Carpenter Unity Samaj Party

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04/06/2026

बढ़ई की आख़िरी कलाकृति
बहुत समय पहले की बात है, एक शहर में रामू नाम का एक बढ़ई रहता था। वह अपने काम में बेहद निपुण था। उसने अपनी पूरी ज़िंदगी एक बड़े ठेकेदार (Builder) के यहाँ शानदार लकड़ी के घर, आलीशान दरवाज़े और बेहतरीन फ़र्नीचर बनाने में लगा दी थी। उसकी ईमानदारी और कला की हर जगह तारीफ़ होती थी।
अब रामू बूढ़ा हो चुका था और थक गया था। उसने सोचा कि अब उसे काम छोड़कर आराम करना चाहिए, अपने परिवार और पोते-पोतियों के साथ समय बिताना चाहिए।
एक दिन वह ठेकेदार के पास गया और बोला, "मालिक, मैंने जीवन भर पूरी लगन से काम किया। लेकिन अब मेरा शरीर थक गया है। मैं नौकरी छोड़ना चाहता हूँ और अपने परिवार के साथ सुकून से रहना चाहता हूँ।"@
ठेकेदार को अपने सबसे अच्छे और भरोसेमंद बढ़ई के जाने का बहुत दुख हुआ। उसने रामू को रोकने की कोशिश की, लेकिन रामू का फ़ैसला पक्का था।
तब ठेकेदार ने उदास होकर कहा, "ठीक है रामू, तुम जाना चाहते हो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूँगा। लेकिन जाने से पहले, क्या तुम मेरे निजी अनुरोध पर एक आख़िरी घर बना सकते हो? बस यह एक आख़िरी काम मेरे लिए कर दो।"
रामू ठेकेदार को मना नहीं कर पाया। उसने हाँ तो कह दी, लेकिन उसका मन अब काम में नहीं था। वह जल्द से जल्द काम ख़त्म करके वहाँ से मुक्त होना चाहता था।
काम में लापरवाही
जब रामू ने घर बनाना शुरू किया, तो उसकी सालों पुरानी लगन और सफ़ाई ग़ायब थी। उसने:
घर के ढांचे के लिए सस्ती और कमज़ोर लकड़ी का इस्तेमाल किया।
दरवाज़ों और खिड़कियों की फ़िनिशिंग पर ध्यान नहीं दिया।
काम को जल्दबाज़ी में जैसे-तैसे खींचकर पूरा किया।
जो भी रामू की कला को जानता था, वह देख सकता था कि यह उसका सबसे ख़राब काम था। रामू को भी अंदर ही अंदर अपनी इस लापरवाही पर थोड़ी शर्म महसूस हो रही थी, लेकिन उसने सोचा—"अब क्या फ़र्क पड़ता है, यह तो मेरा आख़िरी काम है।"
एक चौंकाने वाला उपहार
कुछ हफ़्तों बाद घर बनकर तैयार हो गया। रामू ठेकेदार के पास गया और बोला, "मालिक, आख़िरी घर तैयार है। अब मुझे जाने की अनुमति दें।"
ठेकेदार उस घर को देखने आया। उसने घर का निरीक्षण किया और फिर मुस्कुराते हुए अपनी जेब से घर की मुख्य चाबी निकाली। उसने वह चाबी रामू के हाथ में रख दी और कहा:
"रामू, यह घर तुम्हारी सालों की वफ़ादारी, ईमानदारी और कड़ी मेहनत के लिए मेरी तरफ़ से तुम्हें एक उपहार है। आज से यह आलीशान घर तुम्हारा हुआ!"
यह सुनते ही रामू सन्न रह गया। उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वह गहरे अफ़सोस में डूब गया।
वह मन ही मन सोचने लगा—"हे भगवान! काश मुझे पता होता कि मैं यह घर अपने ख़ुद के लिए बना रहा हूँ, तो मैं इसे दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत और मज़बूत घर बनाता! मैंने अपने ही घर को कमज़ोर लकड़ियों और लापरवाही से खड़ा कर दिया।"
कहानी से सीख (Moral Of The Story)
यह कहानी हम सभी के जीवन की है। हम रोज़ अपने जीवन रूपी घर का निर्माण करते हैं, लेकिन कई बार हम काम को बेमन से या लापरवाही से करते हैं, यह सोचकर कि "चलो आज का दिन काट लेते हैं।"
हम भूल जाते हैं कि हम आज जो मेहनत, ईमानदारी (या लापरवाही) अपने काम में लगा रहे हैं, उसका परिणाम कल हमें ही भुगतना या भोगना पड़ेगा। हमारा कल कैसा होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज अपना काम कितनी शिद्दत से करते हैं।
इसलिए, आप जो भी काम करें—चाहे वह छोटा हो@ या बड़ा—उसे अपनी पूरी ताकत और बेहतरीन कला के साथ करें!

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