Anthony Prem
01/05/2026
दुनिया में माँ से बड़ा कोई योद्धा नहीं होता, वो खुद टूट जाती है... लेकिन अपने बच्चों पर कभी आंच नहीं आने देती।
जबलपुर के बरगी डैम से निकले मां बेटे के शव की ये तस्वीर आपको भी झकझोर देगी... ज़िंदगी के आखिरी पल में भी 4 साल के बेटे को माँ ने सीने से लगा रखा था.. जब दोनों के शव बाहर निकाले गए... तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।😟😢
भाई ने जबरदस्त गाना गाया लास्ट तक ज़रूर सुने 😇😱😯
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“सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है"
गाजियाबाद में 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को अंतिम विदाई .. बहुत ही भावुक पल
हरीश अब दिल्ली एम्स पहुंच गए हैं। यहां उनके लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाएंगे और उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाएगी। इस देश में कोई भी हरीश को ठीक नहीं कर पाया।
उन मां-बाप के लिए बेहद भावुक पल था, जब वो हरीश को आखिरी विदाई दे रहे थे। उन्हें पता था कि हरीश अब कभी उठ खड़े नहीं हो सकते, फिर भी वो 13 साल तक बेड़ पर उसकी सेवा करते रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी थी। यह देश का इकलौता ऐसा मामला है, जब किसी को इच्छा मृत्यु दी गई।
हरीश पिछले 13 सालों से कोमा में हैं। हरीश 2013 में एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल से गिर गए थे, सिर पर गंभीर चोट लग गई थी, तभी से कोमा में हैं। डॉक्टरों ने अब उनके ठीक होने की संभावना न के बराबर बताई है। वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम से अब तक जीवित हैं।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने दिल्ली एम्स को निर्देश दिया कि राणा को पैलियेटिव केयर (palliative care) में भर्ती किया जाए।
पैलियेटिव केयर यानी ऐसे मरीजों को आराम देने वाली चिकित्सा, जिनका इलाज संभव नहीं होता। निश्चित
पैलियेटिव केयर यानी ऐसे मरीजों को आराम देने वाली चिकित्सा, जिनका इलाज संभव नहीं होता। निश्चित निःशब्द हूं..!😥
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