The Final Reel

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10/08/2023

शांति घोष का जन्म 22 नवम्बर 1916 को कलकत्ता में हुआ था और उनके पिता एक प्रोफेसर थे,

और सुनिधि चौधरी का जन्म 22 मई 1917 को त्रिपुरा जिले के इब्राहमपुर गाँव के एक मध्यमवर्गीय हिन्दू परिवार में हुआ था,

ये दोनों 'युगांतर पार्टी' की सदस्य थीं और भगत सिंह की फांसी के बाद व्यथित क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को सबक सिखाने के लिए कोई बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया और इसी कड़ी में इस काम को अंजाम देने के लिए ये दोनों बहादुरी से सामने आई! इन दोनों ने गोली चलाने का प्रशिक्षण लिया हुआ था!

14 दिसम्बर 1931 को त्रिपुरा के फैजुन्निसा बालिका विद्यालय की दो छात्राओं शांति घोष और सुनीति चौधरी ने अंग्रेज अधिकारी सी जी बी स्टिवेन से मिलने की अनुमति मांगी; कारण पूछने पर उन्होंने जवाब दिया कि वे दोनों 'लड़कियों की तैराकी प्रतियोगिता' को लेकर स्टिवेन से कुछ बात करना चाहती हैं; और जैसे ही स्टिवेन से इन दोनों का सामना हुआ इन्होंने गोली चला दी! इन वीरांगनाओं का निशाना अचूक था, स्टिवेन वहीं मर गया और दोनों वीर बालाएं गिरफ्तार कर ली गईं;

दोनों को इस बात की उम्मीद थी कि उन्हें भी भारत माँ के लाल भगत सिंह की तरह फाँसी पर झूलने का मौका मिलेगा, लेकिन वो दोनों उस समय नाबालिग थी इसलिए दोनों को फांसी न देकर काले पानी की सजा दी गई; लेकिन यातनाएं देते समय अंग्रेजों ने उनकी उम्र का लिहाज नहीं किया, लेकिन दोनों वीर बालाओं ने हँसते-हँसते सब यातनाएं सहन कीं!

सबसे अचरज की बात तो यह है कि कलमकारों ने इन वीरांगनाओं का आजादी के इतिहास में कभी कहीं कोई जिक्र नहीं किया!

क्या सचमुच आजादी गाँधी और नेहरू ने दिलवाई थी? तो भारत माँ की आजादी के लिए मर मिटने वाले ये दीवाने कौन थे?

सवाल के लिए धन्यवाद मानवेन्द्र जी;

जय हिन्द…🇮🇳

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