Ankit

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19/10/2024

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहां
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूं देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं

हम ग़म-ज़दा हैं लाएं कहां से ख़ुशी के गीत
देंगे वही जो पाएंगे इस ज़िंदगी से हम

बर्बादियों का सोग मनाना फ़ुज़ूल था
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है
इक धुंद से आना है इक धुंद में जाना है

जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है
जंग क्या मसअलों का हल देगी

अरे ओ आसमां वाले बता इस में बुरा क्या है
ख़ुशी के चार झोंके गर इधर से भी गुज़र जाएं

इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के
आज तक सुलगते हैं ज़ख़्म रहगुज़ारों के

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा

तिरी दुनिया में जीने से तो बेहतर है कि मर जाएं
वही आंसू वही आहें वही ग़म है जिधर जाएं

पेड़ों के बाज़ुओं में महकती है चांदनी
बेचैन हो रहे हैं ख़यालात क्या करें

राह कहां से है ये राह कहां तक है
ये राज़ कोई राही समझा है न जाना है

ये भोग भी एक तपस्या है तुम त्याग के मारे क्या जानो
अपमान रचियता का होगा रचना को अगर ठुकराओगे

ज़मीं सख़्त है आसमां दूर है
बसर हो सके तो बसर कीजिए

किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे
हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमां न कर सके

यूं ही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना
तिरी याद तो बन गई इक बहाना......

14/10/2024

आज शाम साहिर को सुनते सुनते अचानक उनकी लेखनी पढ़ने का कौतुहल जाग गया. फिर मै लग गया….
साहिर लुधियानवी की लेखनी एक बहुआयामी शख्सियत की अभिव्यक्ति है, जिसमें प्रेम, विद्रोह, स्त्रीवाद और मानवता के विभिन्न पहलू उभरकर सामने आते हैं। उन्होंने न केवल साहित्य की दुनिया में बल्कि हिंदी सिनेमा में भी अपने गीतों के माध्यम से अमिट छाप छोड़ी। उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और पाठकों व श्रोताओं के दिलों को छूती हैं। साहिर लुधियानवी का साहित्य इस बात का प्रमाण है कि शब्दों में वह ताकत होती है, जो दिलों को जीत सकती है और समाज को बदलने की प्रेरणा दे सकती है।

उनकी शायरी और गीत हमें प्रेम करना सिखाते हैं, इंसानियत की कद्र करना सिखाते हैं, और समाज की बुराइयों के खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत भी देते हैं। साहिर लुधियानवी की लेखनी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी, और उनकी आवाज़ हमेशा उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी, जो न्याय, प्रेम और बराबरी के पक्षधर हैं।

11/10/2024

Stopping Shri. Akhilesh Yadav from going to JP Center to pay tribute is the height of shamelessness of BJP's Yogi government.

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