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27/09/2025

#माँ

आज महीने की पहली तारीख थी। पति अपनी सैलरी लेकर शाम को थका हुआ घर आया। पत्नी इंतजार में थी कि कब पति आएगा। पति के आते ही उसने उसे गर्म-गर्म चाय पिलाई और पूछा —

“आज सैलरी आ गई होगी ?”

पति मुस्कराहट के साथ बोला —

“हाँ, और इस महीने ओवर टाइम का ₹12,000 बोनस भी मिला है।”

पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पत्नी मीठी आवाज़ में बोली —

“क्या हम इस रविवार को शॉपिंग करें?”

पति बोला —

“ठीक है, लेकिन सिर्फ एक शर्त पर।

यदि तुम हफ्ते में कम से कम एक बार मेरी मां से फोन पर बात कर उनका हाल पूछोगी।”

पत्नी ने दबी आवाज़ में “हाँ” कर दी। पति सिर्फ यह चाहता था कि उसकी मां और पत्नी के बीच जो भी अनबन है, वह दूर हो जाए।

ठीक 2 मिनट बाद पति के मोबाइल पर मां का फोन आया। उधर से मां बोली —

“कैसे हो बेटा?”

बेटा बोला —

“मां, मैं ठीक हूँ। आप सबका हाल-चाल?”

तो पत्नी इधर मुंह बनाकर मन ही मन सोच रही थी —

“आज पहली तारीख है, सैलरी आई है, इसलिए फोन करके पैसे मंगवाना चाहती है। लेकिन इस बार मैं एक पैसा भी नहीं देने दूंगी।”

उधर मां बोली —

“बेटा, थोड़ी मदद चाहिए।”

तो बेटा बोला —

“बोलिए मां, क्या हुआ?”

मां बोली —

“बेटा, इस महीने ₹5000 मिल सकते हैं क्या?”

पति हर काम अपनी पत्नी से पूछकर करता था। उसने यह बात पत्नी से पूछी। पत्नी बोली —

“बोल दो कि अभी सैलरी नहीं आई है।”

बेटे ने मां से कहा —

“मां, अभी सैलरी आने में टाइम है।”

मां बोली —

“बेटा, कैसे भी करके भिजवा दो, प्लीज। हॉस्पिटल में इलाज के लिए चाहिए।”

पति ने यह बात पत्नी से दोहराई। पत्नी बोली —

“मां से बोल दो कि सरकारी हॉस्पिटल में इलाज करवा लें।”

पति ने मां को यही सलाह दी।

मां बोली —

“बेटा, सरकारी अस्पताल में सही इलाज नहीं होता और वहाँ ध्यान भी नहीं रखते। इस बार तो…”

पत्नी को गुस्सा आ गया और वह पति से बोली —

“बोल दो उन्हें कि हमारे सर पर पहले से इतना बोझ है और अब इससे ज्यादा हम सह नहीं पाएंगे। इसलिए सरकारी अस्पताल में ही इलाज करवाओ।”

पत्नी के शब्द बिगड़ गए। यह बोलते हुए बोली —

“वैसे भी चार-पांच दिन की मेहमान हैं।”

पति इस बार बोला —

“ऐसे तो मत बोलो मां के बारे में।”

पति को थोड़ा गुस्सा आ गया, लेकिन मन को शांत करते हुए मां से बोला —

“मां, इस महीने नहीं हो पाएगा। इसलिए इलाज सरकारी हॉस्पिटल में ही करवा लीजिए ।”

मां उधर से भीख मांगने लगी —

“बेटा, प्लीज ₹2000 तो दे दो।”

तो पति आँखों में आंसू लिए पत्नी से बोला —

“कम से कम ₹2000 तो देने दो।”

पत्नी गुस्से में थी लेकिन जैसे-तैसे मान गई और बोली —

“ठीक है, बोल दो कि ₹2000 भिजवा देंगे कल।”

तो उधर पति बोला —

“सासू मां, आपको कल ₹2000 भिजवा दूंगा।”

पति के मुंह से इस बार “मां” की जगह “सासू मां” सुनते ही पत्नी को चक्कर आने लगे। जुबान लड़खड़ाने लगी, पसीना छूट गया और पति से पूछा —

“क्या यह मेरी मां का फोन आया है?”

पति बोला —

“हाँ, तुम्हारी मां का ही फोन है। मैं तो तुम्हारी मां को भी अपनी मां ही समझता हूँ। लेकिन तुमने कभी मेरी मां को अपनी मां की तरह समझा ही नहीं।”

पत्नी इस बार जोर से रो पड़ी और फोन में माफी मांगने लगी —

“मुझे माफ कर दो मां, मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है।”

तो उधर से मां बोली —

“बेटी, यदि सिर्फ एक मां का दिल दुखाया होता तो माफ कर देती। लेकिन तुमने तो आज एक नहीं बल्कि दो मांओं का दिल दुखाया है।

यदि आज मैं तुम्हें माफ भी कर दूं, तो भी ऊपर वाला तुम्हें माफ नहीं करेगा।”

संदेश

तो दोस्तों, ऐसा माना जाता है कि अगर ऊपर वाला भी मां का कर्ज चुकाने आ जाए तो वह भी कंगाल हो जाए।

एक मां खुद मौत के मुंह में जाकर ज़िंदगी को जन्म देती है। उस मां का सम्मान करें।

मां तो मां होती है, उसको मरने से पहले जीते-जी न रुलाएँ।

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