Dhwaz Forever

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Photos from Dhwaz Forever's post 11/01/2024

सारे फसाद का जड़ "यह #दीपवंश_महावंश_और_दिव्यादान तीन पुस्तक है"

यही वह पुस्तक है जो बिंदुसार मोर्य का 100 पुत्र और उसमें से 99 की हत्या अशोक द्वारा होने की कहानी गढ़ता है।
जबकि पुरातत्व इस बात की पुष्टि नही करता है।

यही वह पुस्तक है जो पुष्यमित्र शुंग को बौद्ध विरोधी बताता है
जबकि पुरातत्व इसकी पुष्टि नही करता है।

यही वह पुस्तक है जो पुष्यमित्र को मोर्य का वंशज बताता है
जबकि पुरातत्व इसकी पुष्टि नही करता है।

लोगों को अंधभक्त बनना है तो इन तीनों पुस्तक की बात सत्य है
और
अगर तार्किक बनना है तो यह तीनों पुस्तक की कोई भी बात पुरातात्विक रूप से प्रमाणित नही है। यह पुस्तक भ्रम का पुलिंदा मात्र है।

फसाद का जड़ यही तीन पुस्तक है।

इस तीन पुस्तक का मूल लेखक कौन है और उस लेखक ने यह पुस्तक किस भाषा-लिपि के साथ किस वस्तु पर लिखा था?
इसका समुचित जवाब किसी के पास नही है।

कारण यह तीनो पुस्तक भ्रम का पुलिंदा है,
जिसका वर्णन #भ्रम_का_पुलिंदा पुस्तक के पेज नम्बर 38 पर किया हूँ।

भ्रम वंशियों को जब एक साजिश के तहत विश्व के महान जनकल्याणिकारी सम्राट पर ओछी टिप्पणी करना था, तो
एक नाटक करने वाला शिखंडी को सामने खड़ा कर दिया।

उसी प्रकार जब बिहार के माननीय मुख्य मंत्री जी पटना में सम्राट अशोक के नाम पर सभ्यता द्वार और कोनवेंसन सेंटर बना रहे थे,
तो इनके विरोधी पार्टी ने भी शिखंडी के रूप में प्रेम कुमार मणि जी को सामने खड़ा किया था।

जो बात आज दया शंकर सिन्हा जी ने लिखा है वहीं बात उस समय प्रेम कुमार मणि जी ने भी लिखा था।

दोनो के लेख में कोई अंतर नही है।

दोनों का लिंक दे दिया हूँ। आप लोग स्वयं से उसका अवलोकन करे।

दयाशंकर सिन्हा (नाटककार)
https://navbharattimes.indiatimes.com/india/sahitya-akademi-award-winner-author-daya-prakash-sinha-interview-said-emperor-ashoka-was-the-same-as-aurangzeb/articleshow/88767700.cms

Prem Kumar Mani (प्रेम कुमार मणि) राजद नेता।
https://www.forwardpress.in/2019/10/history-india-buddhism-ashoka-hindi/

Rajeev Patel

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