Ashish electrical

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18/09/2025

सब कुछ मन में भर लो तो जिंदगी जहर बन जाती है, अगर एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दो, तो जिंदगी मौज बन जाती है
शुभ रात्रि

18/09/2025

दिल को छू लेने वाली बात 💖💕 #

15/09/2025

खूबसूरत चेहरे का क्या करना जब, दिल ही मैला हो, दिल को साफ कीजिए, काया तो स्वयं ही शुद्ध हो जाएगी। जय श्री कृष्ण 💫🌟🌈💖

15/09/2025

मतलबी दुनिया ने विपरीत समय में अपनी नजरें बदल ली परंतु, श्री कृष्ण जब से थामा तुमने मेरा हाथ मेरी किस्मत बदल गई 💫🌟🙏

14/09/2025

I got over 50 reactions on my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

12/09/2025

Aao milkar Radhe Radhe ka japa karein aur apne jeevan mein sakaratmak parivartan laayein. 🙏💫🌟🎉

10/09/2025

शुभ रात्रि, राधे राधे

10/09/2025

कहानी – अधूरी कली

सीमा की शादी को पाँच साल हो चुके थे। वो मासूम, हंसमुख और प्यार करने वाली लड़की थी। लेकिन किस्मत ने उसके हिस्से में एक दर्द लिख दिया था — वो माँ नहीं बन सकती थी।

शुरुआत में सब ठीक था, पर धीरे-धीरे ससुराल वाले उसे ताने मारने लगे।
"घर में खुशियों की किलकारियाँ कब सुनाएगी?"
"तेरे कारण हमारा घर सूना है…"
ऐसे ताने उसकी आत्मा को रोज़ घायल करते।

सीमा कोशिश करती थी मुस्कुराने की, अपने पति और परिवार को खुश रखने की। लेकिन उसके हर प्रयास को यह कहकर ठुकरा दिया जाता कि "बच्चा नहीं तो सब बेकार है।"

उसका पति भी कभी उसका साथ नहीं देता। धीरे-धीरे सीमा अकेली हो गई। रातों में तकिए से लिपटकर रोती और भगवान से पूछती – "क्या औरत की पहचान सिर्फ माँ बनने से है?"

लेकिन सीमा के भीतर अब भी इंसानियत जिंदा थी। उसने सोचा,
"अगर मैं किसी को जन्म नहीं दे सकती, तो किसी अनाथ को माँ का प्यार तो दे सकती हूँ।"

वो पास के अनाथालय जाने लगी। बच्चों के साथ खेलती, उन्हें पढ़ाती, उनके लिए कपड़े और खिलौने लाती। उन बच्चों की हंसी में उसे अपनी दुनिया दिखने लगी।

धीरे-धीरे उसका दर्द कम हुआ। पर ससुराल वालों को ये कभी समझ नहीं आया। वो अब भी उसे ताने मारते रहे।

सीमा ने एक दिन चुपचाप अपना फैसला लिया। उसने ससुराल छोड़ दिया और अनाथालय में ही रहना शुरू कर दिया। वहाँ सैकड़ों बच्चे उसे "माँ" कहकर पुकारने लगे।

उसके अपने जीवन में माँ बनने का सपना अधूरा रह गया,
लेकिन वो अधूरी कली सैकड़ों मासूमों के लिए एक छाँवदार पेड़ बन गई। 💖🌸🏠️️️️

09/09/2025

राधिका एक छोटे से गाँव में रहती थी। बचपन से ही उसका मन श्रीकृष्ण में लगा हुआ था। जब बाकी बच्चे खेलों में मस्त रहते, राधिका मंदिर में बैठकर बांसुरी की मधुर धुन में खो जाती। उसके चेहरे पर ऐसी शांति रहती मानो स्वयं वृंदावन की राधा हो।

लेकिन उसके घर वाले उसके इस भक्ति भाव को समझ नहीं पाते थे। पिता कहते –
"ये सब छोड़, पढ़ाई कर, घर का नाम रोशन कर।"
माँ कहती –
"लोग क्या कहेंगे? दिन-रात मंदिर में बैठी रहती है। शादी कौन करेगा तुझसे?"

राधिका के लिए ये बातें तीर की तरह लगतीं, लेकिन उसका मन कृष्ण में इतना रमा था कि वह किसी और चीज़ में मन ही नहीं लगा पाती। जब घर वाले उसे डाँटते, वह चुपचाप अपनी छोटी-सी बांसुरी लेकर खेतों की तरफ निकल जाती और पेड़ के नीचे बैठकर कान्हा को याद करती। उसकी आँखों से आँसू बहते, पर होंठों पर एक ही नाम रहता – "कृष्ण... कृष्ण..."

एक दिन घर में बड़ा झगड़ा हुआ। पिता ने गुस्से में कहा –
"अगर तूने ये पागलपन नहीं छोड़ा तो हमारा तुझसे कोई नाता नहीं रहेगा।"

राधिका का दिल टूट गया। उसने सोचा – "क्या सच में मेरे अपने ही मुझे नहीं समझते? कृष्णा, अब तुम ही मेरे सब कुछ हो।"

उस रात राधिका घर छोड़कर निकल पड़ी। उसके कदम उसे गाँव के बाहर नदी किनारे ले गए। वहीं चाँदनी रात में उसने आँसू भरी आँखों से कहा –
"प्रभु, सबने मुझे छोड़ दिया... अब आप ही मेरा सहारा हो।"

कहा जाता है उस रात राधिका ने बांसुरी की ऐसी मधुर धुन बजाई कि चारों ओर शांति छा गई। लोगों ने सुबह उसे नदी किनारे बैठे देखा, चेहरे पर अद्भुत तेज था। वह अपने प्रभु में लीन हो चुकी थी।

आज भी कहते हैं कि उस गाँव के मंदिर में राधिका का नाम लिया जाता है, क्योंकि उसने सब कुछ त्यागकर केवल कृष्ण को अपना लिया।

05/09/2025

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