Journalist Vikrant
17/04/2026
मोकामा में शिक्षा या व्यापार? प्राइवेट स्कूलों पर गंभीर सवाल
मोकामा में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी अब खुलकर सामने आने लगी है। शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से जिस तरह पैसे वसूले जा रहे हैं, उसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
स्कूल परिसर में ही “दुकान” चल रही है:
अब हालात ऐसे हैं कि कई प्राइवेट स्कूल अपने ही कैंपस में किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य सामान बेच रहे हैं। अभिभावकों को बाहर से खरीदने की आजादी नहीं दी जाती — जो स्कूल कहेगा, वहीं से खरीदना अनिवार्य बना दिया जाता है।
📚 किताबों और ड्रेस में भारी मुनाफा:
बाजार में मिलने वाली किताबें और यूनिफॉर्म जहां सस्ती होती हैं, वहीं स्कूल परिसर में वही सामान कई गुना महंगे दाम पर बेचा जा रहा है।
अभिभावक बेबस
बच्चों के भविष्य की चिंता में माता-पिता इस मजबूरी को सहन कर रहे हैं। विरोध करने पर बच्चों के साथ भेदभाव का डर भी बना रहता है।
नियमों की अनदेखी:
सरकारी नियमों के अनुसार कोई भी स्कूल किसी एक जगह से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता, लेकिन मोकामा में इस नियम की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
स्कूल या शोरूम?
जब शिक्षा देने वाली संस्था खुद “सेलिंग सेंटर” बन जाए, तो सवाल उठना जरूरी है — क्या शिक्षा अब मुनाफे का जरिया बन चुकी है?
📍 क्या हो कार्रवाई?
✔ स्कूल परिसर में सामान बिक्री पर तुरंत रोक लगे
✔ अभिभावकों को खुले बाजार से खरीद की छूट मिले
✔ फीस और अन्य चार्ज पूरी तरह पारदर्शी हों
✔ शिक्षा विभाग और प्रशासन द्वारा जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए
👉 मोकामा के अभिभावकों को अब एकजुट होकर इस मुद्दे पर आवाज उठानी होगी, ताकि आने वाली पीढ़ी को “शिक्षा” मिले, “शोषण” नहीं।
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