Arvind Patel
24/05/2026
स्मृतिशेष श्री मदनलाल प्रजापति जी और स्मृतिशेष श्री रोशन लाल गंगवार ‘बाबूजी’ केवल व्यक्ति नहीं थे, बल्कि बरेली और आसपास के बहुजन समाज की सामाजिक चेतना के मजबूत स्तंभ थे। आज ओबीसी, एससी, एसटी और बहुजन समाज में जो सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता दिखाई देती है, उसके पीछे इन दोनों महापुरुषों का दशकों लंबा संघर्ष, त्याग और वैचारिक योगदान रहा है।
दोनों महापुरुषों ने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक एकता, अधिकारों की लड़ाई और समाज के वंचित वर्गों को जागरूक करने के लिए समर्पित कर दिया। वे मान्यवर कांशीराम साहब और महामना रामस्वरूप वर्मा जी के सानिध्य में रहकर अम्बेडकरवादी और बहुजन आंदोलन से जुड़े रहे। उन्होंने बहुजन समाज को केवल संगठित ही नहीं किया, बल्कि उसे अपने अधिकारों के प्रति सजग और संघर्षशील बनाने का कार्य किया।
14 अप्रैल 1976 को बरेली में अम्बेडकर जयंती के सफल आयोजन से लेकर बरेली कोतवाली के सामने अम्बेडकर पार्क और बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापना के संघर्ष तक, दोनों महापुरुष अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। सामाजिक न्याय और सम्मान के लिए होने वाले हर आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
चौधरी ब्रह्मप्रकाश जी (पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश) के सानिध्य में 1980 के बाद उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति में प्रदेश महामंत्री के रूप में उन्होंने पिछड़े वर्गों की आवाज़ बुलंद की। “बुनियादी संघर्ष” जैसी पत्रिका में नियमित लेखन के माध्यम से समाज में वैचारिक चेतना फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। विशेष रूप से स्मृतिशेष रोशन लाल गंगवार जी ने कई पुस्तकें लिखकर समाज को नई दिशा, नई जानकारी और सामाजिक संघर्ष की नई चेतना प्रदान की।
बरेली में “पिछड़ा वर्ग संघ” और पटेल छात्रावास समिति की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1982 में अयूब खां चौराहे पर सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थापना में भी उनका प्रमुख योगदान रहा। वहीं 1990 के मंडल कमीशन समर्थक आंदोलन में दोनों नेताओं ने सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई धार दी और बहुजन आंदोलन को मजबूती प्रदान की।
स्मृतिशेष मदनलाल प्रजापति जी का संपर्क बहुजन चिंतक और महान समाज सुधारक ललई सिंह यादव जी से सीधे रूप में रहा। वे उनके आंदोलनों में सहयोग करते रहे और सामाजिक परिवर्तन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे।
दोनों महापुरुषों की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे हर व्यक्ति के सुख-दुख में खड़े रहते थे। सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा और जरूरतमंदों की सहायता उनके जीवन का मूल उद्देश्य था। उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए भी मर्यादाओं का पालन करते हुए समाज सेवा का कार्य कभी नहीं छोड़ा। विभागीय सांस्कृतिक एवं सांगठनिक गतिविधियों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आज भले ही ये दोनों महापुरुष हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और समाज के लिए किए गए कार्य आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं। बहुजन समाज में आज जो नई पीढ़ी जागरूक हुई है, उसमें इन दोनों विभूतियों के संघर्ष और वैचारिक योगदान की गहरी छाप दिखाई देती है।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और यह संकल्प लेते हैं कि सामाजिक न्याय, समानता, भाईचारे और बहुजन एकता के जिस मिशन के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया, उसे आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा।
आज बाबूजी मदनलाल प्रजापति जी की सामाजिक विरासत को उनके पुत्र श्री सुरेन्द्र प्रजापति आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं रोशन लाल गंगवार बाबूजी की सामाजिक एकता और वैचारिक परंपरा को उनके छोटे पुत्र एडवोकेट श्री प्रेमपाल गंगवार आगे बढ़ा रहे हैं। यह उनके संघर्ष और विचारों की सबसे बड़ी जीवित पहचान है।
अरविन्द पटेल
23/12/2025
*चौधरी चरण सिंह जी को सादर नमन* !
देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह को देश का किसान वर्ग अपना मसीहा मानता है उन्होंने उत्तर प्रदेश में जमींदारी प्रथा को समाप्त करने और भूमि सुधारों के जरिए छोटे किसानों और काश्तकारों के हितों की रक्षा करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने 1951 के जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम को तैयार और लागू कराया, जो छोटे पट्टेदारों को उनकी जोत पर स्थायी अधिकार प्रदान करता था।
चौधरी साहब को उत्तर प्रदेश में भूमि सुधारों के मुख्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उनके प्रयासों से महत्वपूर्ण भूमि सुधार विधेयकों को अधिनियमित किया गया जैसे कि 1939 का डिपार्टमेंट रिडेम्पशन बिल और 1960 का लैंड होल्डिंग एक्ट, जिसका उद्देश्य भूमि वितरण और कृषि स्थिरता के मुद्दों को संबोधित करना था
*किसानों के मसीहा, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी की जयंती यानि 23 दिसम्बर “ किसान दिवस” पर उन्हें कोटि-कोटि नमन*
30/08/2025
तुम्हारे बिना एक साल हो गया, और आज भी हर दिन तुम्हें बहुत याद करता हूँ तुम्हारी यादें सदा मेरे दिल में रहेंगी, लेकिन जो शून्य जीवन में तुम छोड़ गए हो वो कभी नहीं भरेगा अच्छे लोग कभी नहीं मरते वो अपनी जिंदगी से तो आज़ाद हो जाते हैं लेकिन उनकी यादें दिलों में हमेशा घर किए रहती हैं।
प्रथम पुण्यतिथि पर तुम्हे याद करते हुए
भावपूर्ण नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि ।
25/08/2025
भारत रत्न आधुनिक भारत के निर्माता ओबीसी आरक्षण के जनक महानायक डॉ.विंदेश्वरी प्रसाद मंडल ,(बी.पी. मंडल )साहब पटना विश्वविद्यालय पटना में प्रोफेसर । महान स्वतंत्रता सेनानी मंडल आयोग के अध्यक्ष भारत में मौन क्रांति के महानायक और ओबीसी दलित अल्पसंख्यकों के मसीहा। प्रथम ओबीसी मुख्यमंत्री (1968) बिहार। पूर्व विधायक और सांसद मंडल अर्थात भारत की 52% ओबीसी जनता के संविधान निर्माता और वैचारिक हीरो। सन 1965 में बिहार में दलितों के नरसंहार पर द्रवित होकर भरी विधानसभा में कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया, उनको न्याय दिलाने के लिए भूख हड़ताल और आन्दोलन किया। 6 अप्रैल 1978 को लोकसभा में द्रवित भाषण दिया अनुसूचित जाति में हरिजन शब्द की जगह संवैधानिक दलित शब्द को उसी दिन के बाद संवैधानिक तागत मिली लिखने को बहुत कुछ है पूरी किताब बन जाएगी आज उन्हें याद करते हुए उनकी जयंती पर कोटि–कोटि नमन।
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