Manish singh Public Blog
18/06/2021
बाल मजदूरी की ओर भारत
कोरोना महामारी के बाद भारत के आर्थिक स्थिति बिगड़ गयी। लोग बेरोजगार हो गए जो महानगरों से लौटे तो पुनः वापस नही आ पाये। जिससे लोग आर्थिक स्थिति में भी कमजोर हो गए जिसके कारण बाज़ार में भी तंगी बनी रही। गरीबी बढ़ने के कारणों में फ़ैक्टरियों का बन्द होना भी पूरा असरदार रहा। गरीब दो जून के रोटी के लिये भी मुहताज हो रहे है जिसके कारण गरीब लोग अपने बच्चों को जान बूझकर भी आजीविका के लिए मजदूरी करने लिये भेजने लगे।
भारत वैसे भी बाल मजदूरी के लिए बदनाम था 2001 से 2011 तक जहां इसकी संख्या लगभग 50 लाख से नीचे था वही अब ये 2020 तक 90 लाख तक पहुंच गया।अब कोरोना महामारी के बाद इसकी संख्या में भारी इजाफा होने का आशंका जताई जा रही है। यदि आर्थिक विकास में थोड़ी ही रुकावट दिखा तो यह संख्या लगभग 1 करोड़ से भी बढ़ जाएगा। किसी भी देश के विकास में युवाओं का योगदान सरवोपरि है। क्योंकि युवा ही देश के निर्माता होते है।
आज के लिये जरूर यह सोचनीय मुद्दा हैकी 140 लोगों में लगभग एक बच्चा बाल मज़दूर बन रहे है। कहीं न कही यूनिसेफ और ईओल ( अंतर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन) की अनदेखी साफ व स्पस्ट दिख रहा है जिसके कारण बालमजदूरी को लगातार बढ़ावा ही मिल रहा है।वही सरकार को भी कई अहम कदम उठाने चाहिए। आज बच्चों के स्कूल जाने पर वहां डेमिल मुहहैया कराया जाता है ठीक उसी तरह छोटे बच्चे से 10वी कक्षा तक सरकार सभी गरीब परिवार के बच्चों को आश्रय, शिक्षा , स्वास्थ्य व भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए। 10वी के बाद जीवन यापन व जीवन निर्वहन के लिए समय समय पर सरकार उन्हें स्किल ट्रैनिंग भी दें।ताकि आगे भी राष्ट्र सुदृढ़ीकरण में मददगार साबित हो।
कई और भी सलाह सरकार को मुहहैया कराया गया है जिनपर सरकार सिर्फ कदम उठाकर एक मुक्कमल मुकाम तक पहुँचे यही सभी बुद्धिजीवियों का कामना है। आपके राय हमे कमेंट बॉक्स में जरूर प्रेषित करें।
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