Rajendra sameeja
12/09/2021
हमारी टीम कॆ लिए यह केस एक चैलेंज था क्योंकि सामान्यत: यह अपराध सहमति से सम्बन्ध स्थापित करने का था । आईपीसी 497 और IT एक्ट तक का था व ऎसी ही सोच पुलिस अधिकारियों की थी परन्तु हमे पता था IPC 497 में माननीय उच्चतम न्यायालय का क्या फैसला था ।
अपराध की फ्रेमिंग करते समय हमे आभास हुआ कि एक नाबलिग बच्चा इस कृत्य को देख रहा है या उसे दिखा कर किया जा रहा है । साथ ही बच्चे को भी इस कृत्य में शामिल किया गया और बस यही से पोक्सो एक्ट शुरू हो गया । वीडियो बनाने और वायरल होने से चाईल्ड प्रोनोग्राफी भी शामिल हो गई । हमारे साथी , एडवोकेट प्रकाश जी लाम्बा जयपुर से, एडवोकेट ओम प्रकाश जी नागोर, एडवोकेट मंजु जी उदयपुर , के साथ जुड़कर क्राईम की फ्रेमिंग की और पुलिस थाने चितावा नागोर ओर SP कार्यालय नागोर में पीड़ित की ओर से FIR पेश हुई । यह कठिन कार्य था लेकिन अपराध की पुष्टि और उसकी फ्रेमिंग करने के बाद अपराध का सही पता चलता है । जब अपराध रिकोर्ड पर आया तो पुलिस अधिकारी सकते मे थे ,कानून की पुस्तके खंगाल रहे थे निर्देश ले रहे थे ।
अपराध की गम्भीरता का अहसास प्रस्तुत FIR से हुअ एक दुसरे को बचाने या वसुली के चक्कर मे स्वीमिंग पुल मे डुबते गए । सुना है लम्बी लाईन है । जुलाई महिने की 26 तारिख को जयपुर के कालवाड थाने मे इस विडियो का मामला दर्ज हो चुका था लेकिन उच्चाधिकारी हर स्तर पर दबाते रहे । यही हाल पुलिस थाना चितावा नागौर का रहा जहां संज्ञेय अपराध मे मुकदमा दर्ज नही किया जा रहा था । SP नागौर और जयपुर के SP को पुरी तरह मामला ध्यान मे था । पर किसी ने पोक्सो एक्ट की धारा 11(1)(2) व 12 ,13(b)(c) IT एक्ट की धारा 67 A, 67B में गम्भीर अपराध कारित हो चुका है इसकी समझ नही थी । जिन पुलिस अधिकारियों के संज्ञान मे यह मामला था या जहा FIR दर्ज करने हेतु दी गई यह पोक्सो एक्ट मे मामला दर्ज नही किया जिसमे नागोर SP ,नागोर एडिशनल एस पी राजेश मीणा , CO कुचामन मोटा राम , ओर थानाधिकारी चितावा, प्रकाश मीणा के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 19 (2) मे अपराध दर्ज होना चाहिए ।
पोक्सो एक्ट मे अपराध दर्ज नही करना भी एक पोक्सो का अपराध हे जो पोक्सो एक्ट की धारा 19 मे परिभाषित होकर धारा 21 मे दण्ड का प्रावधान हे । यही अपराध करना हरिशंकर शर्मा ACP झोटवाडा ओर SHO कालवाड गुरूदत्त सेनी पर बनता हे ।
कानुन IPC CRPC से चलता हे किसी पुलिस अधिकारी को यह गलत फहमी नही होनी चाहिए। कि उनके IPS या RPS होने से कानून चलता हे ।
जब वायरल विडियो और मामला DGP श्रीमान् M.L. लाठर सर तक पहुँचाया गया ।
श्रीमान् लाठर सर ने अपराध की गम्भीता को समझ पुलिस की स्वच्छ छवी को लेकर त्वरित कार्यवाही कर एक के बाद एक छः पुलिस अधिकारियों को निलम्बित किया । जिसमे चार RPS अधिकारी है
श्रीमान् न्यायप्रिय लाठर सर का आभार और सेल्युट । तेजाराम प्रकरण के बाद इस नागौर के प्रकरण में न्याय करने के लिए साधुवाद ।
राजेन्द्र समीजा
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