RubinA
R U OK?
Sometimes I ask myself.
And,
NO, comes as a reply,
…Sometimes.
But that doesn’t scare me,
Worry me, tear me.
Coz,
I need to worry
When I don’t ask myself
That question.
Or,
Keep saying
I’m fine,
Nothing’s wrong,
Life’s like that,
…To myself.
For,
Then I’m
Betraying myself
More than life and other people did.
I’ve been fooling myself
To not express my suffering
And seek any help.
Not raising a cry
No hand will try
To catch me
If I don’t ask.
So,
I just ask.
R U OK?
Now that I have.
Maybe not.
But, I know,
I will be.
©️RubinA
कुछ सच हैं जो मैं जानना नहीं चाहती,
सो मुझसे मत कहो।
मसलन
मैं कैसी दिखती हूँ जब मैं अपने बाल नहीं बनाती,
बिना कोई दिखावटों के
उन्हें रहने देती हूँ वैसे ही
जैसे कुदरत उन्हें कर रही है।
मैं जानती हूँ कि उस वक़्त
मैं कैसी लग रही होती हूँ।
सो मुझसे मत कहो,
मुझे अनदेखा भी मत करो
पर कैसी लगने लग गई हूँ
बस मत कहो।
मैं चाहती हूँ
के तब तुम
बिना किसी स्वार्थ के
मुझे पास बुलाओ
अपने क़रीब बिठाओ
प्रेम से मेरे बाल सुलझाओ
शायद थोड़ा प्यार मिलने से
वो फिर से लहराने लगें।
अगर नहीं भी लहराते तो
कम से कम उनकी जड़ो में
थोड़ी मज़बूती तो आयेगी ही
तुम कोशिश तो करो।
थक कर जब मैं चिल्लाती हूँ
मुझसे मेरा दिल दुखाने वाले शब्द मत कहो।
चिल्लाना बुरी आदत है
शिकायत करते रहना भी अच्छी बात नहीं
मैं सब जानती हूँ
कोई छोटी बच्ची नहीं
पर मुझसे मत कहो।
सच क्या है
मुझसे मत कहो।
उस वक़्त कुछ कर सकते हो तो
ज़रा मेरी पसंद का कोई साज़ बजाओ
मेरा हाथ बटाओ
बिना मेरे कहे
मुझसे कुछ बात करो
या मुझे बिठा कर बोलो
मुझसे कहो क्या करना है
मेरा काम बस तुम्हें खुश करना है,
मानो मत पर मुझसे ये कह भर दो,
मैं कह रही हूँ ना
थोड़ी कोशिश तो करो।
तुम्हें मुझमें अब कोई दिलचस्पी नहीं
मैं जानती हूँ
बर्ताव से तुम्हारे दिखता है
जिसे जी रहे हैं हम
वो एक समझौता है।
पर मुझसे ये सब कहो तो ना सही।
सच जानना किसे है
तुमसे तो ख़ास तौर पर नहीं।
तुमने झूठ पर ही तो मुझे रिझाया है,
हमेशा हमेशा रहेगा तुमसे प्यार
ऐसा बताया था
तो अब क्यों बदल रहे हो?
झूठ ही निभाते चलो
समझ रहे हो ना।
वैसे भी कोई साथ नहीं जाता किसी के।
जाना भी नहीं चाहिए।
जो यहाँ का था यहीं रहेगा
जो साथ जाये वो कमाना सीखना पड़ेगा।
संतोष कहते हैं उसे,
चलो सीखते हैं।
यही तो अब समझने की बात है
मैं भी समझूँ
तुम भी समझो।
कुछ तो करो
के बस यूँ ही
सच के तीर चलाते रहोगे?
थोड़ी सी उम्र है
ज़िंदगी बहुत ज़्यादा लंबी नहीं
थोड़ा सा रिझा लो ना
क्या जाता है तुम्हारा?
अब स्त्री को संगिनी बनाया है
तो उसके रंग भी तो रंगो ना
चलो, ना रंगो
रंगो पर तर्क ना करते हुए
उन्हें देख ही लो।
रंग कैसा दिखता है
वो मत कहो
क्योंकि
कुछ सच मैं जानना नहीं चाहती
सो मुझसे मत कहो।
©️RubinA
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