Mohd Atha
facts
अनानास हमारे मुंह को कैसे खाता है
hamare munh Ko kaise khata hai
hamare sharir mein Loha paya jata hai
niche ke bhi jahrile hote Hain mohd athar
यह नज़्म आज से ५० साल पहले, हक़ीम सईद साहिब जो पाकिस्तान में हमदर्द Foundation के Founder थे ,कही थी। —
जहाँ तक काम चलता हो *ग़ज़ा* से,
वहाँ तक चाहिए बचना *दवा* से।
अगर *ख़ून* कम बने, *बलगम* ज़्यादा,
तो खायें *गाज़र, चने, शलगम* ज़्यादा।
*ज़िगर के बल* पे है इंसान जीता,
अगर ज़हफ़ जिगर है तो खा *पपीता*।
*ज़िगर* में हो अगर *गर्मी* का एहसास,
*मुरब्बा आंवला* खा या *अनन्नास*।
अगर होती है *माएदा* मे गरानी,
तो पी ले *सौंफ या अदरक* का पानी।
थकन से हों अगर *अज़लात ढीले* ,
तो फ़ौरन *दूध गर्मा गरम* पी ले।
जो दुखता हो *गला नज़ले* के मारे,
तो कर *नमकीन पानी के ग़रारे*।
अगर हो *दर्द से दांतों* के बे कुल,
तो ऊँगली से *मसूड़ो* पर *नमक* मल।
जो *ताक़त मे कमी* होती हो महसूस,
तो *मिश्री की डली मुल्तान* की चूस।
शिफा चाहिए अगर *खाँसी* से जल्दी,
तो पी ले *दूध में थोड़ी सी हल्दी*।
अगर *कानों* में तकलीफ़ होए,
तो *सरसों* का तेल फाये से निचोड़ें।
अगर *आँखों* में पड़ जाते हो *जाले*,
तो *दखनी मिर्च घी* के साथ खा ले।
*तपेदिक* से अगर चाहिए रिहाई,
बदल पानी का *गन्ना चूस* भाई।
*दमा* मे यह ग़ज़ा बेशक है अच्छी,
*खटाई* छोड़ खा दरिया की *मछली*।
अगर तुझ को लगे *जाड़े में सर्दी* ,
तो इस्तेमाल कर *अंडे की ज़र्दी*।
जो *बदहज़मी* में तू चाहे अफाका,
तो *दो एक वक्त* कर ले तू *फ़ाक़ा*।
प्लीज शेयर करें। शुक्रिया।
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