Amar Azal
हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिए
कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए
मैं ने देखा है जो मर्दों की तरह रहते थे
मस्ख़रे बन गए दरबार में रहने के लिए
ऐसी मजबूरी नहीं है कि चलूँ पैदल मैं
ख़ुद को गर्माता हूँ रफ़्तार में रहने के लिए
अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग
नंगे हो जाते हैं अख़बार में रहने के लिए।
~शकील आज़मी ❤️
प्रिय,
मैंने तुम पर अर्थात चांद पर बहुत सी कविताएं लिखी है । लेकिन कुछ दिनों से चंद्रयान ने चांद की जो तस्वीर भेजी है उसमें बड़े बड़े गड्ढे पाए गए हैं । सो ये तो चांद की अर्थात तुम्हारी अवहेलना हुई । लेकिन तुम चिंता मत करना चांद पर पाए गए गड्ढों को मैंने तुम्हारा डिंपल मान लिया है ।
- तुम्हारा अमर
15/08/2023
हो आन बान और शान अमर , ऐसे ही तिरंगा लहराए ।।
हर बालिका हो रानी लक्ष्मी , बालक भगत सिंह कहलाए ।।
कुछ और मांगना नहीं मुझे बस एक दुआ है तन मन से
आजाद भगत मंगल की तरह मेरी उमर वतन को लगजाए ।।
- अमर
इसी प्रार्थना के साथ आप सभी मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की अनंत बधाई एवं शुभकामनाएं !
कवि सम्मेलन के संपर्क करें...
मैं अब हर शख्स से उकता चुका हूं
फ़कत कुछ दोस्त हैं और दोस्त भी क्या
- जॉन एलिया
05/08/2023
जो भरा नहीं है भावों से
जिसमें बहती रसधार नहीं ।
वो हृदय नहीं पत्थर है
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ।।
- मैथिली शरण गुप्त
#कविता #देशप्रेम #भारत
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the public figure
Telephone
Website
Address
Bilaspur