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04/05/2025
विराट कोहली ने जब धोनी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया तो खुद अनुष्का शर्मा भी दंग रह गई कि आखिर कोई उनके पति से भी महान है। बेंगलुरु और चेन्नई के बीच में जब मुकाबला समाप्त हुआ है तब कोहली का एक अलग ही रूप देखने को मिला। उन्होंने कोई सेलिब्रेशन नहीं किया। वह चुपचाप जाकर धोनी के पास चले गए और उसके बाद वह उनसे कुछ बातचीत करते नजर आए। जिसे देखकर अनुष्का शर्मा और धोनी की बीवी साक्षी की आंखें भी नम हो गई।
03/05/2025
साहस की दौड़ में हाथों की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के 20 वर्षीय शिवम कुमार दोनों हाथों के बिना पैदा हुए थे, फिर भी उनका हौसला अजेय है। सभी बाधाओं को पार करते हुए, इस असाधारण युवा एथलीट ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल करके इतिहास रच दिया। उनकी यात्रा केवल शारीरिक सहनशक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि यह अडिग मानसिक शक्ति, अथक प्रयास और वैश्विक मंच पर भारत को गौरवान्वित करने के सपने को दर्शाती है। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले शिवम के पास आधुनिक सुविधाओं या पेशेवर प्रशिक्षण तक पहुंच नहीं थी। लेकिन अटूट समर्पण और लगातार कड़ी मेहनत के साथ, उन्होंने खुद को प्रतिस्पर्धा करने और सफल होने के लिए प्रशिक्षित किया। उनका अगला लक्ष्य? पैरालिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और एक दिन ओलंपिक में गर्व से भारतीय ध्वज फहराना। वह केवल एक पैरा-एथलीट नहीं है, वह हर उस युवा के लिए आशा का एक जीवंत प्रतीक है जो मानता है कि सच्ची सीमाएँ केवल मन में होती हैं। शिवम कुमार वास्तव में #भारत का गौरव हैं।
03/05/2025
जम्मू-कश्मीर की डॉ. ौधरी ने UPSC CSE 2024 में देशभर में 40वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। डॉ. इरम चौधरी का ताल्लुक जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से है, जहां संसाधनों की कमी और चुनौतियां आम हैं। ऐसे माहौल से निकलकर सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करना आसान नहीं होता, लेकिन इरम ने न तो मुश्किलों को अपने रास्ते का रोड़ा बनने दिया, न ही हालातों का रोना रोया। उन्होंने सिर्फ अपने लक्ष्य को सामने रखा और उसकी ओर बढ़ती चली गईं।
डॉ. इरम की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग क्लास के यह मुकाम हासिल किया। खुद पर भरोसा, नियमित पढ़ाई और पिछले प्रयासों से सीख। उन्होंने अपनी तैयारी को व्यवस्थित किया, कमजोरियों पर काम किया और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ीं।
2018 में MBBS की डिग्री हासिल करने के बाद इरम ने तय किया कि वह सिविल सेवा के जरिए देश की सेवा करेंगी। यह निर्णय उनके लिए केवल एक करियर विकल्प नहीं था, बल्कि एक जुनून था। लेकिन UPSC का सफर इतना आसान नहीं था। पहले तीन प्रयासों में असफलता ने उनके दरवाजे पर दस्तक दी। फिर भी, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हर असफलता को उन्होंने एक सबक के रूप में लिया और अपनी कमियों को सुधारने में जुट गईं।
डॉ. इरम चौधरी की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मशाल है जो पहले प्रयास में असफल होने पर हताश हो जाते हैं। उनकी यात्रा सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। खासकर UPSC जैसे कठिन इम्तिहान की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इरम एक जीता-जागता उदाहरण हैं कि अगर मन में ठान लिया जाए, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।
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