Ehyai Graphics Mubarakpur
29/01/2026
UGC Act 2026 का पूरा मसौदा सामने है। इसलिए “कौवा कान ले गया” जैसी अफ़वाहों में पड़ने के बजाय हर व्यक्ति को चाहिए कि खुद पढ़कर समझे और फिर तय करे कि समर्थन करना है या विरोध।
मैंने यह एक्ट ध्यान से पढ़ा है। इसमें साफ लिखा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव अपराध माना जाएगा।
इसके अलावा मुझे इसमें कुछ ऐसा नहीं दिखा जो समाज को नुकसान पहुँचाए।
अगर किसी को इसमें कोई और आपत्तिजनक गाइडलाइन दिखती है, तो कृपया तथ्य के साथ बताएं।
एक्ट का मुख्य उद्देश्य (बिंदु-2 के अनुसार) बिल्कुल स्पष्ट है —
SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांगजनों सहित सभी वर्गों के खिलाफ भेदभाव खत्म करना और विश्वविद्यालयों में समानता व समावेशन को बढ़ावा देना।
मेरी नज़र में जो भी इंसाफ और बराबरी में विश्वास रखता है, वह यही चाहेगा कि कम से कम शिक्षा संस्थानों में तो जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म हो।
हाँ, एक बात ज़रूरी है —
इस कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।
जैसे दहेज एक्ट, SC/ST एक्ट या तीन तलाक कानूनों में गलत इस्तेमाल की शिकायतें आती रही हैं, वैसे ही इस एक्ट में भी सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए।
बाकी हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है।
मैं व्यक्तिगत रूप से UGC Act का समर्थन करता हूँ, क्योंकि यह समानता और भाईचारे की बात करता है।
अजीब बात यह है कि जो लोग “हम सब एक हैं” और “हिंदुत्व” की बात करते हैं, वही बराबरी की बात आते ही असहज हो जाते हैं।
जब समानता की बात हो रही है, तो क्या SC, ST, OBC हिंदू नहीं हैं?
अगर किसी वर्ग को लगता है कि यह एक्ट समाज के खिलाफ है, तो कृपया पूरा एक्ट पढ़कर साफ बताएं — किस बिंदु के आधार पर?
भावनाओं से नहीं, तथ्यों से बात होनी चाहिए। 🙏
Mukesh morya
26/01/2026
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اہل مدارس کو راحت
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