Gst & Income Tax Solutions
17/04/2026
*Sandeep Builders vs Commissioner of Central GST** के नवीनतम अदालती फैसले (CESTAT New Delhi, 16 अप्रैल 2026)
# # **GST अलर्ट: अपनी गलती से ज्यादा टैक्स भर दिया? बिना 'अपील' किए रिफंड मांगना पड़ सकता है भारी!**
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⭐ **आज की बात**
नमस्ते दोस्त!
व्यापार में अक्सर ऐसा होता है कि हम अनजाने में या गलत गणना के कारण सरकार को ज्यादा टैक्स जमा कर देते हैं। बाद में जब हमें अपनी गलती का एहसास होता है, तो हम तुरंत 'रिफंड' (Refund) के लिए आवेदन कर देते हैं।
लेकिन रुकिए! क्या आप जानते हैं कि अगर आपने अपने 'सेल्फ-असेसमेंट' (Self-Assessment) यानी खुद दाखिल किए गए रिटर्न को कानूनी रूप से चुनौती नहीं दी है, तो विभाग आपका रिफंड सीधे खारिज कर सकता है?
हाल ही में **Sandeep Builders vs Commissioner of Central GST (Jodhpur)** के मामले में दिल्ली ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए एक बहुत कड़ा संदेश दिया है।
आइए समझते हैं कि संदीप बिल्डर्स से कहाँ चूक हुई।
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⭐ **केस की हकीकत: असेसमेंट को चुनौती न देना पड़ा महंगा**
संदीप बिल्डर्स ने सेवा कर (Service Tax) का भुगतान किया था और बाद में दावा किया कि उन्होंने गलती से अधिक टैक्स भर दिया है, इसलिए उन्हें रिफंड मिलना चाहिए। विभाग ने उनका रिफंड क्लेम खारिज कर दिया।
जब मामला कोर्ट पहुँचा, तो मुख्य मुद्दा यह था:
**क्या कोई करदाता अपने द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न (Self-Assessment) को संशोधित या चुनौती दिए बिना सीधे रिफंड मांग सकता है?**
❌ **बड़ी चूक:** करदाता ने अपने उस असेसमेंट या रिटर्न को कभी 'Appeals' में चुनौती नहीं दी जिसके तहत टैक्स भरा गया था।
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⭐ **कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट के 'ITC Ltd' केस का असर**
माननीय ट्रिब्यूनल ने साफ शब्दों में कहा:
✅ **असेसमेंट जरूरी है:** जब तक आपका पुराना असेसमेंट (जो आपने खुद फाइल किया है) बदला नहीं जाता, तब तक रिफंड अधिकारी उसे संशोधित नहीं कर सकता।
✅ **रिफंड बनाम अपील:** रिफंड की कार्यवाही 'एक्जीक्यूशन' (Ex*****on) की तरह होती है। आप मूल फैसले (रिटर्न) को बदले बिना पैसा वापस नहीं मांग सकते।
✅ **कानूनी सिद्धांत:** सुप्रीम कोर्ट ने 'ITC Ltd' केस में पहले ही तय कर दिया है कि बिना असेसमेंट को चुनौती दिए रिफंड का दावा मान्य नहीं होगा।
**नतीजा:** संदीप बिल्डर्स की अपील खारिज कर दी गई क्योंकि उन्होंने अपने टैक्स पेमेंट के आधार (Assessment) को कानूनी रूप से चुनौती नहीं दी थी।
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⭐ **VK Associates की विशेष सलाह: रिफंड क्लेम करने से पहले ये स्टेप्स फॉलो करें**
1️⃣ **रिटर्न की जांच करें:** अगर आपको लगता है कि टैक्स ज्यादा भर दिया गया है, तो सिर्फ रिफंड फॉर्म न भरें। पहले यह देखें कि क्या उस असेसमेंट को चुनौती देने की जरूरत है।
2️⃣ **समय पर अपील:** यदि विभाग ने आपका असेसमेंट किया है या आपने खुद गलत रिटर्न भरा है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर उचित अथॉरिटी के पास चुनौती दें।
3️⃣ **प्रोफेशनल राय लें:** रिफंड के मामले तकनीकी रूप से पेचीदा होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा नियमों के अनुसार, छोटी सी प्रक्रियात्मक चूक भी आपके लाखों रुपये डुबो सकती है।
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⭐ **चलते चलते**
दोस्त, टैक्स के नियमों में 'प्रक्रिया' (Procedure) उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि 'तथ्य' (Facts)। अगर आप सही हैं लेकिन आपने सही रास्ता नहीं चुना, तो कानून आपकी मदद नहीं कर पाएगा।
अपनी टैक्स फाइलिंग और रिफंड की प्रक्रिया को आज ही चेक करवाएं।
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⭐ **आपकी बात**
क्या आपने भी कभी गलती से ज्यादा टैक्स जमा किया है? क्या आपका रिफंड इसलिए अटका है क्योंकि आपने अपने असेसमेंट को चुनौती नहीं दी थी?
अपनी कानूनी समस्याओं के सही समाधान के लिए नीचे **Comment** करें या हमसे संपर्क करें।
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Advocate VK Maurya
VK Associates
(GST & Income Tax Consultant)
Baskhari, Ambedkar Nagar,
Uttar Pradesh
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31/03/2026
नए Income-tax Rules, 2026 के आधार पर पैन कार्ड (PAN) से जुड़ी पूरी जानकारी बिन्दुवार (Point-wise) नीचे दी गई है:
1. मुख्य नियम और लागू होने की तिथि
* नियम का नाम: इन नियमों को 'आयकर नियम, 2026' (Income-tax Rules, 2026) कहा जाएगा।
* प्रभावी तिथि: ये नियम 1 अप्रैल, 2026 से पूरे भारत में लागू होंगे।
2. पैन कार्ड के लिए नए फॉर्म्स (PAN Application Forms)
नए नियमों के तहत आवेदन करने के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए गए हैं:
* फॉर्म संख्या 93: भारतीय नागरिकों (Individuals) द्वारा पैन आवंटन के लिए।
* फॉर्म संख्या 94: भारतीय कंपनियों या भारत में गठित संस्थाओं के लिए।
* फॉर्म संख्या 95: उन व्यक्तियों के लिए जो भारत के नागरिक नहीं हैं (Foreign Citizens)।
* फॉर्म संख्या 96: विदेशी कंपनियों या भारत के बाहर बनी संस्थाओं के लिए।
3. आधार-पैन लिंकिंग और जुर्माना (Late Fee)
* आधार की सूचना: धारा 262(6)(a) के तहत हर पैन धारक को अपना आधार नंबर लिंक करना अनिवार्य है।
* देर से सूचना देने पर शुल्क: यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय सीमा (30 जून 2023) के बाद आधार की जानकारी देता है, तो उसे ₹1,000 का शुल्क देना होगा।
4. वे लेन-देन जहाँ पैन देना अनिवार्य है (नियम 159)
नियम 159 के अनुसार, निम्नलिखित कार्यों के लिए पैन कार्ड देना या फॉर्म 97 भरना जरूरी है:
* बैंक खाता: बेसिक सेविंग अकाउंट के अलावा कोई भी नया बैंक खाता खोलने या क्रेडिट कार्ड आवेदन के लिए।
* नकद जमा/निकासी: किसी बैंक या पोस्ट ऑफिस में एक साल में ₹10 लाख से अधिक नकद जमा या निकासी पर।
* अचल संपत्ति: ₹20 लाख से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति (जमीन/मकान) की खरीद या बिक्री पर।
* वाहन: ₹5 लाख से अधिक मूल्य के मोटर वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) की खरीद-बिक्री पर।
* म्यूचुअल फंड/बॉन्ड्स: ₹50,000 से अधिक की राशि निवेश करने पर।
* फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): एक बार में ₹50,000 से ज्यादा या साल भर में ₹5 लाख से ज्यादा की FD कराने पर।
* होटल/विदेश यात्रा: होटल बिल या विदेश यात्रा के लिए एक बार में ₹1 लाख से अधिक का नकद भुगतान करने पर।
* वस्तुएं एवं सेवाएं: किसी भी सामान या सेवा के लिए ₹2 लाख से अधिक के लेन-देन पर।
5. विशेष प्रावधान
* नाबालिग (Minor) के मामले में: यदि किसी नाबालिग का अपना कोई कर योग्य आय नहीं है, तो वह अपने माता या पिता का पैन कोड कर सकता है।
* फॉर्म 97 (घोषणा): जिन लोगों के पास पैन नहीं है, उन्हें ऊपर बताए गए लेन-देन के लिए फॉर्म 97 में डिक्लेरेशन देना होगा।
* पता सत्यापन: पैन डेटाबेस में दिया गया पता ही आधिकारिक संचार के लिए मान्य होगा (नियम 232)।
6. एडवोकेट और टैक्स कंसल्टेंट के लिए विशेष
* ऑडिट रिपोर्ट: नियम 47 के तहत ऑडिट रिपोर्ट (फॉर्म 26) में अब पैन और जीएसटी विवरणों का मिलान अधिक कड़ाई से किया जाएगा।
* डिजिटल प्रक्रिया: पैन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं अब पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस (Faceless) मोड में संचालित होंगी।
👉:
एडवोकेट वी.के. मौर्य
वी.के. एसोसिएट्स (VK Associates)
जीएसटी एवं आयकर सलाहकार
31/03/2026
⭐ कहानी एक टैक्सपेयर की: "क्या गलत अधिकारी से ली गई मंजूरी (Sanction) पूरे इनकम टैक्स नोटिस को अवैध बना सकती है?"
नमस्कार दोस्तों,
इनकम टैक्स विभाग जब पुराने सालों के केस दोबारा खोलता है (Reassessment), तो उसे सेक्शन 148 के तहत नोटिस भेजने से पहले अपने उच्च अधिकारियों से लिखित मंजूरी (Approval) लेनी पड़ती है।
लेकिन क्या होगा अगर विभाग 3 साल से पुराने केस के लिए 'कमिश्नर' से मंजूरी ले ले, जबकि कानूनन यह मंजूरी 'चीफ कमिश्नर' से लेनी अनिवार्य हो?
हाल ही में ITAT पुणे का एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला (सचिन मोहनलाल चोर्डिया बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर, पुणे, दिनांक: 30 मार्च 2026) सामने आया है।
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी जीत है जिन्हें पुराने सालों (जैसे 2016-17 और 2017-18) के री-असेसमेंट नोटिस मिले हैं!
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🚨 मामला क्या था? (The Case)
पुणे के एक टैक्सपेयर श्री सचिन मोहनलाल को असेसमेंट ईयर 2016-17 और 2017-18 के लिए सेक्शन 148 के तहत नोटिस जारी किए गए।
ये नोटिस जुलाई 2022 में जारी किए गए थे, यानी संबंधित असेसमेंट ईयर के खत्म होने से 3 साल से भी ज्यादा समय बीत चुका था।
इनकम टैक्स के नए नियमों (Section 151) के मुताबिक, अगर नोटिस 3 साल के बाद भेजा जा रहा है, तो मंजूरी 'प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर' (Pr. CCIT) या 'चीफ कमिश्नर' (CCIT) स्तर के अधिकारी से मिलनी चाहिए।
लेकिन इस केस में विभाग ने मंजूरी केवल 'प्रिंसिपल कमिश्नर' (Pr. CIT) से ली थी।
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⚖️ ITAT का ऐतिहासिक फैसला: टैक्सपेयर की बड़ी जीत (The Relief)
ITAT पुणे ने विभाग की इस बड़ी गलती को पकड़ लिया और टैक्सपेयर के हक में फैसला सुनाते हुए ये अहम बातें कहीं:
1. मंजूरी की अथॉरिटी का नियम (Section 151):
अदालत ने स्पष्ट किया कि 3 साल बीत जाने के बाद केवल 'चीफ कमिश्नर' या समकक्ष अधिकारी ही मंजूरी देने के लिए अधिकृत हैं।
निचले स्तर के अधिकारी (Pr. CIT) द्वारा दी गई मंजूरी कानून की नजर में शून्य (Bad in Law) है।
2. पूरा नोटिस और असेसमेंट रद्द:
चूंकि नोटिस की बुनियाद (मंजूरी) ही गलत थी, इसलिए अदालत ने सेक्शन 148 के उन सभी नोटिस और उनके आधार पर किए गए टैक्स असेसमेंट ऑर्डर्स को तुरंत प्रभाव से रद्द (Quash) कर दिया।
3. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन:
अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के 'राजीव बंसल' केस के सिद्धांतों का पालन करते हुए यह साफ किया कि विभाग अपनी मर्जी से कानून के इन 'प्रोटोकॉल' को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
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"तीन साल बीते पुराने, अब चीफ कमिश्नर का है राज,
कमिश्नर की मंजूरी पर, गिरा अदालत का गाज।
बिना सही सैंक्शन के, नोटिस हुआ बेकार,
जीत गया वो टैक्सपेयर, जिसने की नियमों की पुकार!"
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⭐ मेरी सलाह (Expert Advice)
1. नोटिस की बारीकियों को जांचें:
जब भी आपको सेक्शन 148 का नोटिस मिले, तो सबसे पहले यह देखें कि उस पर डिजिटल सिग्नेचर किस अधिकारी के हैं और उसकी मंजूरी (Sanction) किस स्तर के अधिकारी ने दी है।
2. कानूनी अधिकारों का प्रयोग करें:
अक्सर विभाग तकनीकी प्रक्रियाओं में गलती कर देता है। ऐसी स्थिति में सही कानूनी दलीलें आपको लाखों रुपये की बेबुनियाद टैक्स डिमांड से बचा सकती हैं।
क्या आपको भी पुराने सालों (AY 2016-17 या 17-18) का इनकम टैक्स नोटिस मिला है?
घबराएं नहीं, अपनी फाइल की सही जांच कराएं और अपने हक के लिए लड़ें! ⚖️
✍️
Advocate VK Maurya
Vk Associates
GST Income Tax Consultant
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