Saroj Kumar
09/01/2026
आज के दौर में यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई शिक्षित युवतियाँ सोशल मीडिया पर अशोभनीय डांस और गीतों के माध्यम से सिर्फ वायरल होने की चाह में अपने परिवार और समाज की मर्यादा को भूल रही हैं।
इससे भी अधिक पीड़ा की बात यह है कि कई पिता अपनी बेटियों को और कई युवा अपनी पत्नी को इस दिशा से रोकने में संकोच कर रहे हैं।
याद रखिए, असली सफलता और सम्मान अपनी काबिलियत को सही दिशा में लगाकर ही मिलती है। देश में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जहाँ शादी के बाद भी महिलाएँ ऊँचे पदों और सम्मानित मुकाम तक पहुँची हैं।
इसलिए सभी समझदार माता-पिता और युवाओं से निवेदन है बच्चों को सोशल मीडिया की चमक-दमक से दूर रखकर उन्हें सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और संस्कारी बनाएं। यही असली प्रगति और आधुनिकता है।
17/12/2025
सोशल मीडिया पर सकारात्मक सोच व रचनात्मक ऐक्टिविटी ही पोस्ट करें और अपने परिवार सहित बच्चों को भी पॉजिटिव ऐक्टिविटी के लिए ही प्रेरित करें पॉपुलैरिटी व वाइरल के चक्कर में नकारात्मक रूट का सहारा ना लें
अगर भक्ति भावना में इक्षा हो तो श्री कृष्णा के उपदेशों को सुनें एवं पढ़े Saroj Kumar 🙏
05/12/2025
बिहार में सरकार द्वारा अतिक्रमण हटाने और बुलडोज़र चलाने की नीति पर विचार प्रकट करना बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है
चलिए पहलुओं को समझते हैं
💭 विचार 1: सरकार का दृष्टिकोण (समर्थन में)
सरकार का यह कदम कानून और व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक सख़्त लेकिन ज़रूरी कदम माना जा सकता है।
अतिक्रमण न केवल सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा होता है, बल्कि यह विकास कार्यों में भी बाधा डालता है — जैसे सड़कों का चौड़ीकरण, नालों की सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण।
अगर प्रशासन पूर्व सूचना देकर, विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाता है, तो यह सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप है।
कानून सबके लिए समान होना चाहिए — चाहे वह गरीब हो या अमीर, राजनीतिक हो या साधारण नागरिक।
💭 विचार 2: जनता का दृष्टिकोण (विरोध में)
दूसरी ओर, यह भी सच है कि बिहार जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में गरीब लोग आजीविका के लिए फ़ुटपाथ, सड़क किनारे या सरकारी भूमि पर दुकानें या झोपड़ियाँ डालते हैं।
अगर बिना वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास दिए उन पर बुलडोज़र चलाया जाता है, तो यह मानवता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
सरकार को केवल “तोड़ने” की नहीं, बल्कि “पुनर्निर्माण” और “पुनर्वास” की नीति अपनानी चाहिए।
💭 विचार 3: संतुलित दृष्टिकोण (समाधान के रूप में)
सही रास्ता यह है कि सरकार अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती बरते, लेकिन साथ ही उन लोगों को भी सहारा दे जो मजबूरी में सार्वजनिक स्थानों पर बसे हैं।
न्यायसंगत नीति यह होगी कि:
पहले वैकल्पिक स्थान या पुनर्वास योजना दी जाए,
फिर कानूनी नोटिस देकर कार्रवाई की जाए,
और अंत में पारदर्शी तरीके से बुलडोज़र चलाया जाए।
इस तरह सरकार विकास और मानवता — दोनों के बीच संतुलन बना सकती है।
Saroj Kumar ✍️ निष्कर्ष
बुलडोज़र चलाना गलत नहीं है, अगर उसके पीछे नीयत न्याय की हो, न कि राजनीति की।
हर सरकार को यह याद रखना चाहिए कि अतिक्रमण हटाने से पहले इंसानियत को न हटाया जाए।
कानून का पालन और मानवता — दोनों साथ चलें, तभी बिहार और देश सही मायनों में “विकसित राज्य” बन पाएंगे
17/11/2025
मेरे बेटे का बचपन बिंदास है
न चिंता, न डर, बस हँसी, मस्ती और शरारतें भरपूर!
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