Darul Uloom Razvia

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29/03/2025

ईद चाँद रात: एक भावनात्मक कहानी

चाँद रात का नूरानी मंज़र था। हर तरफ रोशनियाँ थीं, बाज़ार सज चुके थे, और लोग ईद की तैयारियों में मशगूल थे। मगर एक छोटी सी जगह थी जो इन तमाम रौनकों से दूर, अंधेरे में डूबी हुई थी—अम्मा सलमा का घर।

अम्मा सलमा एक बुजुर्ग औरत थीं, जो अपने बेटे हसन का इंतज़ार कर रही थीं। हसन एक दूर शहर में काम करता था और हर ईद पर घर आता था। मगर इस बार चाँद रात आ गई, मगर हसन नहीं आया। अम्मा सलमा की आँखें दरवाज़े पर टिकी हुई थीं, मगर कोई आहट सुनाई नहीं दी।

मस्जिद से ईद का चाँद नज़र आने की आवाज़ आई, तो मोहल्ले के सभी लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देने लगे। मगर अम्मा सलमा की आँखों में आँसू भर आए। उनका दिल बेचैन था। उन्होंने दुआ के लिए हाथ उठाए और कहा, "या अल्लाह! मेरा बेटा जहाँ भी हो, उसको खैर-ओ-अफियत से रखना।"

अचानक दरवाज़ा खटखटाया गया। अम्मा सलमा ने तेजी से दरवाज़ा खोला। सामने हसन खड़ा था, आँखों में नमी और हाथ में अम्मा के लिए ईद का तोहफ़ा। अम्मा सलमा ने उसे गले से लगा लिया, और उनकी आँखों से बहते आँसू खुशी के मोती बन गए।

हसन ने कहा, "अम्मा, इस बार देर हो गई, मगर मैं आपको अकेला नहीं छोड़ सकता। आप मेरी दुनिया हैं।"

अम्मा सलमा ने अपने बेटे का माथा चूमा और कहा, "बेटा, मेरी ईद का चाँद तू ही है।"

उस रात अम्मा सलमा का घर भी ईद की रोशनियों से भर गया, क्योंकि असली खुशी तो अपनों के साथ होने में ही है।

मैंने आपकी कहानी को हिंदी में अनुवाद कर दिया है। अगर आप इसमें कोई और बदलाव चाहते हैं तो मुझे बताइए!

22/03/2025

हजरत उमर (रज़ि.) की इंसाफ़ पसंदी का एक किस्सा

हजरत उमर बिन खत्ताब (रज़ि.) इस्लाम के दूसरे ख़लीफ़ा थे और उनकी इंसाफ़ पसंदी मशहूर थी। एक बार का वाक़या है कि एक आदमी हजरत उमर (रज़ि.) के पास आया और शिकायत की:

"अमीरुल मोमिनीन! आपके बेटे ने मेरी ऊंटनी को मारा है, जिससे वह घायल हो गई है।"

हजरत उमर (रज़ि.) ने अपने बेटे को बुलाया और उससे पूछा:

"क्या यह सच है?"

बेटे ने इकरार किया कि गलती उसी की थी। हजरत उमर (रज़ि.) ने फरमाया:

"इसका हक अदा करो, वरना तुम्हें सज़ा मिलेगी।"

बेटे ने ऊंटनी के मालिक को मुआवजा दिया और उससे माफी मांगी। यह देखकर लोगों को बहुत हैरत हुई कि एक ख़लीफ़ा अपने ही बेटे के खिलाफ इंसाफ कर रहे हैं।

हजरत उमर (रज़ि.) का यही इंसाफ और अल्लाह का खौफ था, जिसने इस्लामी हुकूमत को ताक़तवर और बरकत वाला बनाया। उनका कहना था:

"अगर फरात नदी के किनारे कोई कुत्ता भी भूखा मर गया, तो मैं अल्लाह के सामने इसका जवाबदेह रहूंगा।"

यह किस्सा हमें सिखाता है कि इन्साफ़ हर हाल में करना चाहिए, चाहे वो अपने करीबी के खिलाफ ही क्यों न हो।

17/03/2025

नेक इरादे की बरकत
एक छोटे से गाँव में, अली नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह एक ईमानदार और मेहनती इंसान था, जो हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखता था। अली हर दिन जंगल में जाता और लकड़ियाँ काटकर लाता, जिन्हें वह बाजार में बेचकर अपने परिवार का गुजारा करता था।
एक दिन, जब अली जंगल में लकड़ियाँ काट रहा था, तो उसे एक बूढ़ा आदमी मिला। बूढ़ा आदमी बहुत थका हुआ और भूखा लग रहा था। अली को उस पर दया आई और उसने अपनी रोटी और पानी उसे दे दिया। बूढ़े आदमी ने अली को दुआ दी और कहा, "अल्लाह तुम्हें तुम्हारी नेकी का फल देगा।"
अली ने बूढ़े आदमी का शुक्रिया अदा किया और अपनी राह पर चल दिया। शाम को, जब अली लकड़ियाँ लेकर बाजार पहुँचा, तो उसे एक धनी व्यापारी मिला। व्यापारी को लकड़ियों की जरूरत थी और उसने अली को उनकी अच्छी कीमत दी। अली को इतनी बड़ी रकम मिलने पर बहुत खुशी हुई।
उस दिन से, अली की जिंदगी बदल गई। उसे हर काम में बरकत मिलने लगी। उसकी कमाई बढ़ने लगी और उसका परिवार खुशहाल हो गया। अली ने हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा किया और अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दान करता रहा।
एक रात, अली ने सपने में देखा कि बूढ़ा आदमी उससे कह रहा है, "अली, तुमने मेरी मदद की, इसलिए अल्लाह ने तुम्हें बरकत दी। हमेशा नेक काम करते रहो और अल्लाह पर भरोसा रखो।"
अली जाग गया और उसने अल्लाह का शुक्र अदा किया। वह समझ गया कि उसकी नेकी का फल उसे दुनिया और आखिरत दोनों में मिलेगा। अली ने हमेशा नेक इरादे से काम किया और अल्लाह की राह पर चलता रहा।
कहानी से सीख:
* हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए, खासकर जरूरतमंदों की।
* नेक इरादे से किए गए काम का फल हमेशा अच्छा होता है।
* हमें हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी राह पर चलना चाहिए।
* हमें अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।

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