GOPAL DUBEY

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12/21/2024

*🔥सुविचार🔥*

☀️🌹🌹☀️✍️

*केवल चाहने मात्र से जीवन कभी भी सम्मानीय एवं अनुकरणीय नहीं बन जाता है। सहनशीलता का गुण ही किसी जीवन को सत्कार के योग्य बना देता है।*

*यदि जीवन में सहनशीलता होगी तो व्यक्ति घर-परिवार अथवा समाज में स्वतः ही सबका प्रिय बन जाता है। महान वो नहीं जिसके जीवन में सम्मान हो अपितु वो है, जिसके जीवन में सहनशीलता हो क्योंकि सहनशीलता ही तो साधु पुरुषों का आभूषण है।*

*सम्मान मिलना गलत भी नहीं लेकिन मन में सम्मान की चाह रखना अवश्य श्रेष्ठ पुरुषों के स्वभाव के विपरीत है।*

*कांटा निकलने के बाद जो मजा चलने में आता है वही मजा अहंकार निकलने के बाद जीवन जीने में आता है। बुद्धिमान कौन है जो सबसे कुछ सीख लेता है, शक्तिशाली कौन है, जिसका अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण है,*

*सम्मानित कौन है जो दूसरों का सम्मान करता है और धनवान कौन है जो अपने पास है, उससे ही प्रसन्न है। दिमाग तो सबके पास होता है, पर मनशक्ति बहुत कम लोगों के पास होती है, रक्त समूह तो बहुतों का पॉजिटिव होता है, पर विचार नेगेटिव होते हैं*

*इसलिए किसी पर हँसने से बेहतर है कि, सब के साथ हँसें, अंतर्मन भी अच्छा रहेगा और सेहत भी। शब्दों में धार नहीं बल्कि आधार होना चाहिए, क्योंकि जिन शब्दों में धार होती है, वो मन को काटते हैं, जिन शब्दों में आधार होता है, वो मन को जीत लेते हैं।*

*हाँ और ना दो सबसे छोटे उत्तर हैं जिन पर लंबे समय तक सोचने की ज़रूरत है। जीवन में हम जो भी चीज़ें चूक जाते हैं, उसका कारण या तो बहुत जल्दी ना कहना या बहुत देर से हाँ कहना होता है।*

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*🚩 गोपाल दुबे देव भूमि देवापुर 🚩*

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