Kalnemi

Kalnemi

Share

21/05/2026

कालनेमि पार्ट : 61 ( मंत्री जी की ब्रांडेड चप्पल चोरी )
—————————-
कालनेमि समाज में ठीक वैसे ही घुले-मिले हैं, जैसे सरकारी दफ्तर में “फाइल अभी प्रोसेस में है” वाला जवाब। हर जगह मौजूद। दोनों के बिना सिस्टम अधूरा-अधूरा सा लगता है।

अब देखिए… माहौल था शोक का। मंत्री जी अंतिम दर्शन करने पहुंचे। चेहरा गंभीर, चाल धीमी, आंखों में संवेदना। लेकिन, कालनेमियों की आत्मा उस समय भी “ऑपरेशन चप्पल” पर केंद्रित थी।

जैसे ही मंत्री जी वापस लौटने लगे… पता चला चप्पल गायब! बहुत खोजा लेकिन नहीं मिली ।
अब चप्पल कोई हवाई चप्पल नहीं थी कि “चलो भाई, दूसरी ले लेंगे।” मामला पूरे 18 हजार वाली ब्रांडेड चप्पल का था। मंत्री जी समझ गए कि किसी पारखी की नजर इनायत हो गई । शांत स्वभाव के मंत्री जी वैसे भी कुछ नहीं बोलते, तो यहाँ क्या बोलते ।
दुख इस बात का कम था कि चप्पल गई… चिंता इस बात की ज्यादा थी कि अब मंत्री जी लौटेंगे कैसे?
कहते हैं स्टाफ में उस वक्त ऐसा सन्नाटा पसरा जैसे कैबिनेट बैठक में किसी ने पूछ लिया हो — “सर, चुनावी वादा पूरा कब होगा ?”

फिर आनन-फानन में स्टाफ ने अपने मौजे जेब में रख जूते उतारकर मंत्री जी को पहनाए और काफिला रवाना हुआ ।

अब सोचिए… नेता लोग भी मौके देखकर राजनीति करते हैं। आसपास का माहौल भांपते हैं, फिर बयान देते हैं। लेकिन ये वाले कालनेमि तो नेताओं के भी बाप निकले। शोकसभा में भी इनके अंदर का “ब्रांड प्रेमी चोर ” जाग गया।

मतलब आदमी दुख में रो रहा है… और कालनेमि सोच रहा है —“वाह! चप्पल तो बढ़िया है… और ब्रांड भी ओरिजिनल लग रहा है!”

एक बार एक नेता जी का कुत्ता चोरी हो गया था । खोजबीन के बाद कुत्ता 🐕 वापस तो लौटा दिया गया । लेकिन नेता जी का दिल ❤️ टूट गया था । वापस उसी को लौटा दिया , जिसकी नियत ख़राब हो गई थी । मुझे उम्मीद है ये कालनेमि भी चप्पल वापस कर सकता है । मैं उसको कालनेमि का ये पार्ट समर्पित कर एक मौका दे रहा हूँ । बोले - मंत्री जी गलती से पहन ली थी । मैं तो खोज ही रहा था कि किसकी चप्पल होगी 😝

सच कहें तो देश में दो चीजें कभी खत्म नहीं होंगी —
एक पॉलिटिक्स…और दूसरी मौका देखकर चप्पल सरकाने वाली प्रतिभा। इनके साथ आपको जीना सीखना ही होगा ।

16/05/2026

कालनेमि पार्ट : 60
———————-

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने स्कूटी क्या पकड़ी, बीजेपी दफ्तर में अचानक “स्कूटी क्रांति” आ गई
जिस नेता ने जिंदगी में दोपहिया को सिर्फ ट्रैफिक में ओवरटेक करते देखा था, वो भी हेलमेट ⛑️ पहनकर ऐसे पोज देने लगा जैसे बरसों से पेट्रोल बचाओ आंदोलन चला रहा हो ।

बीजेपी मुख्यालय में एक मैडम पति के साथ आराम से कार से उतरीं, फिर किसी की स्कूटी और किसी का हेलमेट उधार लेकर फोटो शूट शुरू हो गया।
लेकिन देहरादून की धूप 🌞 और “सादगी वाला एंगल” दोनों ज्यादा देर नहीं टिके… थोड़ी देर बाद मैडम फिर एसी वाली कार में विराजमान हो गईं ।

कुछ नेत्रियां तो सलाहकारों की “इमेज बिल्डिंग स्कीम” पर इतनी गंभीर हो गईं कि कार 100 मीटर दूर खड़ी कर स्कूटी के साथ एंट्री मारने निकलीं।
मगर तभी खबर आ गई — “पत्रकारों ने देख लिया!”
बस फिर क्या था… जो स्कूटी पर राष्ट्रहित बचाने निकले थे, वो वापस ऐसे भागे जैसे बोर्ड परीक्षा में एग्जामनर ने छापा मार लिया हो।

अब निष्कर्ष भी सुन लीजिए —
दिखावे की राजनीति में स्कूटी स्टार्ट होने से पहले कैमरा स्टार्ट हो जाता है, इसलिए सावधान ‼️ रहें । एंगल कुछ भी बन सकता है ।

सलाहकारों की सलाह मुफ्त जरूर होती है, लेकिन कई बार इज्जत का पेट्रोल खूब जला जाती है! इसीलिए मुफ्त की सलाह पर झाड़ में चढ़ने से पहले सलाहकार की मंशा का परीक्षण अवश्य कर लेवें ।
- धन्यबाद

Photos from Kalnemi's post 03/05/2026

कालनेमि पार्ट- 59 (नुस्खा: किस्मत ऐसे बनती है रॉकेट!)
___________

कहते हैं नग (रत्न) धारण करने से ग्रह मजबूत होते हैं, अशुभ प्रभाव कम होते हैं और भाग्य चमक उठता है । यानी अगर कुंडली में शनि टेढ़ा बैठा हो तो नीलम पहन लो, मंगल बिगड़ा हो तो मूंगा, और अगर पूरा राजनीतिक करियर ही डगमगा रहा हो… तो फिर पूरा झोला ही गले में डाल लो!

नग का जिक्र इसलिए , कि मुझे नग का थैला भरकर घूम रहा एक सख्स ऐसी जगह मिला , जहाँ आप सामान्य तौर पर कल्पना नहीं कर सकते । राजनीतिक पार्टी के दप्तर में । कौन सी पार्टी बीजेपी । मैंने बहुत सोचा- निष्कर्ष निकला यार ये तो कमाल का आदमी है..उसे पता है कि यही एपिक सेंटर है नग बेचने का, जहाँ हर कोई भाग्योदय के चक्कर में परिक्रमा कर रहा है । ऐसे में एक नग अशुभ ग्रहों को टालकर “बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला” करते हुए भाग्य उदय कर दे, तो और क्या चाहिए…नेताजी की बल्ले बल्ले । जीवन का यही तो सार है !

मैंने नग का थैला लिए बंदे से पूछा, “भाई, ये सिर्फ मन बहलाने के लिए हैं या सच में काम भी करते हैं ?”
वो बोला, “कई नेताओं को पहना चुका हूं, आज देखों कहां से कहां हैं ।”
बात प्रमाणिक थी और वजनदार भी - प्रधान का चुनाव भी न जीत पाने वाले विधायक जी और दोपहिया से लग्ज़री कार तक पहुंचे बिना सलवट के कड़क कुर्ता पहने नेता जी की सफलता का राज ।
नग वाला मुझे कन्वेंस करने लगा—“निर्बल ग्रहों को रत्न से मजबूत किया जाता है ।” जिससे उनके शुभ फल बढ़ जाते हैं । मैंने कहा, “भाई चुनाव आने वाले हैं, थोड़ा विपक्ष के दफ्तर भी हो आओ ।”
वो चौंका—“क्यों ?”
मैंने बोला, “थोड़ा उन्हें भी 2-4 नग पहना दो…नहीं तो 2027 में मुकाबला नहीं, वॉकओवर हो जाएगा !” तुमने तो नग पहना पहनाकर बीजेपी की फील्डिंग पहले ही मजबूत कर दी ।
बंदा गर्व से मुस्कराते हुए बोला- रत्न आकाश में मौजूद ग्रहों की एनर्जी को अवशोषित कर शरीर की ऊर्जा के साथ मिलकर व्यक्ति के मन और शरीर पर प्रभाव डालते हैं “ - तो मैने कहा नेताजी लोगों को इसके फायदे बताओ, दोनों हाथ पर सभी ग्रहों के रत्न पहना दो ।
क्योंकि, आसमान के ग्रहों का तो पता नहीं, पर दिल्ली वाले ग्रहों की एनर्जी भी अगर देहरादून में एब्जॉर्ब हो सके , तो इससे बड़ा चमत्कार क्या होगा..! नेताजी लोगों का दिन क्या जिंदगी बन जाएगी और आपकी बलाएं उतारी जाएंगी । आज बैग में लेकर घूम रहे हो, भगवान ने चाहा तो कल आप भी बड़ी सी...काले शीषे वाली...सीटों पर झकास वाला सफेद रंग का तौलिया लपेटी... लग्जरी कार लेकर घूमोगे ।

मैंने तो सुझाव दे दिया—“नेताओं को एक-एक नग क्यों? दोनों हाथ, दोनों बाजू, गले, उंगलियां—जहां जगह मिले, सब जगह नग ही नग चिपका दो । पूरा सोलर सिस्टम पहना लो, फिर देखो किस्मत कैसे रॉकेट बनती है!”


___________

17/04/2026

कालनेमि पार्ट : 58 (पहले फेज़ में VIP वाइव्स प्लीज़)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

नेता जी बोले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पत्नी दोष से मुक्ति का आलोकिक मार्ग - महिलाएँ अत्यधिक ख़ुश हैं । केंद्र सरकार ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” लाकर उनकी वर्षों से दबी कुचली इच्छा को पंख दे दिए हैं ।

लेकिन, मेरी एक नेक सलाह है- “मातृ शक्ति” को
आम नेताणी जी थोड़ा ध्यान रखें…अभी ज़्यादा न उड़ें । दरअसल, पहले फेज़ में VIP वाइव्स की एंट्री है, बाकी जनता की बारी “आने वाले उज्ज्वल भविष्य” में रखी गई है। क्यों ? इसके लिए आपको आगे विस्तार से पूरा लेख पढ़ना होगा ।

मन से प्रफुल्लित,शांत चित बैठे एक नेता जी
मोदी जी का कोटि-कोटि धन्यबाद कर रहे थे । प्रफुल्लित इतने कि मन के भाव चेहरे पर आकर चमक दमक रहे थे ।

मैने कहा नेता जी ऐसा क्या हो गया ?
बोले नारी शक्ति वंदन.!!!
पत्नी ऋण से उऋण होने का ऐतिहासिक मौका । मोदी जी ने मुझे पत्नी दोष से मुक्ति दिला दी ।

मैंने कहा मतलब । बोला तुम नहीं समझोगे… मन में बड़ी पीड़ा थी । 40 साल से राजनीति कर रहा हूँ और पत्नी जी घर-परिवार, रिश्तेदार, चाय-नाश्ता, मेहमान—सब संभालती रहीं ।
उसके योगदान को मैं कैसे भुला सकता हूँ । पूरी पार्टी जानती है कि श्रीमती जी नहीं होती तो मैं पार्टी को आगे बढाने में अपना योगदान कैंसे दे पाता…!
बस मन में एक यही “टीस”रह गई थी कि अब बुढ़ापे में कहीं पत्नी दोष न लग जाए ।

मुझे तो शायद ही पार्टी टिकट दे, लेकिन अब पत्नी को चुनाव लड़ूँवाऊँगा । 2029 नहीं तो 2032 यानी कि लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में तो आरक्षित सीटों पर पत्नी जी का टिकट तय है ।

सुना आपने नेता जी को - इसिलिए शुरूआत में ही मैने बता दिया था कि - पहले फेज में वीआईपी वाइव्स की एंट्री, बाकि महिलाएं कृपया धैर्य धारण करें ।

नेता जी की ये मन की अंतिम लालसा बिल्कुल सच निकली ।
एक नहीं, तीन नेताओं की धर्मपत्नियों से मिलना हुआ । (हमारा काम ही ऐसा है कि दिनभर खटकते रहो-खबर के लिए ) मैंने नेता जी के महान योगदान का जिक्र छेड़ दिया - मैडम तत्काल बोली -इन्होंने तो मेरे VRS की फाइल तक तैयार कर दी …! ओह…! तो ये बात है…ख़बर पक्की है ।

इसीलिए मेरी सलाह है - बेटे की शादी समारोह की तरह सझ-धज कर सियासी कार्यक्रमों में पहुँचने वाली देवियों, बच्चों को ऑनलाइन लंच और ऑन लाइन डिनर पर अपना ममत्व लुटाने वाली मातृशक्ति इतना सब्र रख लिया ..बस 2037 तक थोड़ा और धैर्य रख लेना । पहला फेज- वीआईपी वाइव्स प्लीज!
Mahendra Bhatt Indian National Congress Uttarakhand BJP Uttarakhand Ratan Singh Aswal

Photos from Kalnemi's post 12/04/2026

कालनेमि पार्ट -57 (नेता जी पर टोटका…महाकाल ने कमेंट किया …न्याय ऑन द वे है ! )
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौड़-का एक सोशल मीडिया पोस्ट अचानक से वायरल मोड में आ गया। नेता जी सुबह 4 बजे “धर्म यात्रा” पर निकले थे—अब ये अलग बात है कि भगवान से मिलने से पहले उनका सामना “टोटका विभाग” की नाइट शिफ्ट से हो गया।। किसी ने एक खूबसूरत खिलौना कार पर रखा हुआ था, नेता जी ने तुरंत इसे “टोटका अटैक” घोषित कर दिया ।पुतले की आड़ में नेता जी ये बताना भी नहीं भूले कि उन्होंने नई-नईं टाटा सियारा कार ख़रीदी है ।
किसी ने नई-नवेली टाटा सियारा को VIP समझकर सीधे “बुरी नजर सुरक्षा योजना” में शामिल कर दिया—वो भी फ्री में!

खफा नेता जी ने सीधे ऊपर की अथॉरिटी को टैग कर दिया—महाकाल, महाकाली को । पोस्ट में लिखा— “अहितकारियों का नाश हो जाए”
जैसे देवलोक में कोई कंट्रोल रूम में बैठा हो… तुरंत “टोटका रिवर्सल” का ऑर्डर पास हो जाएगा और तुरंत रिप्लाई आए—
“आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है, टोटका रिवर्सल टीम रास्ते में है !”
ऐसा लग रहा था कि बस अभी महाकाल फेसबुक पर कमेंट करते ही होंगे कि — “चिंता मत करो पुत्र, न्याय ऑन द वे है…”

अब उत्तराखंड की सियासत भी अपग्रेड हो चुकी है।
विकास, विज़न और वादों का जमाना गया…
अब सीधा एंट्री हो चुकी है— वास्तु, वशीकरण और टोटका टेक्नोलॉजी की !

उधर इंडियन नेशनल कांग्रेस के राजपुर रोड दफ्तर में कुर्सी-टेबल ऐसे घूम रही हैं, जैसे कोई इंटीरियर डिज़ाइन नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्र सेट हो रहे हों।
हल्द्वानी में एक नेता जी जनता को समझा रहे थे—
“तांत्रिक और नेता में फर्क होता है…”
(हालांकि जनता अब भी कन्फ्यूज है कि नेता जी बोलना क्या चाह रहे थे 😄)

मैंने एक सिद्ध पुरुष महामंडलेश्वर से पूछा- महाराज
“महाराज! ये कमीशन, विकास और झूठे वादों वाले नेता अचानक तंत्र-मंत्र मोड में क्यों आ गए?”
ये हो क्या रहा है ?

स्वामी जी मुस्कुराए… और बोले—
“जब तुम बोर्ड एग्जाम देने जाते थे, डर लगता था?”
मैंने बोला — “बहुत!”
स्वामी जी बोले—
“बस वही हाल इन नेताओं का है… इनमें चुनावी लक्षण दिखने लगे हैं, समझो चुनाव नाम की परीक्षा नजदीक है ।”
“तब तुम्हारा पेट खराब होता था…
अब इनका पेट भी खराब है… और मुंह भी।”

मैंने पूछा महाराज, मुंह कैसे खराब?
स्वामी जी बोले—
“अरे… कालनेमि पार्ट -56 नहीं पढ़ा क्या ?
और फिर धीरे से जोड़ दिया—
“बागेश्वर में एक नेता जी क्या बोल गए थे… याद है ना?”

~~~~~~

Photos from Kalnemi's post 08/04/2026

कालनेमि पार्ट- 56 : विधायक जी को ये बता हर्ट कर गई…!!!
——————————-

उधर चुनाव आयोग ने टीएमसी सांसद को कहा गेट लॉस्ट और इधर बागेश्वर में कपकोट के विधायक जी ने उसी पाठ्यक्रम को लोकल एडिशन में लागू करते हुए एक कार्यक्रम में BDC मेंबर लच्छू पहाड़ी को बोल दिया—“तुम राजनीति में गलती से आ गए हो, तुम्हारा असली सिलेबस तो नाच-गाना था…!”

वाह रे लोकतंत्र…!
दिल्ली में सांसद अपने अपमान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लेते हैं, और पहाड़ में लच्छू पहाड़ी तिरस्कार के बावजूद भोलेपन से कहता है - विधायक जी के इन अपशब्दों से मेरा “मूड ऑफ़” हो गया । “मेरी प्रार्थना है कि विधायक जी अपने कहे शब्दों के लिए लिखित माफ़ी मांगे”

ये है असली पहाड़ी मानुष । अपमान के बावजूद गुस्सा जाहिर किया भी तो- पूरे सम्मान से और सलीके से । बेटे के अपमान से पिता आहत कुंदन राम आहत हैं, बोले - “तुम्हारी संतान भी दिव्यांग हो , तो मजाक का एहसास हो ।”

दिल्ली में TMC सांसद ख़ुद संघर्ष कर रहे थे । लच्छू पहाड़ी के लिए वहाँ की जनता आंदोलन कर रही है । कुछ इसे दलित समाज का अपमान करार दे रहे हैं, तो कुछ लोग लच्छू पहाड़ी के संघर्ष और चुनौतियों के बावजूद समाज में अपना स्थान बनाने की उनकी जिजीविषा को सलाम ठोक रहे हैं ।

बात सही भी है । दलित समाज जो हमेशा दबा कुचला रहा । कुछ लोग आज भी उन्हें अपने घर में ढोल दमाऊ बजाते हुए देखना चाहते हैं । उसी मंच पर विधायक उसी मंच पर लच्छू पहाड़ी कैसे हो सकता है…! सवाल-ठसक का भी है । कपकोट के इन प्रभावशाली विधायक जी को भी वही नमस्कार और लच्छू पहाड़ी को भी वही VIP ट्रीटमेंट …!!!

दाज्यू ! समझो यार ! एक ही विधानसभा में कई BDC मेंबर, पर विधायक तो एक ही है…तो नमस्कार भी VIP पैकेज वाला होना चाहिए ना ! शायद विधायक जी को यही लगा कि लच्छू पहाड़ी का नमस्कार कहीं ज़्यादा ही बराबरी वाला हो गया और ये बात विधायक जी को हर्ट कर गई ।

लेकिन, ये फिर भी हद तो हो ही गई—लच्छू पहाड़ी!
कद से छोटे, पर कद्र से बड़े। मंच पर हंसाते थे, अब जनता ने वोट देकर BDC मेंबर बना दिया। यानी जनता ने “एंटरटेनमेंट” को “रिप्रेजेंटेशन” में अपग्रेड कर दिया… मनोरंजन के मंच पर शानदार वेलकम, चुनाव मैदान में उससे भी जबरदस्त अभिवादन । हद है ! इतनी लोकप्रियता...डर इस बात का है…लच्छू कहीं 2027 में बागेश्वर छोड़ कपकोट से ताल न ठोंक दे ।
लोग कह रहे हैं यही बात सिस्टम के पुराने सॉफ्टवेयर को हैंग कर रही है।

मुझे लगता है, नेता हमेशा कलाकार ही होना चाहिए । कलाकार अपने आस-पास के समाज को , घटनाओं को देखता है । उन्हें बुनता है और उन्हें अपनी कला के माध्यम से मूर्त रूप देता है । उसकी खासियत उसकी संवेदनशीलता है…संवेदनशील हृदय ही दूसरे की पीड़ा के मर्म को समझ सकता है । यही कारण है कि जब कलाकार अपनी कला का प्रस्तुतिकरण करता है , तो जनता उसे हाथों-हाथ लेती है । क्यों? क्योंकि, उसे उन शब्दों में…अभिनय में अपना अक्श नजर आता है । यही असली दिक्कत है नेता लोगों की और असली सवाल भी यही है ..! क्या किसी नेता में , किसी को अपना अक्श नज़र आता है ? नहीं…! क्यों?
क्योंकि, अधिकतर नेता तो ठेकेदार ठहरे … वो “टेंडर देखता है और अपना कमीशन जोड़ता है ।

विधायक जी बोले-“ लच्छू को डांस करते-करते नेता ही बना दिया । पता नहीं वो काम करेगा या नहीं, लेकिन डांस जरूर करेगा । कभी कभी ऐसा भी हो जाता है, इसलिए हम सब लोगों को सोच समझकर ही आगे बढ़ना चाहिए ।”

विधायक जी के इन शब्दों का मतलब क्या है ?
क्या कलाकार नेता नहीं बन सकता?
दुनिया में तो वलोडिमिर ज़ेलेंस्की जैसे उदाहरण हैं, जहाँ कॉमेडियन राष्ट्रपति बन जाता है… और यहाँ कॉमेडियन BDC मेंबर बन जाए तो सिस्टम को एलर्जी हो जाती है! अपने देश में तो कॉमेडियन नेताओं की भरमार है । कई कैटागिरी वाले हैं ।

तो क्यों ऐसी भद्द पिटाते हो भाई । जनता ने आपको कंधों पे उठाया, आप उस जनता को सर माथे पे बिठाइए ।

ईश्वर ने आप पर कृपा की है , उसका अनादर मत कीजिए । कृपा बार-बार नहीं बरसती ।कहीं “निर्मल बाबा” की तरह भगवान ने भी कह दिया -कि जाओ पहले लच्छू पहाड़ी का आदर सम्मान वापस लौटाओ, तब ही 2027 में नाव पार लगेगी , वरना कृपा रुक रही है । तब क्या होगा ?
सो नेता लोगों को चुनावी साल में मेरी सलाह है - जमीन मत छोड़िये, अपने लोगों से प्यार करिए । उन्हें इज्जत और सम्मान दीजिए-वरना मान कर चलिए “कृपा रुक गई तो…! “

05/04/2026

कालनेमि पार्ट : 55............................

सियासत का सेल्फ गोल : कांग्रेसियों ने चढ़ाया, भाजपाई नेता जी उतर नहीं पाए.....................................................................

सियासत में "शब्द" कभी-कभी तलवार नहीं, खुद चलकर आने वाले बूमरैंग साबित हो जाते हैं…और इस बार कहानी कुछ ऐसी ही बनी ।
कांग्रेस के वरिष्ठ और सियासत के पुराने खिलाड़ी हरीश रावत ने कभी “उज्याडू बल्द” जैसा देसी-दार्शनिक शब्द उछाला था—सालों बाद उनके ही पुराने सिपहसालार, पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने इस शब्द को उठाया, झाड़-पोंछ कर सीधा उन्हीं पर चिपका दिया ।
अब समस्या ये हुई कि ये कोई व्हाट्सऐप फॉरवर्ड नहीं था… जहां कॉपी-पेस्ट हर जगह फिट बैठ जाए । यहां तो वही पुरानी कहावत फिट बैठ गई—“नकल के लिए भी अकल चाहिए ।” और दूसरी लाइन, जो अक्सर कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत विरोधियों पर दोहराते हैं —“जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते ।” चेले चपाटे सामने बैठे हों,तो वाह-वाह ऐसे करते हैं, जैंसे नेता जी ने अभी ईजाद किया हो ।
असली कहानी यहीं से शुरू होता है- नेता जी ने “उज्याडू बल्द” कहकर तीर चलाया, लेकिन सामने थे सियासत के अनुभवी तीरंदाज—हरीश रावत । उन्होंने जवाब में “मौथरोवाला” का ऐसा स्टीकर चिपकाया कि तीर नहीं, पूरा इतिहास ही निकल आया । और फिर वही हुआ, जो अक्सर ओवरकॉन्फिडेंस में होता है—नेता जी चारों खाने चित… और सलाहकार गायब ।
सत्यघटना पर आधारित इस कहानी में बहुत कई किरदार हैं और सोचने समझने लायक बातें भी । पहली सीख ये कि -दोस्त कितना भी चोक पर चढ़ाएं, चढ़ना नहीं आता तो पेड़ पर कभी मत चढे़, उतरने में दिक्कत होती है । खासकर, जुबान पर ब्रेक नहीं लगाया…तो ब्रेकिंग न्यूज़ बनते देर नहीं लगती । दूसरा कभी दोस्ती में कहीं गई बातों का दुश्मन बनने पर भी दुरूपयोग मत करो । तीसरा जब अपना घर शीशे का हो, तो पत्थर फेंकनें से पहले हेलमेट जरूर पहन लें ।
कहानी में अभी ट्विस्ट बाकि है—नए नए भाजपाई बने नेता जी का उठना-बैठना याराना अभी भी कांग्रेसी दोस्तों के साथ ही है । यानि कि महफिल कांग्रेसी, जोश भाजपाई, और नतीजा… आत्मघाती ! "उज्याडू बल्द" की पटकथा इसी महफिल में लिखी गई । सुना है कांग्रेसी दोस्तों ने चोक पर चढ़ाया...निंदा रस में कुछ देशी मसाला डाला । नेताजी ऐसे जोश में आए कि-यह तक दावा कर बैठे कि जब विजय बहुगुणा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने तो हरीश रावत को कमलनाथ जी से कहकर मैने केंद्र में मंत्री बनवाया ।
कांग्रेसी नेतागण समझ चुके थे कि मिसाइल लॉचिंग को तैयार हो चुकी है । नेता जी को उनका बचा-खुचा बल भी याद दिलाया गया...बचा हुआ तेल भी सींगों पर मल-मल दिया गया...मिसाइल लॉच पैड छोड़ चुकी थी...नेता जी सीधे मीडिया को फोन लगा बैठे ।
सुबह अखबार में उज्याडू बल्द के पैने सींग देख- हरीश रावत कांप गए । लंबी सांस ली । पुरानी दोस्ती, रिजॉर्ट, कैबिनेट की मीटिंगे, फाइल पे साइन और फोन कॉल्स भी याद आ गए । यादों के तरकश में घातक हथियारों की खोज होने लगी । अचानक से मौथरोवाला स्टीकर लगा पहला "जहर बुझा तीर" हाथ लग गया । सियासत के महारथी, कांग्रेस के भीष्म पितामाह जानते थे कि ये तीर कहां कितने गहरे तक वार करेगा । बस फिर क्या था । तब से नेता जी चारों खाने चित पडे हैं । सींगों पर तेल मलने वाले कांग्रेसी सलाहकार अब मुस्कराते हुए गुनगुना रहे हैं- 'हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा होय'

Indian National Congress Uttarakhand BJP Uttarakhand Ganesh Joshi Anoop Bijalwan as

05/04/2026

शाम 6 बजे कालनेमि-55 में पढ़िए : किसने पैने किए थे “उज्याडू बल्द “ के सींग । अपनों ने ही लगाया था अपनों को मारने के लिए सींगों पर तेल…!!!

04/04/2026

कालनेमि पार्ट - 54 ( दूसरों की फटी में जबरदस्ती टांग नहीं घुसानी चाहिए )
……………………………..
इसीलिए कहा जाता है कि - “दूसरों की फटी में टांग नहीं घुसानी चाहिए “
अब देखो बीजेपी के एक नए नवेले नेता जी के सर मुंडाते ही ओले पड़ गए।

बीजेपी में रहते हुए ख़ुद को कभी सच्चा, कर्तव्यनिष्ठ कांग्रेसी बताने वाले नेताजी की पहली ही गेंद पर हरीश रावत ने ऐसा बाउंसर मारा कि नेताजी की बत्ती गुल रही आज दिन भर !

हरीश रावत ने नेता जी के मोथरोवाला कनेक्शन का स्विच ऐसा ऑन किया -कि मैं दावा कर सकता हूँ-इससे पहले एक दिन में इतनी बार मोथरोवाला का पता कभी नहीं पूछा गया होगा ! वन विभाग के एक पुराने अफसर तो मुझे बाकायदा लोकेशन की मुनारा (बाउंड्री पिलर) संख्या भी बता रहे थे ।

सबकी उत्सुकता बढ़ गई है कि-आख़िर मोथरोवाला में ऐसा है क्या ? जो, नेता जी कल तक हरीश रावत और कांग्रेस के ख़िलाफ़ विज्ञप्ति बांटते फिर रहे थे -मोथरोवाला का बम 💥 फूटते ही नेता जी अंडरग्राउंड हो गए -मोथरोवाला पर बोलना तो दूर अब कांग्रेस का नाम भी मुंह पर लाने को तैयार नहीं हैं।
सुना है नेता जी आज हरीश रावत से क्षमा याचना की राह खोजने में जुटे थे । मैंने आज नेता जी से कई बार मिलने की दरख्वास्त डाली, लेकिन घर पर ही मौजूद नेता जी ने कहा-मैं घर पर नहीं हूँ ।

आखिर मोथरोवाला का राज क्या है नेता जी -देखो मेरी तो सलाह है आपको - सस्पेंस से पर्दा तो एक दिन उठ ही जाता है , उठना ही उठना होता है ..अच्छा होगा ख़ुद सामने आकर सीन क्लियर कर दो ..

इसका एक और साइड इफ़ेक्ट हो सकता है , आपके संज्ञानार्थ बता रहा हूँ, आप तो दायित्व धारियों की लिस्ट में हो, अगली लिस्ट में आपका नाम हो सकता है , हरक सिंह रावत जी बोल रहे थे. .मैंने रावत जी को पूछा बीजेपी के अंदर की बात आपको कैसे पता-बोला यार मैं कभी कभी भविष्य भी बाँचता हूँ ।

उन्होंने राजकुमार ठुकराल का उदाहरण दिया - कुछ महीने पहले उनका हाथ देखते हुए बोला था -आपका भविष्य उज्ज्वल है । अब पता नहीं भविष्य उज्ज्वल हुआ या न्ही, पर इतना मुझे मालूम हुआ है कि वो कांग्रेस में शामिल हो गए हैं । अभी तक उनको वहाँ कोई पूछ नहीं रहा था ।
हाँ, तो दायित्व की बात हो रही थी . घोषणा होने से पहले ही जिसने भी आपको प्रेस नोट की सलाह दी । चेक करना आपका दोस्त है या दुश्मन । अनाड़ी नाविक कभी कभी उत्साह में नाव भंवर में भी डाल देता है । कहीं कांग्रेसी गोत्र होने के कारण उसने आपको लपेट तो नहीं दिया ।
क्योंकि, मोथरोवाला अगर शान्त नहीं हुआ तो लिस्ट में एक नाम वेटिंग में भी डाला जा सकता है, ये तय है । धामी जी ने भले ही ऑपरेशन “प्रहार” शूरू कर दिया हो , लेकिन सीएम साहब आज भी मंच से बोल रहे थे-भाई बहिनों ऐसा मत सोचना” ऑपरेशन कालनेमि” बंद हो गया ।
Mahendra Bhatt BJP Uttarakhand Indian National Congress Uttarakhand Ganesh Godiyal Harish Rawat Dinesh Agarwal Dr Harak Singh Rawat

02/04/2026

कालनेमि पार्ट- 53 (...जब 40 साल बाद मिला न्याय ! )
---------------------------------------------
चालीस साल की लंबी तपस्या के बाद आखिरकार न्याय रूपी भगवान प्रकट हुए । अदालत में हल्की मुस्कान तैर गई—जज साहब ने आज फाइनल डिसीजन सुनाया था । कुर्सी से उठते-उठते भावुक होकर जज साबह पूछ बैठे—“क्यों भाई, अब तो खुश हो न ?”

शख्स काफी अनुभवी हो चुका था । जिंदगी के चार दशक कोर्ट-कचहरी में गुजारने के बाद उसने मुस्कुराते हुए कहा—“नहीं साहब !”

जज चौंके—“अरे क्यों ?” चालीस साल से इसी दिन का तो इंतजार कर रहे थे !

शख्स बोला—“सोच रहा हूं, आपसे तो अच्छा पुलिस का वो दरोगा ही था साहब… कम से कम पांच हजार में उसी दिन न्याय ‘होम डिलीवरी’ कर रहा था । चौकी में ही मामला रफा-दफा करने वाला था वो, अगर मैं पांच हजार दे देता । आपके यहां तो न्याय भी ईएमआई पर मिला साहब—40 साल, लाखों रुपये और आधी जिंदगी खर्च करके !”

इतना सुनते ही अदालत में सन्नाटा छा गया...जज साहब बिना कुछ बोले निकल गए । आंखों पर पटटी बांधे न्याय की देवी...ये सब देख... चुपचाप मुस्कुरा रही थीं…

Want your business to be the top-listed Media Company in Dehra Dun?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Website

Address


Vishnu Vihar Ajabpur Kalan
Dehra Dun
248121