Swami Shri Ravi Giri ji
25/11/2025
श्री राम विवाह की अनंत शुभकामनाएँ,साधुवाद
18/11/2025
श्रीमद् भागवत सार:-पूज्य स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज
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“भगवता प्रोकतं भागवतम्” जो भगवान के गूरू के मुखारविन्द से कहा गया हो वही भागवत है। भागवत में जो श्रीमद् जुड़ा है वही सक्षात भगवती माँ महालक्ष्मी श्री राधा जी ही हैं।
भागवत की कथा चिन्मयी है,अद्भुत हैं।
श्री सद्गुरूदेव भगवान कहते हैं की,संसार में जितने भी ग्रन्थ हैं उन सभी ग्रन्थों में जब उसका समारंभ होता है तो किसी देवी या देवता की स्तुति की जाती है,अपितु दुनिया में एकमात्र ऐसा श्रीमद्भागवत महाग्रन्थ है जिसके आरम्भ में किसी देवी देवता की नहीं केवल सत्य की वंदना की गई है, “सत्यं परं धीमहि”
सत्य का अर्थ श्री कृष्ण है,श्रीमद् भागवत जी में भगवान श्री कृष्ण को सत्य सत्य कहकर ही पुकारा गया है, गोविन्द जब देवकी माँ गर्भ में आये तो सबरे देवताओं ने गोविंद की स्तुति की तो वहाँ भी सत्य सत्य कहकर ही पुकारा
सत्यव्रतं सत्यप्ररं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये ।
सत्यस्य सत्यमृतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं त्वां शरणं प्रपन्नाः।।
इसलिए गुरूदेव भगवान बता रहे हैं की , सत्य ही नारायण है
नारायण ही सत्य है,राम ही सत्य है, कृष्ण ही सत्य है
तुलसी बाबा की चौपाई है……..धर्म न दूसर सत्य सामना
“There is no religion greater than truth”
“श्री गुरुदेव भगवान कहतें है की,जीवन में ज़्यादा से ज्याद सत्य बोलने का संकल्प लें।यही जीवन का सार है,यही जीवन का परमतत्व है।
श्रीमद् भागवत जी में सत्य का ही तो प्रतिपादन है
वेदों का नाम है निगम…निगमकल्पतरोर्गलितं वेदरूपी इस विशाल कल्पतरु का परिपक्व फल श्रीमद्भागवत है।
भागवत रूपी फल में भी शुक्देवरूपी तोते ने चोंच मार दी
शुकमुखादमृतद्रवसयुंतम् यह श्रीमद् भागवत शुक-मुख-विगलित
फल है शुकदेव जी परमहंस है जो जन्म लेते ही प्रवजन्त हो गए
यं प्रव्रजन्तमनुपेतमपेतकृत्यं,जिनका वैराग्य उच्चकोटि का हे की परिस्थिति विपरीत हो तो वैराग्य बहुतों को चढ़ता है पर शुकदेव जी का महाराज का तो सहज व स्वाभाविक वैराग्य है।
जिनका उपनयन-संस्कार भी अभी तक नहीं हुआ परमात्मा जिन्हे दर्शन देने के लिए स्वयं माँ की गर्भ में आ पहुँचे थे। शुकदेव जी विशुद्ध महात्मा है तो सदगुरुदेव भगवान कहते है की ऐसे सर्वभूतहृदयसम्राट श्री शुकदेव जी के पादपाद्मों में हम बारम्बार प्रणाम करते हैं श्री शुकदेव जी ने यह भागवत का सुंदर दीपक प्रज्वलित कर दिया।
प्राणीमात्र का परमधर्म एक ही है-भगवान् के चरणों में प्रेम करना
भगवान से प्रेम तो सब कर रहें हैं,परन्तु जब कोई काम
पड़ता है।भक्ति कैसी हो? “अहैतुकी हेतु रहित निष्काम भक्ति होनी चाहिए ‘’अहैतुकी अप्रतिहता’’
भगवान के प्रति स्वाभाविक प्रीति हो जिस प्रकार सूर्योदय होने पर कमल खिलता है,चन्द्रोदय होने पर कुमुदिनी विकसित होती है,इसका कोई जवाब नहीं उनका स्वभाव है।ऐसी ही प्रभु के प्रति हम सब की सहज प्रीति होवे,स्वार्थभरी प्रीति नहीं।
श्री सद्गुरूदेव भगवान कहते हैं की
भक्ति महारानी के ही दो बेटे है ज्ञान और वैराग्य।जब भगवान में भक्ति सुदृढ़ हो जाएगी,तो परमात्मा के स्वरूप का ज्ञान अपने आप ही हो जाएगा और जगत् से वैराग्य स्वतः हो जाएगा
‘’जनयत्याशु वैराग्यं ज्ञानं च यदहैतुकम्”
पूज्य सद्गुरुदेव भगवान
महामंडलेश्वर
पूज्यपाद् स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज
श्री सिद्धनाथ महादेव मठ मन्दिर
श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा,बहराइच
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श्री सिद्धनाथ मन्दिर
Swami Shri Ravi Giri ji
19/10/2025
पूज्य सद्गुरुदेव श्री सिद्धनाथ पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज जी को जन्मदिन की अनन्त शुभकामनाएं...
महादेव आपको सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रखें।
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