शक्ति की कमी, पढ़ने में मन न लगना, कोई बात याद करने पर भूल जाना !4 - नींद कम आना, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, पागलपन, मिर्गी, हाथ कांपना, पीलिया रोग आदि होना !5 - पित्ती, फोड़े, खुजली, कोढ़, आँखों के चारों ओर सूजन, मुँह पे झांई, मुहांसे आदि होना ।6 - पुरुषों में प्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, बार - बार पेशाब जाना आदि ।7 - स्त्रियों के सफेद पदार्थ बराबर निकलना, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर आदि ।8- बार - बार मुँह में पानी आना, अरुचि तथा दिल की धड़कन बढ़ना, ब्लडप्रेशर आदि ।9 - ज्यादा भूख लगना, बार - बार खाना, खाने से तृप्ति न होना, पेट निकल आना ।10 - भूख कम लगना, शरीर कमजोर होना, आंखो की रोशनी कमजोर होना ।11 - अच्छा पौष्टिक भोजन करने पर भी शरीर न बनना क्योंकि पेट के कीड़े आधा खाना खा जाते है!12 - फेफड़ो की तकलीफ, सांस लेने में दिक्कत, दमा की शिकायत, एलर्जी आदि !13 - बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में कमी आना !14 - बच्चों का दांत किटकिटाना, बिस्तर पर पेशाब करना, नींद में चौंक जाना, उल्टी होना15 - आंतो में कीड़ो के काटने पर घाव होने से लीवर एवं बड़ी आंत में कैंसर होने का खतरा( कैंसर के जीवाणु खाना के साथ लीवर व आंत में पहुँचकर कीड़ो के काटने से हुए घाव में सड़न पैदा कर कैंसर का रूप ले लेते हैं ) #@ ये कीड़े संसार के समस्त स्त्री - पुरुष व बच्चों में पाये जाते है ! यह छोटे - बडे 1सेन्टीमीटर से 1 मीटर तक लम्बे हो सकते हैं एवं इनका जीवनकाल 10 से 12 वर्ष तक रहता है !यह पेट की आंतो को काटकर खून पीते है जिससे आंतो में सूजन आ जाती है । साथ ही यह कीड़े जहरीला मल विसर्जित भी करते हैं जिससे पूरा पाचन तंत्र बिगड़ जाता है । यह जहरीला पदार्थ आंतो द्वारा खींचकर खून में मिला दिया जाता है जिससे खून में खराबी आ जाती है ! यही दूषित खून पूरे शरीर केसभी अंगों जैसे हृदय, फेफड़े, गुर्दे, मस्तिष्क आदि में जाता है जिससे इनका कार्य भी बाधित होता है और अनेक रोग जन्म ले लेते हैं ! शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है और अनेक रोग हावी हो जाते हैं ! इसलिए प्रत्येक मनुष्य को प्रतिवर्ष कीड़े की दवा जरूर लेनी चाहिए!एलोपैथिक दवाओं में ज्यादातर कीड़े मर जाते हैं, परन्तु जो ज्यादा खतरनाक कीड़े होते हैं, जैसे- गोलकृमि, फीताकृमि, कद्दूदाना आदि, जिन्हें पटार भी कहते हैं, वे नहीं मरतें हैं ।इन कीड़ों पर एलोपैथिक दवाओं को कोई प्रभाव नहीं पडता है !इन्हें केवल आयुर्वेदिक दवाओं से ही खत्म किया जा सकता है !ये कीड़े मरने के बाद फिर से हो जाते हैं । इसका कारण खान - पान की अनियमितता है ।मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिये प्रत्येक वर्ष कीड़े की दवा अवश्य खानी चाहिये ।

कृमि रोग की चिकित्सा
1 - बायबिरंग, नारंगी का सूखा छिलका, चीनी ( शक्कर ) को समभाग पीसकर रख लें । 6 ग्राम चूर्णको सुबह खाली पेट सादे पानी के साथ 10 दिन तक प्रतिदिन लें । दस दिन बाद कैस्टर आयल ( अरंडीका तेल ) 25 ग्राम की मात्रा में शाम को रोगी को पिला दें । सुबह मरे हुए कीड़े निकल जायेंगे ।
2 - पिसी हुई अजवायन 5 ग्राम को चीनी के साथ लगातार 10 दिन तक सादे पानी से खिलाते रहने से भी कीड़े पखाने के साथ मरकर निकल जाते है ।
3 - पका हुआ टमाटर दो नग, कालानमक डालकर सुबह - सुबह 15 दिन लगातार खाने से बालकों के चुननू आदि कीड़े मरकर पखाने के साथ निकल जाते है । सुबह खाली पेट ही टमाटर खिलायें, खाने के एकघंटे बाद ही कुछ खाने को दें ।
4 - बायबिरंग का पिसा हुआ चूर्ण तथा त्रिफला चूर्ण समभाग को 5 ग्राम की मात्रा में चीनी या गुड़ के साथ सुबह खाली पेट एवं रात्रि में खाने के आधा घंटे बाद सादे पानी से लगातार 10 दिनदें ।सभी तरह के कृमियों के लिए लाभदायक है ।
5 - नीबू के पत्तों का रस 2 ग्राम में 5 या 6 नीम के पत्ते पीसकर शहद के साथ 9 दिन खानेसे पेट के कीड़े मर जाते हैं ।
6 - पीपरा मूल और हींग को मीठे बकरी के दूध के साथ 2 ग्राम की मात्रा में 6 दिन खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

12/05/2022

पक्षाघात paralysis के रोगी के लिए बहुमूल्य
जानकारी और उपचार।
paralysis information and treatment
पक्षाघात (लकवा) पैरालिसिस में रोगी का आधा मुंह टेढ़ा
हो जाता हैं, गर्दन टेढ़ी हो जाती हैं, मुंह
से आवाज़ नहीं निकल पाती, आँख, नाक,
गाल व् भोंह टेढ़ी पढ़ जाती हैं, ये फड़कते
हैं और इनमे दर्द होता हैं। मुंह से लार गिरती
रहती हैं।
पक्षाघात paralysis होने के लक्षण
सबसे पहला लक्षण होता हैं के व्यक्ति को बोलने में
तकलीफ आती हैं, उसके शब्द टूट टूट
कर बाहर आते हैं। काम करते समय सामान हाथो से छूटना, हाथ
पैर जवाब दे जाते हैं, ऐसी स्थिति को पक्षाघात होना
माना जा सकता हैं।
पक्षाघात paralysis कारण ।
पक्षाघात होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमे प्रमुख हैं हाई
ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, बैड कोलेस्ट्रोल के बढ़ने से, या कई बार
रोगी को इनमे कोई लक्षण नहीं होते तो
उसको ब्लड क्लॉटिंग की वजह से भी
पक्षाघात (लकवा) हो सकता हैं।
पक्षाघात paralysis के प्रकार।
शरीर के आधे भाग, दायीं या
बायीं तरफ के अंग अपना कार्य बंद कर दे तो इसको
अधरंग बोलते हैं।
कई बार रोगी को एक अंग में ही लकवा
होता हैं तो जैसे ही लकवे के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत
देसी गाय का घी गर्म कर के, अगर
घी नहीं हो तो सरसों का तेल गर्म कर के,
उस से तुरंत मालिश करे।
हमारे ब्रेन के दो हिस्से हैं दायां और बायां। अगर ये अटैक हमारे
बाएं हिस्से में आया हैं तो शरीर का दायां भाग नकारा हो
जाता हैं और अगर ये अटैक दायें हिस्से में आया है तो
शरीर का बायां भाग नकारा हो जाता हैं, और अगर दोनों
भागो में अटैक आ जाए तो पूरा शरीर ही
इसकी चपेट में आ जाता हैं।
पक्षाघात paralysis में आयुर्वेद दवा।
अगर पक्षघात दायीं तरफ हैं तो।
अगर शरीर का कोई अंग या शरीर
दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए
व्रहतवातचिंतामणि रस (वैदनाथ फार्मेसी)
की ले ले। उसमे छोटी-छोटी
गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी
सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से
एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को
शुद्ध शहद से लेवें।
अगर पक्षघात बायीं तरफ हैं तो।
अगर कोई भाई बहिन बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है
उसको वीर-योगेन्द्र रस (वैदनाथ फार्मेसी)
की सुबह साँय एक एक गोली शहद के
साथ लेनी है।
अब गोली को शहद से कैसे ले………? उसके लिए
गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से
पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये
दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न
हो जाए।
क्या खायें।
पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी
(चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन
नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का
प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा।
क्या ना खायें।
लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार,
दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द
की दाल पूर्णतया वर्जित है।
फल
फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता
ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।
लकवा अर्थात पक्षाघात होने पर निम्नलिखित घरेलु उपचार करने
चाहिए।
1. 🙋राई, अकरकरा और शहद तीनो ६-६ ग्राम ले, राई
और अकरकरा को कूट पीसकर कपड़छान कर ले तथा
शहद में मिला ले। इसे दिन में 3-4 बार जीभ पर मलते
रहे। लकवे में आराम मिलता हैं।
2. 🙋पच्चीस ग्राम छिला हुआ लहसुन
पीसकर दूध में उबाले। खीर
की तरह गाढ़ा होने पर उतारकर ठंडा होने पर खाए।
पक्षघात में बहुत आराम मिलेगा।
3. 🙋सौंठ और उड़द उबालकर इसका पानी
पीने से लकवा में बहुत आराम आता हैं, यह नुस्खा
अनेक लोगो पर आजमाया हुआ हैं।
4. 🙋लहसुन की 5-6 कली
पीसकर उसे पंद्रह ग्राम शहद में मिलाकर सुबह शाम
लेने से लकवा में आराम मिलता हैं।
5. 🙋अदरक अथवा सौंठ को महीन पीसकर
उसमे सेंधा नमक मिलाकर तत्काल रोगी को सुंघाए।
पक्षाघात में आराम मिलेगा।
6. 🙋तुलसी की माला कमर में बांधे रखने से
पक्षाघात का भय नहीं रहता।
7. 🙋उड़द, कौंच के बीज, अरण्ड की जड़,
बला, हींग और सेंधा नमक -सभी बराबर
मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर रोगी को दे। इस से
पक्षाघात में आराम मिलता हैं। हाथ पैर काम करने लगते हैं।
8. 🙋अरण्ड का तेल, गंधक, हरड़, बहेड़ा, आंवला और शुद्ध
गुग्गल का समान भाग ले कर खूब कूटे, फिर चने के बराबर गोलिया
बना ले। एक एक गोली दो तीन बार
रोगी को गर्म जल से दे। पक्षाघात खत्म हो जायेगा।
रोगी को रोग की तीव्रता अनुसार
इनमे 2 या 3 घरेलु नुस्खे अपनाने चाहिए। और नारायण तेल,
लाक्षादि तेल अथवा माषादि तेल की मालिश करना लकवा
के रोगी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं //

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