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16/08/2025
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सोने की अंडे देने वाली मुर्गी की कहानी – Story of the Hen that Lays the Golden Eggs:
रामपुर गाँव में एक किसान रहता था। वह बहुत गरीब था, बहुत मुश्किल से उसके परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। एक दिन वह मायूस होकर अपने खेत के पास बैठा था। उसी रास्ते से एक संत महात्मा जा रहे थे। उन्होंने किसान से पूछा आप इतना उदास क्यों बैठे हो? किसान ने सारी बात संत महात्मा को बता दी। उसने अपने पास से कुछ पैसे किसान को दिए और बोले इस पैसे से आप 6 मुर्गियाँ खरीद कर लाओ।
किसान ने उन पैसों से मुर्गियाँ खरीद कर ले आया। अगले दिन उनमें से एक मुर्गी ने एक सोने का अंडा दिया। यह देख किसान और उसकी पत्नी खुशी से भर गए। मुर्गी प्रतिदिन एक सोने का अंडा देने लगी। यह देख किसान की पत्नी के अंदर लालच आ गई। वह बहुत जल्द आमिर बनना चाहती थी।
उसने अपने पति को समझाते हुए कहा, “ऐसे कब तक हम एक एक अंडे इकट्ठे करते रहेंगे। ऐसा करो इसका पेट फाड़ कर सारे अंडे निकाल लो। किसान ने ठीक वैसा ही किया, लेकिन उसके पेट में कुछ नहीं मिला। इस तरह किसान की स्थिति फिर से पहले जैसी हो गई। अब वह अपने किए पर पछताने लगा।
नैतिक सीख:
बिना विचारे जो करे सो पीछे पछताए, किसान को सब्र रखना चाहिए था।
Roar for a cause With a roar that echoes across the plains, lions h
दूर पहाड़ों के पास नदी के किनारे भेड़िया और ऊँट दो दोस्त रहते थे। ऊँट बहुत सीधा-साधा और भेड़िया बहुत लालची और मतलबी था। एक दिन भेड़िए ने देखा कुछ पंछी और जानवर नदी उस पार से तरबूज खा कर आ रहे थे। उसका मन ललचाया वह अपने दोस्त ऊँट के पास जा कर कहा, “ऊँट भैया! नदी उस पार बहुत सारे तरबूज लगे हैं। चलो हम लोग भी तरबूज खा कर आते हैं।
ऊँट उसकी बातों में आ गया। उसने भेड़िए को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी के उस पार तरबूज के खेत के पास ले गया। खेत में लगे तरबूज को देखते ही भेड़िए के मुँह में पानी आ गया। वह जल्दी से खेत में कूद गया और तरबूज खाने लगा। थोड़े समय में ही भेड़िए का पेट भर गया। लेकिन उसका दोस्त ऊँट अभी तरबूज खा ही रहा था। फिर, भेड़िया ने सोचा इसका पेट तो बहुत बड़ा हैं, ये तो एक दिन में सारे तरबूज खा जाएगा फिर हमें नहीं मिलेगा।
उसके दिमाग में शरारत सूझी वह तरबूज को तोड़-तोड़ कर फेंकने लगा और खुशी के कारण नाचने और चिल्लाने लगा। ऊँट ने उसे ऐसा करने से माना किया तो भेड़िया ने कहा, “हमें खाना खाने के बाद चिल्लाने और नाचने की आदत हैं।” तभी भेड़िए की आवाज सुनकर किसान मोटा डंडा लेकर आ गया। उसने ऊँट की पिटाई शुरू कर दी। ऊँट की पिटाई होते देख भेड़िया तेजी से भाग निकला और नदी के किनारे जा कर रुका।
पिटाई खाने के बाद ऊँट किसी तरह नदी के किनारे आ पहुँचा। भेड़िया ऊँट के ऊपर बैठकर नदी पार करने के लिए चल पड़ा। बीच नदी में पहुँचकर ऊँट बैठने लगा। उसके पीठ पर बैठे भेड़िया ने कहा, भैया! ये क्या कर रहे हो? ऊँट ने कहा, “मुझे खाना खाने के बाद पानी में बैठने की आदत हैं। ऊँट पानी में बैठ गया और लेटने लगा। भेड़िया पानी में बहते-बहते बहुत मुश्किल से किनारे लगा और उसको अपने किए पर पछतावा होने लगा।
नैतिक सीख:
हमें किसी को धोखा नहीं देना चाहिए और किसी के सीधेपान का फायदा भी नहीं उठाना चाहिए।सीख की किताबें
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