Prerna
What gives us peace ?
Mushkil
Happy Mother’s Day. मेरी आने वाली नयी किताब से माँ को समर्पित यह कविता ।
माँ
तुम ममता की मूर्ति हो
तुझ सा न कोई है
न कोई हो सकता है ।
तेरे शब्दों में इतनी ताक़त है
जो तरसते हुए मन को
रूह की गहराइयों तक
ग़ज़ब सा सुकून दे जाती है ।
तेरे आँचल तले आ कर
यूँ लगता है मुझे
कि ज़िन्दगी की तपिश से गुज़रते हुए भी
मैं एक बरगद की छाँव में हूँ ।
तू सामने होती है तो
ज़िन्दगी की तमाम तकलीफ़ें भी
ऐसा लगता है मुझे
कोई तकलीफ़ नहीं दे सकती ।
जमाने से लड़ते हुए भी
सब एहसासों से गुज़रते हुए भी
तेरे पास आने पर
सब दुःख दर्द भूल जाता हूँ ।
जितने भी चाहे दोस्त हों मेरे
पर तुझ से बड़ा कोई दोस्त नहीं
जिस से दिल की हर बात
मैं खुल के कर पाता हूँ ।
तेरे हौंसले से आज भी
चाहे जितना भी टूटा हूँ
जितना भी बिखरा हूँ
फिर से जुड़ जाता हूँ ।
दुनिया चाहे जैसा भी समझे
जैसे चाहे आलंकृत करे
तेरे लिए तो आज भी
वो छोटा सा बच्चा हूँ
जो तेरी गोद में
आ कर छुप जाता था
तेरी बाहों के घेरे में
अजब सा सुकून पाता था ।
तेरा क़र्ज़ चुका नहीं सकता
तुझ से वादा भूला नहीं सकता
सब कुछ भूल जाऊँ चाहे मैं
तुझ को कभी भूला नहीं सकता ।
मेरी माँ ।।
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