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06/02/2020
#बिहार_पुलिस_में_बैंक_गारंटी_फर्जीवाड़ा
सुशासन बाबू के राज में घोटाला को दबाने की कोशिश। हेराफेरी उजागर करने वाले सचिव को ही बनाया गया बलि का बकरा। चुनावी साल में बिहार की राजनीति को एक और फर्जी वाड़े ने उबाल दे दिया है। सत्तारूढ़ एनडीए की परेशानी का कारण इस बार पुलिस महकमा बन रहा है। बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम निगम में करोड़ों रूपए के बैंक गारंटी की हेरा फेरी का मामला उजागर हुआ है। मजेदार पहलू तो यह है कि जिस संवेदक द्वारा यह बैंक गारंटी का फर्जीवाड़ा किया गया उससे स्पष्टीकरण मांगना विभाग के सचिव कर्म लाल को महंगा पड़ गया। संवेदक की हनक और अधिकारियों के पक्षपात के परिणाम स्वरूप सरकार के खजाने की निगहबानी करने की कोशिश में लगे सचिव को ही पुलिस हिरासत में रखा गया है । बिहार सरकार निगरानी विभाग के अधिकारियों ने सचिव को फर्जी वाड़े को उजागर करने की कार्रवाई के कारण निशाने पर ले इतना टॉर्चर किया कि सचिव इंदिरा गांधी ह्रदय रोग संस्थान में जिन्दगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
बकौल कर्मलाल, सचिव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम निगम, उनके संज्ञान में आया कि निगम के कई टेंडर में बैंक गारंटी गलत दिया गया है। जिसके कारण सरकार को करोड़ों रूपए का नुकसान हो रहा था। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस निर्माण निगम के सीएमडी के सचिव होने के नाते मैंने यह संचिका टिप्पणी दी थी कि बैंक गारंटी गलत होने के कारण नियम संगत कारवाई की जाए। इससे क्षुब्ध संवेदक ने निगरानी से मिलकर मेरे ऊपर निगरानी में केस दर्ज करा दिया। कार्रवाई संवेदक पर न हो सचिव पर होने लगी और फर्जी वाड़े के दोषी संवेदक के राजनीतिक रसूख तले दबे निगम के अधिकारी सचिव को बलि का बकरा बना मामले की लीपापोती में लगे हैं। सवाल यह उठता है कि फर्जी वाड़े की जांच की दिशा क्यों बदली जा रही है?
उल्लेखनीय है कि विगत् 24 जनवरी को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सहायक सचिव कर्म लाल को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने उनके कार्यालय से हिरासत में लिया था। निगरानी द्वारा यह दावा किया गया कि उन्हें रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है जबकि सच्चाई इसके विपरित है। इसके बाद कर्मलाल के सीने पर वार किया गया जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कर्म लाल के बीमार होने की सूचना निगरानी कोर्ट में दिया है । कर्म लाल डीएसपी के पद से सेवा निवृत्त हुए हैं। उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए कई बार राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।फिलहाल वे संविदा के आधार पर बिहार पुलिस निर्माण निगम सहायक सचिव के पद पर अपनी सेवा दे रहे थे।
संवाददाता के पास उपलब्ध साक्ष्यों के मुताबिक कर्मलाल ने बैंक गारंटी फर्जी वाड़े को उजागर करते हुये वरीय अधिकारियों से जब संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की टिप्पणी कर रखी थी तो विभाग ने मामले की जांच व कार्रवाई के बजाय अपने ही कर्मचारी कर्म लाल को बलि का बकरा क्यों बनने दिया?
बैंक गारंटी फर्जी वाड़े को अंजाम देना और उस मामले की लीपापोती संदिग्ध तो है ही। क्यों नहीं इस मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच करवा कर सुशासन बाबू ऐसी पहल करें कि सूबे में एक नजीर स्थापित हो?
05/02/2020
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