Bundi Riyasat
27/04/2026
राजतंत्र में टैक्स लेना गलत था, परन्तु लोकतंत्र में खाद्य पदार्थो, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर भी टैक्स लिया जाना जायज़ है, इसी टैक्स से देश चलता है।
राजतंत्र में राजा गरीबों का खून चूसकर महल बनवाते थे, लेकिन लोकतंत्र में सरकारी कार्यालयों, आवासों, चुनावी प्रचार में जनता का लाखों करोड़ों रुपया लगाना सही है।
राजतंत्र में राजा सन्धियाँ कर लेते थे, लोकतंत्र में युद्ध विराम व सन्धियाँ होना जायज़ है, सन्धियाँ न होंगी तो देश उन्नति कैसे करेगा?
राजतंत्र में जातिगत भेदभाव थे, लोकतंत्र में जाति के आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है व जाति के आधार पर न्याय में भेदभाव होना जायज़ है।
राजतंत्र में बहुत अन्याय होते थे, लोकतंत्र में एक आम आदमी का केस दशकों तक चल सकता है और किसी निर्दोष व्यक्ति को 40 वर्ष कैद में रखने के बाद बाइज़्ज़त बरी किया जा सकता है इसमें कोई अन्याय नहीं है, न्याय के बदले आम आदमी का हज़ारों लाखों रुपया व्यय करना जायज़ है।
राजतंत्र में राजा आपस में बहुत लड़ते थे, लोकतंत्र में हर दूसरे घर में जमीनी विवाद होना स्वाभाविक है।
राजतंत्र में शिकार बहुत ज्यादा होते थे, लेकिन लोकतंत्र में भारत ने बीफ एक्सपोर्ट में समस्त विश्व में झंडे लहराकर एक नया कीर्तिमान रचा है।
जिस गोवंश कि रक्षा के लिए राजाओं ने शीश कटाए।
राजतंत्र में विकास नहीं होते थे, वे तो मात्र विशाल झीलें, कुएं, बावड़ियां बनवाते थे, जबकि लोकतंत्र में इन्हीं झीलों को प्रदूषित करके व अरावली जैसी पर्वत श्रृंखलाओं का विध्वंस करके विकास की एक नई परिभाषा रची जा रही है।
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