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नासा की जिज्ञासा :
ऑस्ट्रेलिया के कॉलिन निकोलस साद वैदिक गणित के भक्त हैं। उन्होंने अपना उपनाम 'जैन' रख लिया है और ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स प्रांत में बच्चों को वैदिक गणित सिखाते हैं। उनका दावा हैः 'अमेरिकी अंतरिक्ष अधिकरण नासा गोपनीय तरीके से वैदिक गणित का कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले रोबोट बनाने में उपयोग कर रहा है। नासा वाले समझना चाहते हैं कि रोबोट में आदमी के दिमाग की नकल कैसे की जा सकती है ताकि रोबोट ही दिमाग की तरह हिसाब भी लगा सके-- उदाहरण के लिए कि 96 गुणा 95 कितना हुआ....9120।'
कॉलिन निकोलस साद ने वैदिक गणित पर किताबें भी लिखी हैं। बताते हैं कि वैदिक गणित कम से कम ढाई से तीन हजार साल पुराना विज्ञान है। उस में मन ही मन हिसाब लगाने के जो16 सूत्र बताए गए हैं, वे इस विधि का उपयोग करने वाले की स्मरणशक्ति भी बढ़ाते हैं।
चमकदार प्राचीन विद्या
साद अपने बारे में कहते हैं, 'मेरा काम अंकों की इस चमकदार प्राचीन विद्या के प्रति बच्चों में प्रेम जगाना है। मेरा मानना है कि बच्चों को सचमुच वैदिक गणित सीखना चाहिए। भारतीय योगियों ने उसे हजारों साल पहले विकसित किया था। आप उनसे गणित का कोई भी प्रश्न पूछ सकते थे और वे मन की कल्पनाशक्ति से देख कर फट से जवाब दे सकते थे। उन्होंने तीन हजार साल पहले शून्य की अवधारणा प्रस्तुत की और दशमलव वाला बिंदु सुझाया। उनके बिना आज हमारे पास कंप्यूटर नहीं होता।'
साद उर्फ जैन ने मानो वैदिक गणित के प्रचार-प्रसार का व्रत ले रखा है,' मैं पिछले 25 सालों से लोगों को बता रहा हूँ कि आप अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा काम यही कर सकते हैं कि उन्हें वैदिक गणित सिखाएँ। इससे आत्मविश्वास, स्मरणशक्ति और कल्पनाशक्ति बढ़ती है। इस गणित के 16 मूल सूत्र जानने के बाद बच्चों के लिए हर ज्ञान की खिड़की खुल जाती है।'
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