Prem Ka Intezar
*कब आओगी?*
सन्नाटा अब मेरे दिल का गीत बना है,
फिर भी हँसते रहो प्रेम, लड़के का रोना मना है।
तू कहाँ है, दिकु? हर दिशा में तुझे ढूँढता हूँ,
हर गली, हर मोड़ पे पागलों सा घूमता हूँ।
हर मोड़ पर तुझे आवाज़ दी मैंने,
हर दुआ में तेरा नाम लिया मैंने।
अब खुद से सवाल करने लगा हूँ,
अपनी ही ज़िंदगी से रोज़ बवाल करने लगा हूँ।
अब नींद भी ख्वाबों से डरने लगी है,
तेरी यादें सीने में जलने लगी हैं।
कब लौटेगी तू — यही सोचता हूँ,
मैं 'प्रेम', तुझे हर साँस में खोजता हूँ।
*प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए*
— प्रेम ठक्कर 'दिकुप्रेमी'
13/04/2025
*शीर्षक: ज़िंदगी*
तेरे बिना ये साँझ भी वीरान लगी,
हर सुबह भी अब तो अनजान लगी,
मैं मुस्कराया पर दिल रो दिया,
*दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया?*
तन्हा हुआ तो वक़्त भी थम गया,
हर रास्ता जैसे मुझसे छिन गया,
जब तू थी, हर मोड़ पे तूने हौंसला दिया,
*दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया?*
बातें अधूरी, ख्वाब भी चुपचाप हुए,
तेरे बिना लम्हे कितने बेहिसाब हुए,
तुझसे बिछड़ कर हर पल को मैं मर-सा जिया,
*दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया?*
आज भी भरोसा है की लौटेगी तू,
हर साँस में फिर से मुझे खोजेगी तू,
तेरी जुदाई ने सुकून मुझसे मेरा छीन लिया,
*दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया?*
प्रेम का इंतजार अपनी दिकु के लिए
— प्रेम ठक्कर 'दिकुप्रेमी'
सूरत, गुजरात
🙏 *माँ से प्रार्थना* 🙏
हे मातारानी, सुन लो मेरी पुकार,
दर्द भरा है, मेरे मन में अपार।
जहाँ भी हो, मेरी दिकु में नूर रहे,
हर दुःख-पीड़ा उससे दूर रहे।
उसकी राहों में खुशियाँ लुटा दो,
हर मुश्किल को छू-मंतर करा दो।
उसकी हँसी सदा खिली रहे,
आँखों में कभी नमी न रहे।
अगर लिखा है किस्मत में साथ,
तो फिर से लौटा दो मधुमास।
फिर से वही हँसी खिल जाए,
फिर से दिकुप्रेम के जीवन में भर जाएं प्रेम की मिठास।
पर यदि मेरी चाहत अधूरी रहे,
तो बस इतना दे दो आशीर्वाद,
दिकु का हर लम्हा सुकून भरा हो,
हर घड़ी रहे खुशियों से वोह आबाद।
हे माँ, मेरी प्रार्थना सुनो,
आपकी कृपा हर दुख हराए।
दिकु सदा मुस्कुराती रहे,
उस पर कभी भी कोई आँच न आए।
जय माता दी! 🙏💖
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