Rewa Times Now
08/01/2026
📄 उच्च न्यायालय का आदेश (दिनांक 06-01-2026) – सरल हिंदी में
🔍 यह मामला किस बारे में है?
यह मामला परिवीक्षा अवधि (Probation) के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन से की गई रिकवरी (कटौती) से संबंधित है, जो कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के दिनांक 12-12-2019 के परिपत्र पर आधारित थी।
उस परिपत्र के अनुसार:
पहला वर्ष (Probation) → 70% वेतन
दूसरा वर्ष → 80% वेतन
तीसरा वर्ष → 90% वेतन
बाद में जब कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया गया, तो सरकार ने “अधिक भुगतान” कहकर मासिक वेतन से रिकवरी शुरू कर दी।
⚖️ उच्च न्यायालय ने क्या निर्णय दिया?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ) ने पूरी तरह से:
❌ सभी वेतन रिकवरी आदेशों को निरस्त कर दिया
❌ GAD का परिपत्र दिनांक 12-12-2019 को अमान्य घोषित कर दिया
न्यायालय ने कहा कि यह परिपत्र: 👉 अवैध (Illegal) और तर्कहीन (Illogical) है।
🧠 न्यायालय का मुख्य तर्क
1️⃣ समान कार्य के लिए समान वेतन
यदि कोई कर्मचारी:
विधिवत चयन प्रक्रिया से नियुक्त हुआ है
पद पर पूर्णकालिक कार्य कर रहा है
👉 तो उसे परिवीक्षा अवधि में भी पूर्ण न्यूनतम वेतनमान (Full Minimum Pay Scale) पाने का अधिकार है।
2️⃣ कोई वैध वर्गीकरण नहीं
MPPSC से नियुक्त कर्मचारियों को पूरा वेतन मिल रहा था
अन्य कर्मचारियों को 70% / 80% / 90% वेतन दिया जा रहा था
❌ यह भेदभाव कानूनी रूप से उचित नहीं है।
3️⃣ पूर्व के निर्णयों का पालन
न्यायालय ने इन मामलों पर भरोसा किया:
State of MP vs. Dilliraj Bhilala (WA 1498/2024)
Indore Municipal Corporation vs. Vinita Tiwari (WA 2977/2025)
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का समान निर्णय
✅ अंतिम आदेश (बहुत महत्वपूर्ण)
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि:
✔ सभी रिकवरी आदेश रद्द किए जाते हैं
✔ जो राशि पहले वसूल की गई है, वह वापस की जाए
✔ जिन कर्मचारियों को परिवीक्षा में 100% वेतन नहीं मिला, उन्हें उस अवधि का पूरा वेतन व एरियर दिया जाए
📌 इसका आपके लिए व्यावहारिक अर्थ
🔹 यदि परिवीक्षा के कारण वेतन काटा गया → आप रिफंड मांग सकते हैं
🔹 यदि पहले 70% / 80% / 90% वेतन मिला → आप एरियर के हकदार हैं
🔹 यह निर्णय कर्मचारियों के पूरी तरह पक्ष में है
माना की शब्दो का चयन सही नहीं था। लेकिन मीडिया प्लेटफॉर्म में पूरा वीडियो चलाना था। IAS संतोष वर्मा जी का ओरिजिनल वीडियो पूरा जरूर देखें! #रीवा
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