Emew
02/12/2025
युगों-युगों तक वह नाम स्मरण किया जाएगा, जिसने माना कि वेद ही परब्रह्म की श्वास हैं।
वे हैं देवव्रत महेश रेखे — जिन्होंने शुक्ल यजुर्वेद के 25 लाख पद ‘डण्डक क्रम’ जैसी अत्यंत जटिल विधि में, लगातार 50 दिनों तक, वह भी बिना ग्रंथ देखे, उच्चारित किए।
काशी के वल्लभराम सालिग्राम सांगेवेद विद्यालय में इतिहास रचा गया है।
सैकड़ों वर्षों में यह केवल दूसरी बार संभव हो पाया है। यही तपस्या का स्वरूप है। उनके पिता-पितामह इस परंपरा में दीक्षित और सिद्ध रहे हैं। ऐसे पुरुष तपस्विनी माताओं की कोख से जन्म लेते हैं। वेद और धर्मशास्त्र ही सनातन सत्य हैं। जय श्री काशी विश्वनाथ 🙏 जय श्री राम 🙏 जय श्री हनुमान 🙏 जय श्री महाकाल 🙏 हर हर महादेव शंभू।।।💚💚🌹🌺
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