Azim TV
*"....आप किसी की इ़ज़्ज़त करते हैं, तो ये ज़रूरी नहीं कि वो भी आपकी इ़ज़्ज़त करेगा; दुनिया ऐसी हो गई है कि अगर आप किसी को इ़ज़्ज़त देते हैं, तो वो आप को छोटा समझने लगता है;*
*क्योंकि वो समझता है कि मैं इस से बड़ा हूं, तभी तो ये मेरी इ़ज़्ज़त कर रहा है; जबकि सच ये है: आपके पास इ़ज़्ज़त है, तो इ़ज़्ज़त दे रहे है; उसके पास तकब्बुर है, तो तकब्बुर कर रहा है...."*
*इंसान भी क्या चीज़ है*
दौलत कमाने के लिए सेहत खो देता है..
सेहत को वापस पाने के लिए दौलत खो देता है..
*"कुछ लोगों की बातें मरह़म की त़रह़ होती हैं, के उन्हें सुनते ही आराम मिल जाता है; अगर आपके पास कोई ऐसा शख़्स है, जो आपको तक्लीफ़ में ह़ौसला देता है, तो आपसे ज़ियादा अमीर कोई नहीं."*
السلام علیکم
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बाद सलाम के तमामी आशिकाने रसूलﷺ की बारगाह में *माहे-रबीउल-नूर* की ढेर सारी मुबारकबाद ❣️
_चारो तरफ नूर छाया ,आका ﷺ का मीलाद आया_
*12वीं की रात नवाफिल कसरत से अदा करे*
🪸🪸🪸🪸🪸🪸🪸🪸🪸🪸🪸
आका करीम ﷺ की विलादत का महीना शुरू हो गया है इस माह में जश्न ईद मिलादुन्नबीﷺ और जुलूस का खास अहतिमाम शान ओ शौकत के साथ किया जाता है
सारे जहान को इंसानियत, मुहब्बत, शराफत, सदाकत, अमानत का पैगाम देने वाले आका की विलादत पर क्यों न हम झूमें जब नामूस ए रिसालतﷺ पर गलीज लोग जबान दराज़ी करें ऐसे में क़ौम पर अपने आकाﷺ की नामूस से इश्क जाहिर करना और भी ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है
🔴 बूढ़े से लेकर जवान तक नौजवान से लेकर बच्चे तक हर फर्द पर जुलूस में शामिल होना फर्ज़ की तरह समझा जाना चाहिए
🔴 मुल्क के हालात को पेशे नज़र रखते हुए जुलूस को मुमकिन तौर से निकाला जाना चाहिए
🔴 रास्ते में राहगीरों का खास ख्याल रखना उनको निकलने के लिए रास्ता देना अव्वल काम होना चाहिए
🔴 तय रूट पर जुलूस निकाला जाए जिस गली मोहल्ले में जुलूस निकालने पर विवाद का अंदेशा हो ऐसे गली मोहल्ले में जाने से गुरेज किया
🔴 जुलूस चूंकि अमन के पैकर आका करीमﷺ की याद में निकाला जा रहा है तो अमन का पैगाम देते हुए निकाला जान चाहिए
🔴 जुलूस के लिए जिन जगहों पर परमिशन की जरूरत लाजमी है वहां प्रशासन का सहयोग किया जाना चाहिए
🔴 जुलूस में गैर मुनासिब नारों से गुरेज किया जाए और *लब्बैक या रसुल्लल्लाहﷺ* का नारा लगाया जाना चाहिए ताकि गुस्ताख़ जान जाएं ग़ैरत ए मुस्लिम ज़िंदा है
🔴 जुलूस अगर गैरमुस्लिमों की गली, बस्ती या धार्मिक स्थल से गुज़र रहा हो तब वहां रोकना या नारेबाजी करना मुनासिब नहीं
🔴 नारे लगाने वाले शख्स का अंदाज हमलावराना (आक्रामक रूप) नहीं प्यारा अंदाज होना चाहिए
🔴 जुलूस के दौरान दुरूद पाक का विर्द नात मनकबत पढ़ते हुए ब-अदब चलना चाहिए
🔴 परचम ए इस्लाम को बुलंद और वाला रखा जाए झुकाकर या गिराकर न चलें के झुका हुआ अलम शिकस्त की अलामत है
🔴 जुलूस के इख्तिताम पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला सलाम इमाम ए इश्क मोहब्बत का कलाम *या नबी सलाम अलैका* पढ़ा जाए उसके बाद उलमा और आइम्मा दुआ कराएं मुल्क और बस्ती में अमन, चैन खैरख्वाही की दुआ की जानी चाहिए
ये इस फ़कीर का नाकिस मशवरा है जिस पर अमल करने से हाशिए पर ली गई क़ौम तमाम नुकसानात से महफूज़ रह सकती है
हो सके तो इस तरफ आने वाले जुमा को आवाम की ज़हनसाज़ी की जाए
*मरहबा या मुस्तफाﷺ* 🍁
02/09/2024
Welcome to you brother Afroz Alam 🎉
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