Rj Dimple
01/07/2026
27/06/2026
#पुणे के इस हादसे ने झकझोर कर रख दिया है। #केतन का वो अटूट भरोसा, #सिया का समाज के डर से उपजा वो खौफनाक कदम,और #चेतन की वो कायरता... सिया,चेतन और केतन... इन तीन नामों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह खौफनाक दास्तान सिर्फ़ एक अपराध नहीं,बल्कि एक सबक है। समाज का डर और अपनी इच्छाओं की अंधी दौड़ इंसान को किस कदर कायर बना देती है,यह इस घटना से साफ दिखता है।पर याद रहे,वक्त का तराजू हमेशा इंसाफ करता है। सच और सही फैसलों की अहमियत बताती कुछ पंक्तियां....
#शीर्षक: "मुखौटे,मोहब्बत और महापाप"
लोहागढ़ की ऊँची दीवारें आज भी चीख कर कहती हैं,
साजिशें कितनी भी गहरी हों,वो कभी छुपी नहीं रहती हैं।
किले की उन खामोश चट्टानों ने एक मंज़र अजीब देखा,
भरोसे की ओट में छुपा,मौत का वो मंज़र नज़दीक देखा।
तीन नाम, तीन जिंदगियाँ और एक खौफनाक रात थी,
जहाँ मोहब्बत के नाम पर,सिर्फ़ फरेब की बिसात थी।
एक #केतन था,जो आँखों में सुनहरे कल के ख़्वाब लाया था,
उसे क्या पता था,जिसे वो अपना समझा,वो काल का साया था।
छला गया वो मासूम,उस ऊँचे पहाड़ की चोटी पर,
धकेल दिया गया मौत के मुँह में,एक झूठे भरोसे के बल पर।
एक #सिया थी,जिसने लोक-लाज को अपना बहाना बनाया था,
समाज के डर का ओढ़कर चोगा,भीतर एक शैतान जगाया था।
कैसी थी वो मजबूरी, कैसा था वो समाज का डर,
कि सच बोलने की हिम्मत न हुई,पर हाथ रंग लिए खून से तर?
और एक #चेतन था,जो अंधा बनकर उस साज़िश का हिस्सा हुआ,
कायरता की हद पार कर,एक घिनौने जुर्म का किस्सा हुआ।
पीठ पीछे से वार करना,जिसे वो अपनी जाँबाज़ी समझ बैठा था,
भूल गया था कि कानून और कुदरत की लाठी,सब देख रही थी जो बैठा था।
आज सलाखों के पीछे खड़ा,वो झूठा इश्क़ सिसक रहा है,
दोष एक-दूसरे पर मढ़कर,दोनों का वजूद बिखर रहा है।
जो चले थे एक बेगुनाह को मिटाकर अपनी दुनिया बसाने,
आज खुद एक मिसाल बन गए,दुनिया को यह सच सिखाने।
#प्रेरणा:कभी सच से मुख मत मोड़ो,
अगर दिल गवाही न दे,तो झूठे रिश्तों की जंजीरें तोड़ो।
बगावत कर देना लाख गुना बेहतर है,किसी को मिटा देने से,
जिंदगी कभी आबाद नहीं होती,किसी का सुहाग लुटा देने से।
उठो कि अपनी आत्मा की आवाज़ को दबाना बंद करो,
गलत राहों पर चलने के बजाय,सच का अभिनंदन करो।
#पुणे #प्रेरणा #परिणाम #इंसाफ #वक़्त
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