Dr Rajeshwar Uniyal
18/09/2025
श्राद्ध पक्ष में श्वान अभाव...
श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों को विधिवत तर्पण के बाद गाय, कौआ और श्वान को पूड़ी खिलाने का प्रावधान है। अब गांवों व छोटे शहरों में कौवे, गाय और कुत्ते तो आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन महानगरों में यह समस्या बनी रहती है कि विधिवत तर्पण के बाद इन तीन पूड़ियों को उपरोक्त जीवों को कैसे खिलाया जाए ?
ठीक है ! आकाश की ओर देखेंगे, तो कौवे तो उड़ते हुए मिल जाते हैं , इसलिए किसी भी पार्क में या पेड़ के नीचे पूड़ी रख दीजिए, कौवे आकर खा लेंगे । मुंबई जैसे शहरों में गौमाता लगभग हर मंदिर के आगे या दो-चार किलोमीटर के बाद बंधी हुई भी मिल जाती है । लेकिन सबसे बड़ी समस्या कुत्तों की है । ऐसा नहीं कि कुत्ते हैं नहीं ! हर बिल्डिंग में चार-छह लोग तो कुत्ते पालते ही हैं। परंतु वह कुत्ते एलशेसियन या जर्मन शेफर्ड (यूट्यूब वाला नहीं) तथा विदेशी प्रजाति के होते हैं और वह कोई भी बाहरी खाना ना तो खाते हैं और ना आप खिलाने की हिम्मत कर सकते हैं। फिर क्या करें ? उधर हमारा सुप्रीम कोर्ट जब भगवान विष्णु का अपमान करने तक में अपने अंदर गौरवान्वित अहसास करता है, तो फिर सामान्य कुत्तों को तो वह कुत्तों से भी बदतर मानता है । कई बार गलियों में घूमने के बाद बड़ी मुश्किल से अगर कोई कुत्ता मिल भी गया, तो श्राद्धपक्ष में पूड़ी देखकर वह मुंह बना लेता है 😀 आखिर वह बेचारा एक दिन में कितनी पूड़ी खाएगा ? मुझे लगता है कि शायद भविष्य में जिस प्रकार से जगह-जगह लोग गाय बांधकर रखते हैं, ताकि गाय को रोटी खिलाने वाले उन्हें दस-बीस रूपए देकर पुण्य कमाएं, ठीक इसी तरह से भविष्य में लोग श्राद्ध पक्ष में गली-गली में गली के कुत्तों को व्यावसायिक रूप में अवश्य उपलब्ध कराएंगे ! खैर ! मैंने तो अपनी आस्था को बनाए रखने के लिए आधा घंटा घूमने के बाद अंततः एक कुत्ते को मना ही लिया 🙏 बाकी ईश्वर की जैसी लीला 🙏 डा. राजेश्वर उनियाल, मुंबई
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