Adv. Rahul Tiwari
पेट्रोल पम्प पर भीड़ याद दिलाती है कि..ब्रिटेन मे विश्व युद्ध के समय, चर्चिल ने कहा, अंडे मत खरीदो, सैनिकों के लिए हैं कम पड रहे है
अगले दिन दुकानों के आगे लोगों की भीड़ थी,
अंडे खरीदने के लिए नहीं, अंडे वापस करने के लिए।
ओर भारत मे देखो खाड़ी देशो में युद्ध है,
LPG और पेट्रोल की कमी हो सकती है यह देखकर लोगों ने गैस एजेंसी के सामने लाइन लगा दी पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा दी।
ब्रिटेन और भारत पर ये उदाहरण
ब्रिटेन के राज करने की और भारत के गुलाम होने की मानसिकता को भी दर्शाता है।
क्यों कि हम देश की समस्या को अपनी समस्या नहीं मानते।
05/01/2026
जब कोई गतिविधि आजीविका से जुड़ जाती है, तो उसमें बाध्यता आ जाती है। और लगातार एक ही काम को 'करना ही है' की स्थिति में करना, मनुष्य के लिए थकाने वाला होता है। मनोविज्ञान इसे साफ तौर पर मानता है। Autonomy यानी अपनी मर्जी से चुनने की आज़ादी खत्म होते ही आनंद में गिरावट आती है। इस अर्थ में निरंतर मजबूरी दुख पैदा करती है।
कॉरपोरेट संस्कृति ने Find a job you love जैसा नारा बहुत सरल तरीके से बेच दिया। असल शोध कहता है कि Extrinsic motivation यानी पैसा, स्टेटस, डर या सुरक्षा जब मुख्य कारण बन जाते हैं, तो intrinsic joy धीरे-धीरे खत्म होता है। इसे ही Extrinsic Motivation Trap कहते हैं। यह Deci और Ryan जैसे मनोवैज्ञानिकों के Self-Determination Theory में साफ दिखता है।
लेकिन यहीं एक ज़रूरी फर्क है।
यह कहना कि कोई भी काम कभी सुख नहीं दे सकता थोड़ा ज़्यादा सामान्यीकरण हो जाता है। काम अपने आप में न सुख है, न दुख। दुख पैदा होता है तीन स्थितियों में:
1. जब काम पूरी तरह मजबूरी हो
2. जब उसमें नियंत्रण और अर्थ का अभाव हो
3. जब उससे पहचान और मूल्य पूरी तरह चूस लिए जाएं
अगर कोई व्यक्ति किसी काम को सीमित समय के लिए, कुछ हद तक स्वायत्तता के साथ करता है और उससे अपनी पूरी पहचान नहीं जोड़ता तो वही काम बोरियत नहीं, स्थिरता या संतोष दे सकता है। यह सुख उत्सव जैसा नहीं होता, लेकिन यह लगातार पीड़ा भी नहीं होता।
दुनिया इतनी बदशक्ल और मुरझाई हुई इसलिए है क्योंकि लोग मजबूरी में काम कर रहे हैं। ज़्यादातर लोग काम नहीं कर रहे, वे अपना समय बेच रहे हैं और जब जीवन का बड़ा हिस्सा ऐसे ही बीतता है, तो समाज थका हुआ, चिड़चिड़ा और बेरंग दिखता है। इसमें शक नहीं।
दुनिया इसलिए बदशक्ल नहीं है कि लोग काम करते हैं, बल्कि इसलिए है कि काम जीवन पर हावी हो गया है, काम से बाहर के अर्थ, खेल, आलस्य, संवाद और मौन खत्म हो गए हैं और व्यक्ति को सिर्फ उत्पादक इकाई बना दिया गया है।
#कामऔरजीवन #जीवनकामसेबड़ा
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the public figure
Website
Address
Anand Bagh
Ayodhya
224123