GK Library
04/03/2026
Happy Holi
होली (पर्व)
* होली भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है
* होली हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है
* होली को खुशियों का त्योहार माना जाता है क्योंकि इस दिन दुश्मन भी गले मिल जाते हैं
* होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है
* होली को दुनिया भर के करोड़ों लोग धूमधाम से मनाते हैं
* हिंदू पंचांग के अनुसार होली फागुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है
* होली के फगुआ धुलेंडी दोल आदि नामों से जाना जाता है
* होली का त्योहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है
* वसंत पंचमी से ही गुलाल उड़ने और फागुन गीत प्रारंभ हो जाते हैं
* होली मनाने की प्रथा का उल्लेख करीब ईसा से 300 वर्ष पूर्व का है
* होली का त्यौहार लगभग सभी धर्मों द्वारा मनाया जाता है
* शाहजहां के जमाने में होली को ईद ए गुलाबी या आब ए पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था
* होली दो दिन का पर्व है पहले दिन होलिका दहन और दूसरे दिन रंग खेला जाता है
* होली को फागुन माह में मनाया जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं
* होली को कवियों और साहित्यकारों ने मस्ती का त्यौहार कहा है
* सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपनी ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होली उत्सव का वर्णन किया है
* बादशाह अकबर की जोधाबाई के साथ और जहांगीर नूरजहां के साथ होली खेलते थे
* कुछ लोगों का कहना है कि भगवान श्री कृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध इसी दिन किया था
* ब्रज में होली की बहुत मान्यता है
* ऐसा माना जाता है कि होली में रंग लगाकर नाच गाकर लोगों को शिव के गुणों का वेश धारण होता है
* होली का पर्व भारत के अलावा अन्य प्रवासी भारतीय देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है
* भारत में ब्रज मथुरा वृंदावन और बरसाने की लठमार होली व श्रीनाथजी काशी की होली बहुत प्रसिद्ध है
* भारत के कई हिस्सों में आज भी खेले कोने वाली होली 5 दिन तक मनाई जाती है
* संभवत होली ही एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो भारत के सभी राज्यों में मनाया जाता है
* होली के दिन ही महर्षि मनु का जन्म हुआ था
* होली का त्योहार उत्तर अमेरिका और यूरोप में भी हर साल धूमधाम से मनाया जाता है
* वैदिक काल में होली के पलों को न्वान्नेष्ठ यज्ञ कहा जाता था
* होली के पीछे हिरणाकश्यप नामक कहानी मानी जाती है जिसमें होलिका जल जाती है और प्रहलाद बच जाते हैं
* महाभारत काल में युधिष्ठिर ने होली का महत्व बताते हुए कहा था कि इस दिन जनता को भयरहित क्रीडा करनी चाहिए
* होली का प्रसिद्ध कहावत है बुरा न मानो होली है
* मध्य प्रदेश के भील आदिवासी होली के बहाने जीवन साथी चुनते हैं जबकी मालवा क्षेत्र में अंगारे फेंक होली खेलते हैं
* राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के आदिवासी पत्थर फेंक खूनी होली खेलते हैं
* यूपी के हमीरपुर के कुंडरा गांव में सिर्फ महिलाएं होली खेलती है
* राजस्थान के पुष्कर में कपड़ा फाड़ होली का चलन है
* यूपी के शाहजहांपुर में जूता मारकर होली खेली जाती है
* दिल्ली की होली में सुर और संगीत की धुम रहती है
16/02/2026
टेस्टोस्टेरोन
* टेस्टोस्टेरोन एक महत्वपूर्ण एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड हार्मोन है
* यह मुख्य रूप से पुरुषों के अंडकोष और महिलाओं के अंडाशय में बनता है, और कुछ मात्रा में अधिवृक्क ग्रंथियों से भी बनता है।
* यह पुरुष प्रजनन ऊतकों के विकास, मांसपेशियों/हड्डियों के घनत्व में वृद्धि, बालों के विकास को बढ़ावा देने, कामेच्छा को नियंत्रित करने और मनोदशा में सुधार के लिए आवश्यक है।
* टेस्टोस्टेरोन थेरेपी (टीआरटी) ऊर्जा और यौन क्रिया में सुधार करके इसकी कमी का उपचार करती है, लेकिन इससे मुँहासे, स्लीप एपनिया या प्रोस्टेट ग्रंथि के जोखिम में वृद्धि जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
* प्रमुख पुरुष यौन हार्मोन होने के नाते, यह यौवनारंभ के दौरान विकास (आवाज का गहरा होना, चेहरे पर बाल आना, मांसपेशियों का बढ़ना) को बढ़ावा देता है और शुक्राणु उत्पादन के लिए आवश्यक है।
* यह संज्ञानात्मक कार्य और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में भी भूमिका निभाता है।
* उच्च स्तर के टेस्टोस्टेरोन से मांसपेशियों का विकास, हड्डियों का घनत्व, बालों का बढ़ना और कामेच्छा में वृद्धि होती है।
* टेस्टोस्टेरोन का निम्न स्तर (हाइपोगोनाडिज्म) थकान, अवसाद, कामेच्छा में कमी और स्तंभन दोष का कारण बन सकता है।
* महिलाएं अंडाशय और अधिवृक्क ग्रंथियों में टेस्टोस्टेरोन का काफी कम, लेकिन आवश्यक स्तर उत्पन्न करती हैं, जो समग्र स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती और यौन इच्छा के लिए महत्वपूर्ण है।
* पर्याप्त टेस्टोस्टेरोन बेहतर मांसपेशी निर्माण, मजबूत हड्डियों, बेहतर मनोदशा और उच्च ऊर्जा स्तर से जुड़ा हुआ है।
* चिकित्सकीय रूप से कम टेस्टोस्टेरोन स्तर (आमतौर पर 100°C से नीचे 300 ng/dL) के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली यह थेरेपी ऊर्जा, मनोदशा और यौन क्रिया में सुधार कर सकती है।
* सिंथेटिक टेस्टोस्टेरोन के संभावित दुष्प्रभावों में मुंहासे, स्लीप एपनिया, लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि, प्रोस्टेट ग्रंथि का संभावित विकास और बांझपन शामिल हैं।
* उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से घटता है, अक्सर 40 से 70 वर्ष की आयु के बीच तक।
* आमतौर पर सुबह के समय किए जाने वाले रक्त परीक्षण से टेस्टोस्टेरोन के निम्न स्तर की पुष्टि होती है।
* इसके इलाज में जैल, इंजेक्शन या क्रीम शामिल हैं।
अस्वीकरण: टेस्टोस्टेरोन थेरेपी का उपयोग केवल स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।
28/01/2026
अजित पवार
* विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज 28 January 2026 को निधन हो गया
* अजीत पवार महाराष्ट्र के सत्ता में एक ऐसा नाम रहे है जिसने बीते एक दशक में राज्य की राजनीति को नया आकार दिया
* राजनीतिक माहौल उन्हें विरासत में मिला लेकिन पहचान उन्होंने अपनी दम पर बनाई
* राजनीति में आने से पहले वह लंबे समय तक सहकारिता आंदोलन से जुड़े रहे जो महाराष्ट्र के राजनीति की रीढ़ मानी जाती है
* अजीत पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ था
* वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार के भतीजे हैं
* साल 1991 में पहली बार अजित पवार बारामती से सांसद चुने गए उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा
* गौरतलब है की अजीत पवार 23 साल की उम्र में ही राजनीति में एंट्री ले ली थी इसी उम्र में वह कोऑपरेटिव सूगर फैक्ट्री के बोर्ड के सदस्य बन गए थे
* 1991 में वह पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष चुने गए और 16 साल तक इस पद पर बैठे रहे
* 1995 में वह बारामती विधानसभा सीट से चुनाव जीते फिर बारामती सेट को अपना अवैध किला बना लिया
* सात बार इसी सीट से चुनाव जीत कर राज्य की राजनीति में मजबूती स्थापित की और इसी इलाके में उनका प्लान भी क्रैश हुआ है
* अजीत पवार पहली बार 2010 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने थे इसके बाद वह अलग-अलग सरकारों में इस पद पर कई बार रहे
* उपमुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उनके पास वित्त, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे
* अपने चाचा शरद पवार को वह अपना राजनीतिक गुरु मानते थे यानी राजनीति की ट्रेनिंग उन्हें घर से ही मिली थी
* NCP में अजीत पवार अपने तेज और रणनीतिक फैसले के लिए जाने जाते हैं हालांकि वक्त के साथ अजीत पवार और शरद पवार के सोच में फर्क आने लगा
* चाचा का साथ छोड़ अजीत पवार अलग राह चुने हालांकि शुरुआत में काफी जोखिम भरा कदम लगा लेकिन अजीत पवार की प्रबंधन कला और नेताओं की पकड़ ने साथ दिया
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