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Startups Of India: Pvt. Ltd., LLP or OPC? Registration & Tax benefits 04/02/2021

Startups Of India: Pvt. Ltd., LLP or OPC? Registration & Tax benefits If you have a good business idea but need funds and mentoring to implement that, then follow the below steps.

19/01/2021

PM Modi launches Rs 1,000-crore 'Startup India Seed Fund' Prime Minister Narendra Modi has launched Rs 1,000-crore 'Startup India Seed Fund' on 16 January 2021, while addressing the 'Prarambh: Startup India International Summit' 2021.

आज के स्टार्टअप्स हैं कल की मल्टीनेशनल कंपनियां, खेती से लेकर स्पेस क्षेत्र तक में बढ़ा इनका स् 03/01/2021

आज के स्टार्टअप्स हैं कल की मल्टीनेशनल कंपनियां, खेती से लेकर स्पेस क्षेत्र तक में बढ़ा इनका स् आज के स्टार्टअप्स कल की मल्टीनेशनल कंपनीज हैं। खेती से लेकर स्पेस क्षेत्र तक में स्टार्टअप्स के लिए स्कोप बढ़ रहा ...

13/10/2020

स्टार्टअप में इकनॉमिक स्टैब्लिटी कैसे लाया जाय -

ऐसा देखा गया है कि स्टार्टअप का प्रॉडक्ट और सर्विस को बाजार में सफलता मिलने के बार भी स्टार्टअप को कैश क्रंच के दौर से गुजरना पड़ता है । इसके पीछे की कारण हो सकते है पर असली वजह फाइनेंशियल बैकअप ही होता है । ये बैकअप स्टार्टअप के लिए एक समय पर बाजार से एक्सलेटर्स या इनवेस्टर्स के द्वारा मिल भी जाता है । पर एक तय समय तक आपके स्टार्टअप में इकनॉमिक स्टैब्लिटी बनी रहे यह निहायत ही जरूरी है । यदि आप चाहते हैं कि आपके स्टार्टअप में इकनॉमिक फ्रीडम के अधिक से अधिक अवसर हों तो आपको मेरे द्वारा सुझाए गए कुछ टिप्स को अपने स्टार्टअप के हिसाब से फॉलो करने चाहिए -

1. को-वर्किंग स्पेस से करें शुरुआत - किसी भी अर्ली स्टेज स्टार्टअप के लिए ये निहायत ही जरूरी है कि वो अपने प्रतिदिन के खर्चों को कम कर सके । किसी भी न्यू स्टार्टअप के लिए कोई जगह रेंट पर लेकर फिर उसे ऑफिस के लिए डेवलप करना मुश्किल काम तो है ही पर तब काफी मुश्किल हो जाता है जब आपके पास एक लिमिटेड बजट हो । ऐसे में मैं को-वर्किंग स्पेस को इस्तेमाल करने की सलाह दूँगा । क्योंकि एक बिल्डिंग में ऑफिस सेटअप करना और ऑफिस मैनेजमेंट सबंधित डेली के खर्चों से बचने का इससे बेहतर उपाय स्टार्टअप के लिए कुछ नही हो सकता । यदि आप एक मेट्रो सिटी में हैं तो आपको कई सारे को-वर्किंग स्पेस के ऑप्शन मिल जायेंगे । जहाँ आप एक फिक्स्ड अमाउंट देकर ऑफिस स्पेस ले सकते हैं । इसके अलावे मेम्बरशिप का भी ऑप्शन अधिकतर को-वर्किंग स्पेस कंपनियां उपलब्ध कराती है, जो आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है ।

2. प्रॉफिट का इस्तेमाल तरीके से करें - जो स्टार्टअप तीन वर्ष से अधिक समय से चल रहे हैं उनमें प्रॉफिट आना शुरू हो जाता है, लेकिन अनुभव की कमी के कारण ज्यादातर स्टार्टअप अपने प्रॉफिट का सही उपयोग नही कर पाते और फाइनांशियल क्रंच में हमेशा घिरे रहते हैं । देश मे 30% से ज्यादा स्टार्टअप अपने पहले प्रॉफिट का इस्तेमाल गैर जरूरी खर्चों में करते हैं जिनमें बोनस, प्रॉडक्ट लॉन्च, पार्टी या ऑफिस इंटीरियर है । नतीजन आप प्रॉफिट के बाद भी नो प्रॉफिट-नो लॉस के सिचुएशन में पहुंच जाते हैं ।

3. समय-समय पर टारगेट रिव्यू नही करना - किसी भी स्टार्टअप के जरूरी है कि आप अपने द्वारा तय किये गए लक्ष्यों के समय-समय पर रिव्यू करते रहें । वर्तमान में आपके पास जितना फंड है, उसी को देखते हुवे फ्यूचर प्लानिंग करें । यदि जरूरत पड़े तो आप लक्ष्य में बदलाव भी ला सकते हैं । इन सबके अलावा अपने इंवेस्टर को भी अपने फ्यूचर प्लान के बारे में जानकारी देते रहें, जिससे कि उनका विश्वास आप पर और आपके प्रॉडक्ट पर बना रहे ।

4. अच्छा बजट बनायें - प्रॉफिट को मैनेज करने का सबसे अच्छा उपाय है एक बेहतर बजट बनाना । आप मार्केटिंग में अधिक फोकस करना चाहते हैं या सर्विस को अधिक बेहतर करने के लिए बदलाव करना चाहते हैं तो बजट बनाते समय संबंधित विभागों के एक्सपर्ट की राय अवश्य लें । जब प्रॉफिट से बजट का डिस्ट्रीब्यूशन करेंगे तो एक्सपर्ट की राय से आपको मदद मिलेगी और फायदा भी नजर आने लगेगा ।

10/10/2020

स्टार्टअप के लिए कहाँ से आयेगा फंड ???

किसी भी नए स्टार्टअप में कोई भी निवेशक ऐसे तुरत में अपना पैसा नही लगा देता वो पैसा लगाने से पहले स्टार्टअप की भली भांति जाँच परख करता है कि उसको इन्वेस्ट करने से फायदा होगा या नुकसान । ऐसे में कोई भी स्टार्टअप बिजनेस स्टार्ट करने से पहले हमें सबसे पहले खुद की सेविंग के बदौलत ही उसे खड़ा होना पड़ता है । तद्पश्चात जब हमारा बिजनेस थोड़ा डेवलप हो जाता है तो हमें बाहरी फंडिंग जुटाने में आसानी होती है । तो आइये आज स्टार्टअप बिजनेस के कुछ फंडिंग प्लेटफॉर्म्स के बारे में जानते हैं -

इंक्यूबेटर और एक्सलेटर- किसी भी तरह के स्टार्टअप को शुरुआत में ही एक अच्छे इंक्यूबेटर की तलाश कर लेनी चाहिये । आजकल कई ऐसे प्राईवेट इंक्यूबेटर है जो स्टार्टअप को उनके स्टार्टिंग फेज से ही उसका ना केवल मार्गदर्शन करते हैं बल्कि स्टार्टअप की अन्य जरूरतों का भी ख्याल रखते हैं । जिसमे फंड उपलब्ध करवाना मुख्य होता है । इसके लिए इन इंक़यूबेटर द्वारा समय-समय पर एक्सलेटर्स को इन्वाइट कर उनसे आपको फंडिंग करवाया जाता है । इस तरह इंक्यूबेटर आपके आईडिया को ना केवल बिजनेस मॉडल में ढालने में, आपकी मदद करता है बल्कि एक्सलेटर्स की मदद से आपके बिजनेस की फाइनेंशियल जरूरतों को भी काफी पूरा करवाता है । अतः कोई भी स्टार्टप शुरू करने से पहले आपको हमारे हिसाब से किसी ना किसी इंक्यूबेटर के साथ खुद को जोड़ लेना चाहिए ।

सरकारी स्किम - देखा जाय तो ये कहने में बड़ा आसान है कि सरकार द्वारा विभिन्न तरह की योजनाओं के माध्यम से पढ़े लिखे युवाओं के द्वारा खुद के उद्यम के लिए बैंकों या अन्य फाइनेंशियल इंस्टीच्यूशन के द्वारा लोन प्रोवाइड करवाया जाता है । पर ये मात्र कहने सुनने में ही अच्छा लगता है । क्योंकि जब आप इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सरकारी दफ्तरों में जाएंगे तो आपको बहुत तरह की कागजी कार्यवाही में ही अपना समय खपा देना होगा । फिर भी अगर आपके पास कोई स्टैब्लिश बिजनेस मॉड्यूल है जिसपे आप सालों से काम कर रहे हैं तो आप भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम में अपना रजिस्ट्रेशन करके इस स्कीम का फायदा तो उठा ही सकते हैं । इस स्कीम के तहत क्या-क्या छूट आपको मिल सकती है । इस पर विस्तृत जानकारी हमने पहले के आलेख में दे दिया है ।

क्राउड फंडिंग - इस प्लेटफार्म का उपयोग सामान्यतः समाजिक कामों में ज्यादा देखने को मिलता है पर हाल के दिनों में इसके माध्यम से बिजनेस फंडिंग जुटाने का भी चलन आया है । क्राउड फंडिंग के कई सारे डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध है जहां आप अपने बिजनेस के लोए क्राउड फंडिंग कैम्पेन स्टार्ट कर आसानी से अपने स्टार्टअप के लिए फंड जुटा सकते हैं । फंडेबल, किकस्टार्टर, इंपेक्ट गुरु जैसे कई क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म की मदद इसके लिए ली जा सकती है । क्राउड फंडिंग पर एक विस्तृत आलेख मेरे द्वारा पहले दिया जा चुका है । जिसे आप इस पेज पर ही देख सकते हैं ।

बिजनेस लोन - लगभग सभी बैंक स्टार्टअप को बिजनेस लोन देते हैं । अगर आप बैंक से बिजनेस लोन लेना चाहते हैं तो आपकी कम्पनी का रजिस्ट्रेशन कम्पनी एक्ट या प्रोपराइटर शिप या एलएलपी के तहत होना चाहिए । कागजी खानापुर्ति के साथ-साथ आपको अपना बिजनेस प्लान भी बैंक के साथ साझा करना होगा । उस आधार पर बैंक आपको निर्णय करेगा कि आपको कितना बिजनेस लोन दिया जाना चाहिए ।

एफएफ इन्वेस्टर्स- भारतीय स्टार्टअप के लिए यह फंडिंग का सबसे प्रचलित तरीका है । जिसमें परिवार, दोस्त या आपके परिचित लोग आपके बिजनेस में इन्वेस्ट करते हैं । बस आपका बिजनेस आईडिया और प्लान क्लियर होना चाहिए । ताकि आप इन सबों को विश्वास में ले सके कि आप इन पैसों का उपयोग कहाँ और कैसे करेंगे जिससे कि आपका बिजनेस प्रॉफिट जेनरेट कर सके । किसी भी स्टार्टअप के लिए सीड फंडिंग का इससे बेहतर माध्यम कुछ और नही हो सकता । पर इसकी अपनी कुछ खामियाँ भी हैं जैसे अगर किसी अन्य कारणों से परिवारिक या आपसी संबंधों में खटास आती आती है तो इससे आपके बिजनेस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है । अतः हमारी सलाह है कि आप किसी तरह का कोई इन्वेस्ट जब अपने पारिवारिक सदस्यों से, या दोस्त एवं परिचितों से कराये तो उसका प्रॉपर प्रोफेशनल अग्रीमेंट जरूर करवाएं ।

एंजल इंवेस्टर- एंजल इंवेस्टर आपके बिजनेस में तभी इंवेस्ट करते हैं जब आप उन्हें अपने बिजनेस आईडिया, बिजनेस प्लान और रिटर्न्स प्लान से पूरी तरह संतुष्ट कर पाते हैं । ऐसे एंजल इंवेस्टर से आपको जोड़ने में बड़ी भूमिका इंक्यूयूबेटर का होता है । साथ ही समय समय पर बहुत सारे बिजनेस सेमिनार या आयोजन का आयोजन भी होता रहता है जहां ऐसे इंवेस्टर से आपकी मुलाकात होती है । अतः इन बिजनेस सेमिनार या आयोजन में जाने से आपको एक तरफ जहां अपने बिजनेस क्लाइंट को खोजने में, लीड जेनरेट करने में मदद मिलती है वहीं आपको बिजनेस संबंधी छोटी बड़ी बातों का ज्ञान भी मिलता है । अतः हमारी सलाह रहेगी कि आपको इस तरह के आयोजनों में भाग लेना चाहिए ।

उपर्युक्त आलेख लेखक के निजी विचार है । जिसका उद्देश्य मात्र इतना है कि आप कैसे अपने स्टार्टअप के लिए बेसिक तैयारी करें और उसे आगे बढ़ाएं । आपको हमरा ये आलेख कैसा लगा इस पर अपने विचार जरूर हमसे साझा करें । धन्यवाद

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