Shwetabh Pathak

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20/05/2026

भगवान के भिन्न भिन्न अवतार और भगवान में तत्व से कोई अंतर नहीं है।
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20/05/2026

करत मन नैनन ही सों बात !
तुम्हरे कारन मन मोहन सों , हमहूँ जोरयो नात !
कैसेहूँ रहि तू बिनु अब देखे , सुन्दर श्यामल गात !
उन नैनन की चोट खाय तू , निज नैनन झरि लात !
अब उन बाँकी झाँकी नित हौं , इक पल रहि न सकात !
अति आघात न सहिहैं अब लौं , तजि देहहिं हम जात !
कहत नैन तुम धीर धरो मन , निश्चित होइहैं प्रभात !
इक दिन श्याम दरस पुनि देइहैं , मनहूँ “श्वेत” सौगात !

- श्वेताभ पाठक
Shwetabh Pathak
Shwet Prem Ras

20/05/2026

कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम् ।
सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं
गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते गोपाल चूडामणिः ॥

भावार्थ: हे श्रीकृष्ण! आपके मस्तक पर कस्तूरी तिलक सुशोभित है। आपके वक्ष पर देदीप्यमान कौस्तुभ मणि विराजित है, आपने नाक में सुंदर मोती पहना हुआ है, आपके हाथ में बाँसुरी है और कलाई में आपने कंगन धारण किया हुआ है।"

हे हरि! आपकी सम्पूर्ण देह पर सुगन्धित चंदन लगा हुआ है और सुंदर कंठ मुक्ताहार से विभूषित है। आप सेवारत गोपियों के मुक्ति प्रदाता हैं। हे ईश्वर! आपकी जय हो। आप सर्वसौंदर्यपूर्ण हैं।'

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