Kamlesh Singh Rajpoot
1 January यानी ईसाई अंग्रेजों का अंग्रेजी नव-वर्ष ये बोलकर हमारे नासमझ हिन्दू लोग बहुत जोर-शोर इसको मानते हैं मनाते हैं बधाई देते हैं, 25 दिसंबर ईसाईयों का एक विशेष दिन, क्योंकि इस दिन यीसु का जन्म हुआ था, इस आनंद में वे खुशी मनाते हैं, यीशु का जन्म के ठीक आठवें दिन यानी 1 जनवरी अष्टी को यीशु का सुन्नत-खतना हुआ था इसी कारण प्रतिवर्ष ईसाई इस दिन 1 जनवरी को अपने नया साल Happy New year के रूप में मनाया करते हैं । इस समय प्रकृति में नकारात्मक शीत लहर होती है, जगत में अचेतन, अपरिवर्तनीय और ठहराव रहती है, संसार में अधिकांशतः उजाड़ होती है ।
विधाता परमात्मा ब्रह्मा जी ने "चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि" पर सम्पूर्ण सृष्टि कि रचना किये थे । इस समय चराचर जगत में तिथि, पक्ष, माह, ऋतु, काल, वातावरण, सौरमंडल में सकारात्मक बदलाव होता है मनुष्य व जीवों में चेतना और प्रकृति में नव परिवर्तन, नव उमंग व मनोरमा आती है, नयापन का एक उत्साही वातावरण से चारों तरफ आनन्द ही आनन्द होता है । बसन्त की बहार होती है । ऐसे में हमारा नव-वर्ष होता है । महान् सनातन भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आस्थाओं को महत्व हम अपने पूजा, पर्व, त्योहार, संस्कार, जयन्ति, कुम्भ, उत्सव और शुभ कार्यो पर अंग्रेजी दिनांक का प्रयोग व गणना नहीं करते अपितु हम सदैव अपने तीथि-पंचांग के निर्देशों की पालन करते हैं । आगामी 'चैत्र शुक्ल प्रतिपदा' को हमारा १, ९५, ५८, ८५, १२७ वाँ सनातन भारतीय हिंदू नव-वर्ष एवं विक्रम संवत २०८२ आगामी अंग्रेजी दिनांक 30 मार्च 2025 में आता है न कि 1 जनवरी 2025 को....... अतः
तनिक बुद्धि और विवेक पुर्वक विचार किजीए
चैत्र शुक्ल नववर्ष प्रतिपदा का इंतजार किजीए
31/12/2024
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