aalam_khan1235
29/08/2025
छनाक.... आवाज सुन कर रमा जी भागी -भागी बाहर के कमरे में आई, जहाँ शीशे का गिलास कई भाग में टूटा पड़ा था। निगाहें कोने में गई, जहाँ पाखी आँखों में आँसू भरे थर -थर काँपती खड़ी थी। रमा जी समझ गई, आज फिर प्रसून और पाखी में झगड़ा हुआ।
"हड़बड़ी में कोई काम ठीक नहीं होता तुमसे....,जब प्रसून को पसंद नहीं तेरा नौकरी करना तो नौकरी छोड़ क्यों नहीं देती"खींझते हुये रमा जी ने कहा।
पाखी ने कोई जवाब नहीं दिया। एक खामोश नजर रमा जी पर डाल कमरे में चली गई। उस नजर में जाने क्या था, रमा जी आहत हो गई। "ये लड़की भी ना, कुछ बोलेगी नहीं, मौन शब्द फेंक चली जाती है "चिढ़ते हुये रमा जी मन ही मन भुनभूनाई।
तभी प्रियम और प्रीता बाहर से खेल कर आ गये, घर में फैले सन्नाटे को देख प्रियम बोला "आज फिर पापा ने माँ से झगड़ा किया "।
"चुप कर, पापा क्यों माँ से झगड़ा करेगा "रमा जी बोली,तभी पाखी के ऊपर बच्चों की निगाह गई,
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Ek din sab ka hijab hoga ... @
Anbhakto ka sacchai Jo dusre pe ungli karte h aur sach ye h apne gilban me jahkne me saram aata h
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