Chef Raja
11/09/2025
डाइनिंग स्टाफ और किचन स्टाफ के लिए
नमस्ते मेरे प्यारे सहकर्मियों, डाइनिंग स्टाफ और किचन स्टाफ! आज हम यहाँ एक टीम के रूप में खड़े हैं, लेकिन कभी-कभी हमारे बीच तनाव और आक्रामकता देखने को मिलती है। मैं समझता हूँ कि काम का दबाव, समय की कमी, और एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को लेकर गलतफहमी हो सकती है। लेकिन आज मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि हमारा असली लक्ष्य एक ही है - हमारे मेहमानों को खुशी और संतुष्टि देना!
डाइनिंग स्टाफ, आप हमारे मेहमानों के पहले चेहरे हैं। आपकी मुस्कान, आपका व्यवहार, और आपकी मेहनत से ही हमारी रेस्तरां की पहचान बनती है। और किचन स्टाफ, आप हमारे दिल हैं - आपकी कला, आपका जुनून, और आपकी मेहनत से हर थाली में जादू बनता है। लेकिन जब हम एक-दूसरे पर चिल्लाते हैं या गलतियाँ गिनाते हैं, तो हम अपनी ताकत को कमजोर करते हैं।
आइए, एक वादा करें - हर सुबह जब हम काम पर आएँ, तो एक-दूसरे का सम्मान करें। अगर कोई गलती हो, तो उसे सुधारने का मौका दें, न कि दोष देने का। डाइनिंग स्टाफ, किचन की मेहनत को समझें और किचन स्टाफ, फ्रंट की चुनौतियों को महसूस करें। हम एक सिक्के के दो पहलू हैं - अलग, लेकिन एक-दूसरे के बिना अधूरे।
कल्पना करें, जब हम एक साथ मिलकर काम करेंगे - मेहमान मुस्कुराएंगे, बॉस खुश होंगे, और हमारा आत्मविश्वास चमकेगा! तो चलें, आज से हर गुस्से को हँसी में बदलें, हर बहस को बातचीत में, और हर चुनौती को अवसर में। हम एक टीम हैं, और एक टीम के रूप में हम विजयी बनेंगे! 💪🍽️
आप सबमें वह जादू है, बस उसे एक-दूसरे के साथ साझा करें। शुभकामनाएँ!
22/07/2024
क्या है कहानी टुंडे कबाब की ?
टुंडे के कबाब, जिन्हें गलौटी कबाब के नाम से भी जाना जाता है, वो लखनऊ, भारत की एक मशहूर डिश है। ये बारीक पीसे हुए मांस से बनती है और Awadhi (अवधी) खाने का एक हिस्सा है। कहा जाता है कि इसे बनाने में 160 से भी ज्यादा तरह के मसाले डाले जाते हैं! बनाने में बारीक कटा हुआ भैंस का मांस, दही, गरम मसाला, अदरक का पेस्ट, लहसुन का पेस्ट, इलायची पाउडर, लौंग का पाउडर, घी, सूखा पुदीना, प्याज़ के छल्ले, सिरका, केसर, गुलाब जल, चीनी और नींबू का इस्तेमाल होता है।
टुंडे के कबाब की कहानी काफी दिलचस्प है। 17वीं सदी में मुग़लों के राज में, अवध राज्य में एक प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें सबसे नरम कबाब बनाने वाले रसोइये को इनाम दिया जाता। हाजी मुराद अली नाम के एक रसोइये ने, जिनके एक हाथ थे और जिन्हें "टुंडा" (एक हाथ वाला) के नाम से जाना जाता था, इस प्रतियोगिता में जीत हासिल की थी। उन्होंने ऐसे कबाब बनाए थे जो मुंह में रखते ही पिघल जाते थे। ये कबाब इतने मशहूर हो गए कि उन्हें "टुंडे के कबाब" के नाम से जाना जाने लगा। यही नाम चल पड़ा और ये डिश लखनऊ की पहचान बन गई।
"गलौटी कबाब" नाम भी इस कबाब की नरमी को ही बयां करता है। "गलौटी" शब्द हिंदी-उर्दू से आया है, जिसका मतलब है "पिघलने वाली चीज़"। ये बिल्कुल टुंडे के कबाब के टैक्सचर (texture) को बताता है, जो इतना नरम होता है कि मुंह में रखते ही पिघल जाता है।
#इतिहास_की_एक_झलक
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