Jain Mission
03/05/2026
भारत में बढ़ता ईसाई धर्म जैनियों की अकर्मण्यता का नतीजा है ! अगर जैनी अपना धर्म दलित और आदिवासियों में फैलाते तो ईसाई धर्म ना फैलता!
02/05/2026
क्या आप जानते हैं ? Did You Know?
भगवान श्रीकृष्ण और 22 वे जैन तीर्थंकर नेमिनाथ सगे चचेरे भाई थे.
Bhagwan Shrikrishna and Neminath, the 22nd Teerthankar of Jainism were first cousins
21/04/2026
24/03/2026
भगवान महावीर के HD चित्र | Bhagwan Mahaveer HD Images
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04/03/2026
दान, अहंकार और जैन समाज की बदलती मानसिकता
दान का वास्तविक अर्थ है – स्वामित्व का पूर्ण त्याग. जिस वस्तु पर हमारा अधिकार था, उसे बिना किसी अपेक्षा, बिना किसी प्रसिद्धि की इच्छा के छोड़ देना ही दान है. परंतु आज समाज में एक विचित्र प्रवृत्ति दिखाई देती है – दान की वस्तु पर दाता का नाम मोटे अक्षरों में अंकित हो, यह आग्रह रहता है. यदि नाम छूट जाए तो असंतोष उत्पन्न होता है. प्रश्न यह है कि क्या यह दान है या दान के माध्यम से प्रतिष्ठा अर्जित करने का साधन? इस विषय को जैन आगमों के आलोक में समझना आवश्यक है.
पूरा लेख नीचे दी गयी लिंक पर पढ़िए:
दान, अहंकार और जैन समाज की बदलती मानसिकता दान का आदर्श स्वरूप वह है जिसमें दाता स्वयं को केवल निमित्त माने. कर्म सिद्धांत के अनुसार पुण्य का लेखा पत्थर की पट....
14/02/2026
24 तीर्थंकरों के प्राकृत नाम
आज हम जैन तीर्थंकरों को जिन नामों से जानते है, वह उनके मूल नाम नहीं है. मूल नाम प्राकृत भाषा के है. बाद में इनको संस्कृत नामों में बदला गया. ऐसा करते वक्त सिर्फ अनुवाद नहीं किया गया, बल्कि कई नामों के पीछे 'नाथ' यह शब्द जोड़ा गया. कुछ जगह नाम ही बदल दिए गए.
पढ़िए तीर्थंकरों के मूल प्राकृत नाम कौनसे हैं:
https://jainmission.theywon.in/24-teerthankar-names/
14/01/2026
जैन समाज की आबादी कैसे बढायी जाए?
जैन धर्म के अनुयायीयों की घटती हुयी आबादी एक चिंता का विषय है. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जैन समाज की संख्या लगभग 45 लाख है. यह भारत की कुल जनसंख्या में केवल 0.37% है, मतलब आधा प्रतिशत भी नहीं.
जैन आबादी को बढाने के लिए कुछ लोग जैन समाज से अपील करते है कि हर जैन पति-पत्नी को दो से अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए. लेकिन ऐसा हो ही नहीं सकता, क्यों कि आबादी का नियम यह है कि जिस समाज में संपन्नता और शिक्षा का प्रमाण जादा हो उस समाज की आबादी बढती नहीं बल्कि घटती रहती है. इसके कई उदाहरण है. जैसे कि यूरोप के गोरे लोगों कि आबादी घटती जा रही है. उसी प्रकार यहूदी समाज की जनसंख्या में भी गिरावट आ रही है.
भारत का पारसी समाज भी इसका एक बड़ा उदाहरण है. 1951 की जनगणना के अनुसार भारत में उनकी संख्या लगभग 1 लाख 12 हजार थी और 2011 की जनगणना के अनुसार वह 57 हजार के आसपास पहुंच गयी.
जैन समाज की आबादी बढ़ाने के कुछ उपाय इस लेख में दिए गए हैं, हर जैन व्यक्ति को इसपर विचार करना चाहिए. पूरा लेख आगे की लिंक पर पढ़िए, और लेख के नीचे अपने विचार रखिये:
https://jainmission.theywon.in/jain-population/
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जैन समाज की आबादी कैसे बढायी जाए? जैन समाज की घटती हुयी आबादी : जैन समाज की आबादी बढाने के कुछ अलग तरीके है. उन पर जैन मुनियों को और समाज को गौर करना चाह....
12/01/2026
जैन मिशन वेबसाइट की मदद कीजिए
आप हमारी मदद किस प्रकार कर सकते हैं?
• वेबसाइट के संरक्षक या सदस्य बनकर. संरक्षक का नाम, परिचय और संपर्क विवरण वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा.
सदस्यों के नाम और संपर्क विवरण सदस्यों की सूची में प्रकाशित किए जाएंगे.
• अपने व्यवसाय का विज्ञापन देकर.
• वेबसाइट के लिए लेख लिखकर.
आगे पढ़िए:
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11/01/2026
चतुर्थ जैन समाज का इतिहास
चतुर्थ समाज दिगंबर जैन समाज में जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ा जाति-समूह है. पूरे जैन समाज में यह दूसरा सबसे बड़ा समूह है. संख्या के मामले में दिगंबरों में चतुर्थ समाज अग्रवाल और खंडेलवाल जैनों से आगे हैं, जबकि पूरे जैन समाज में ये ओसवालों के बाद आते हैं.
इस लेख में चतुर्थ जैन समाज के इतिहास के बारे में ढेर सारी नयी जानकारी दी गयी है. विस्तार से पढिये नीचे दी गयी लिंक पर.
https://jainmission.theywon.in/chaturth-jain-samaj-ka-itihas/
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चतुर्थ जैन समाज का इतिहास - जैन मिशन चतुर्थ मुख्य रूप से दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक में बसे हुए हैं. खास तौर पर सांगली, कोल्हापुर, बेलगावी (बेलग....
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