Azam Khan Mev

Azam Khan Mev

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20/11/2024
30/10/2024

किसी और की दिल में गुंजाइश नहीं की
जिसे चाहा उसकी कभी नुमाइश नहीं की

एक तरफा ही इश्क करते रहे उनसे हम
बदले में मोहब्बत की फर्माइश नहीं की

अगर वो खोटे निकले तो रिश्ते टूट जाएंगे
इसी खौफ से उनकी आजमाइश नहीं की

कोई नापता है आसमां से सागर से तारों से
हमने कभी मोहब्बत की पैमाईश नहीं की

तू गलतफहमी में है मेरा कोई और भी यार है
तेरे सिवा किसी ओर की ख्वाहिश नहीं की

आज़म खान मेव रामपुर

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28/10/2024

एक रिश्ता नया पैदा कर के
वो जा रहे हैं झगड़ा कर के

जलाए हैं उन्होंने चराग़ घर में
दिल की बस्ती में अंधेरा कर के

कैसे मैं उसका इंतजार छोड़ दूं
वो गया है मुझ से वादा कर के

यह भी उसका सितम है हम पर
वो मिला है हम से पर्दा कर के

इश्क मेरे मुकद्दर में ही नहीं था
मैं तो तन्हा ही रहा दोबारा कर के

कैसे न मैं मोहब्बत की क़दर करूं
मैंने पाया है इसे ख़सारा कर के

कायनात भी हमें मिलाएगी
देखो तो कभी तुम इरादा कर के

आज बड़ी रस्में कसमें खाते हो
कल भूल न जाना वादा कर के

शायर आज़म खां मेव रामपुर

28/10/2024

एक रिश्ता नया पैदा कर के
वो जा रहे हैं झगड़ा कर के

जलाए हैं उन्होंने चराग़ घर में
दिल की बस्ती में अंधेरा कर के

कैसे मैं उसका इंतजार छोड़ दूं
वो गया है मुझ से वादा कर के

यह भी उसका सितम है हम पर
वो मिला है हम से पर्दा कर के

इश्क मेरे मुकद्दर में ही नहीं था
मैं तो तन्हा ही रहा दोबारा कर के

कैसे न मैं मोहब्बत की क़दर करूं
मैंने पाया है इसे ख़सारा कर के

कायनात भी हमें मिलाएगी
देखो तो कभी तुम इरादा कर के

आज बड़ी रस्में कसमें खाते हो
कल भूल न जाना वादा कर के

शायर आज़म खां मेव रामपुर

26/10/2024

खत मेरा सभी जलाना चाहिए था
उसे मुझे भूल जाना चाहिए था

उसे मुझ से इश्क है बेपनाह
मुझे भी तो बताना चाहिए था

तभी तो समझते जज्बातों को
उसका दिल भी दुखाना चाहिए था

उसने बात करने से मना किया था
मुझे तो फोन मिलाना चाहिए था

उसकी पाकीज़गी पर सकता न होता
मिलते हुए घबड़ाना चाहिए था

माना कि ग़म ए जुदाई था दिल में
फिर भी मुझे मुस्कुराना चाहिए था
#हिंदीसाहित्य #कविता

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