Hindustani Rathore

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29/04/2026

1971 की जंग के रियल हीरोः गोलियों की बौछार के बीच दुश्मन की चौकी पर फहराया था तिरंगा; जानें ब्रिगेडियर जगमाल सिंह की गाथा

रिटायर्ड ब्रिगेडियर #जगमाल_सिंह_राठौड़ नहीं रहे, 1971 के युद्ध में अदम्य साहस दिखाने पर मिला था वीर चक्र, राजपूत शांति धाम में आज अंत्येष्टी

31/08/2025

यह संयोग था या प्रयोग 🤔

इसकी भी CBI जांच होनी चाहिए जिस से
युवाओं RPSC को लेकर विश्वास बढ़े

्कैम
#डोटासरा
#राजस्थान
fans

20/07/2025

थार मारवाड़ की रेत सिर्फ गर्म नहीं होती — उसमें अपणायत, संवेदना और सहानुभूति आपसी प्रेम साझी विरासत भी घुली होती है।
और इस अपणायत को सालों तक जीया, निभाया और सहेजा अब्दुल हादी, जसवंत सिंह,अमीन खान जैसे सरहदी नेताओं ने।

इन नेताओं ने शिव, चौहटन जैसे इलाकों का दशकों तक नेतृत्व किया —
लेकिन न कभी धर्म के नाम पर दीवारें खड़ी कीं,
और न कभी सियासत में मज़हबी जहर घोला।

उनके दौर में जब कोई संकट आता,
तो ना चेहरा देखा जाता था, ना मज़हब पूछा जाता था —
बस एक हाथ आगे बढ़ता था इंसानियत के नाम पर।
क्योंकि रिश्तों की बुनियाद वोट नहीं, दिल हुआ करते थे।

जब जसवंत सिंह जैसे नेता केंद्र में पहुंचे,
तो उन्होंने थार एक्सप्रेस और वीज़ा सरलीकरण जैसे फैसलों से
सीमा के दोनों ओर बसे दिलों को जोड़ने का काम किया।
उनकी नीयत में सिर्फ एक बात थी —
थार के हर नागरिक का जीवन बेहतर कैसे हो।

इन नेताओं ने हिंदू हो या मुसलमान, सबके लिए काम किया —
ना कभी धर्म के नाम पर वोट मांगे,
ना ही पहचान के आधार पर भेद किया।
उनकी राजनीति सिर्फ सत्ता पाने का ज़रिया नहीं थी,
बल्कि थार के प्रत्येक वर्गो के रहवासी भाईचारे प्रेम के साथ रह उनके बच्चों का भविष्य संवारने की ज़िम्मेदारी थी।

लेकिन अफ़सोस…
राजनीतिक में वो दौर अब बीत गया है।

अब नफ़रत बिक रही है — अपणायत के नाम दुकाने चल रही है।
अब नेता नहीं आपस में भाईचारा खत्म करने नफरत का जहर घोलने वाले दुकानदार आ गए हैं —
जो सत्ता को दुकान समझते हैं और समाज को ग्राहक।
जहां फायदा दिखे, वहीं दुकान खोलने को तैयार।
ना विचार हैं, ना विचारधारा — सिर्फ पार्टी लाइन और चुनावी गणित।

अब थार का दर्द समझने वाले लोग गिनती में हैं,
और धर्म, जाति, नफरत की तिजारत करने वाले नेता भारी पड़ रहे हैं।

जसवंत सिंह के बाद उनके पुत्र मानवेन्द्र सिंह ने उस परंपरा को थामने की ईमानदार कोशिश की —

आमीन साहब वर्तमान की स्थिति में खामोशी बरकरार रखी।

मारवाड़ आज भी वहीं खड़ा है — उम्मीद में, कि शायद कोई फिर लौटे,
जो फिर से इस थार किरेत में भाईचारे की मिसाल दे।

#सरहदी_नेता
#राजनीति_में_संवेदनाएं

28/06/2025

₹5,000 करोड़ के घोटाले के लिए 3 साल की सज़ा
₹20 का रेल का टिकट न लेने पर 5 साल की सज़ा

क्या नमक चाट के, देसी दारू पी के लिखा था संविधान ?

28/06/2025

अब बताओ हंसराज मीणा को भारत के अंदर विश्व कि सबसे बहतरीन टेक्नोलॉजी भी चाहिए और आरक्षण भी चाहिए 😁😁 or

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