Ragee Foundation
22/03/2023
*हमारा नव वर्ष*
---( चैत्र शुक्ल प्रतिपदा )---
"विक्रम सम्वत्सर २०८०, कलियुगाब्द ५१२४, शक १९४५"
१- इस वर्ष का नाम पिङ्गल है। राजा बुध है और मंत्री शुक्र है।
२- प्रातः काल स्नान करके नया वस्त्र या धुला वस्त्र धारण करें।
३-मङ्गल तिलक माथे पर लगायें। दूसरों को भी लगायें।
हो सके तो सूर्यार्घ्य दें। देवीदर्शन करें। जहाँ जायें नव वर्ष की मङ्गल कामनायें दें।
४- गृह ध्वज और देवध्वज को नया करें।
५- वर्षपति का पूजन व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से करें।
( सामूहिक करने का लाभ ज्यादा होता है। )
६- गृहद्वार को सजायें। अल्पना, माडरे, रंगोली बनायें, प्रतियोगिता करें/करायें।
७- नवान्न भोजन, सुपेय वितरण करें। सायं के कार्यक्रम को मधुयामिनी या मधु मङ्गल कहते हैं। चैत्र गीतों की प्रतियोगिता करायें।
८- निम्ब की सुकोमल पत्तियों का भक्षण करें। इससे वर्ष पर्यन्त त्वचा रोग नहीं होगा।
९- पंच पदार्थ का सम मात्रा में भक्षण करें। *काली मिर्च
* काला नमक * हींग * जीरा *अजमोद(अजवायन) को सम मात्रा में कूट कर लें।
१०- फूहड़ गीतों, शराब और मादक पदार्थों से दूर रहें।
सुरभित शीतल मन्दमलय हो, नववर्ष शुभ मङ्गलमय हो 🌼🌼
हमारा नव वर्ष नवरात्रि का प्रथम दिन होने से शक्ति साधना का प्रथम दिन भी होता है पर इसे नववर्ष के महोत्सव में बदल देना हमारा सांस्कृतिक दायित्व भी है। नव वर्ष मङ्गलमय हो।
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