BETI Raksha MANCH
एक बात समझ में नहीं आती है-
राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री,चीफ जस्टिस से लेकर पक्ष-विपक्ष सभी सहमत हैं कि बर्बर रेप के मामले में तुरंत न्याय हो। अपराधी को कठोरतम सजा मिले
सीबीआई-पुलिस से लेकर सभी जांच एजेंसी इससे सहमत हैं कि आरोपी दोषी है,तमाम प्रमाणिक-पुख्ता सबूत जुटा लिये गये हैं
मीडिया-सोशल मीडिया सहित सभी इस बात के समर्थन में हैं कि रेप जैसे अपराध को रोकने में त्वरित न्याय बिल्कुल जरूरी है
जब सभी स्तंभ पूरी तरह एक मत हैं। जांच एजेंसी अपना काम कर चुकी है। केस ब्लैक एंड ह्वाइट है। तो कौन सी ताकत पूरी जांच-न्यायिक प्रक्रिया को जल्द से जल्द कुछ दिनों में ही पूरा करने से रोकती है? क्यों नहीं यह महज एक-दो हफ्ते में हो सकता है?
कृपया सभी बुद्धिजीवी अपना तर्क दे..!
बेटी रक्षा मंच
BETI Raksha MANCH
24/09/2023
'बांझन को पुत्र देत'... पुत्री क्यों नहीं??
तो ऐसा है की "आत्मा वै जायते पुत्रः" पुत्र रूप में पिता ही तो प्रकट होते है। परन्तु रुकिये!!!! पुत्र शब्द सन्तान वाचक है, ना कि केवल नर सन्तान वाचक, अतः लड़का अथवा लड़की दोनों ही पुत्र है और दोनों समान है। दोनों ही "पुं" नामक नरक से तारने वाले हैं। "यथैवात्मा तथा पुत्रः पुत्रेण दुहिता समा" अतः "बेटा बेटी एक समान" कोई आधुनिक नारा नहीं हमारी सनातन अवधारणा है। भारत में म्लेच्छो के आने से आये सामाजिक विचलन के कारण पुत्र-पुत्री में भेद विकृति का प्रसार हुआ। तो कहीं कहीं अनर्गल स्थितियाँ सम्मुख हुई, अन्यथा कन्या पूजन - कन्या पर हाथ ना उठाना - कन्या से अपने पैर ना छुवाना आदि द्वारा पुत्री को पुत्र पर वरीयता ही अधिक मिली है भारत में।
Click here to claim your Sponsored Listing.