Pramod Kumar
02/06/2025
✅ पूर्ण मंत्र है:
> ॐ अपवित्रः पवित्रो वा
सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं
स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' (यानि सबसे पहले पूजे जाने वाले) देवता क्यों माना जाता है — इसके पीछे एक सुंदर कथा और तात्पर्य है।
कथा:
एक बार देवताओं में यह निर्णय हुआ कि जो भी सम्पूर्ण ब्रह्मांड की सबसे तेज़ी से परिक्रमा करेगा, वही सबसे पहले पूजे जाने का अधिकारी बनेगा। कार्तिकेय जी तुरंत अपने वाहन मयूर पर बैठकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। गणेश जी का वाहन तो छोटा-सा मूषक (चूहा) था। लेकिन गणेश जी अत्यंत बुद्धिमान थे।
उन्होंने अपने माता-पिता, भगवान शिव और माता पार्वती, को ही ब्रह्मांड मानकर उनकी सात परिक्रमा कर ली और कहा — "मेरे लिए माता-पिता ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड हैं।"
देवताओं ने उनकी बुद्धिमत्ता और श्रद्धा से प्रसन्न होकर उन्हें 'प्रथम पूज्य' का स्थान दे दिया। तभी से हर शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ आदि में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है ताकि विघ्न (अड़चनें) दूर रहें और कार्य सफल हो।
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